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एएसजीएफआई को मान्यता न मिलने से बढ़ी प्रशिक्षकों की चिंता
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वाराणसी। 60 से भी ज्यादा खेलों का नेशनल टूर्नामेंट कराने वाले स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) को केंद्रीय खेल मंत्रालय से मान्यता न मिलने से काशी के खेल प्रशिक्षकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं खिलाड़ियों का मनोबल भी कम होता जा रहा है।
एसजीएफआई में चयनकर्ता और वीवीएस इंटर कॉलेज के खेल प्रशिक्षक गोपाल प्रसाद ने बताया कि 2017 की एक घटना के बाद मंत्रालय ने महासंघ से मान्यता रद्द कर दी थी। एसजीएफआई की नेशनल प्रतियोगिताएं स्कूली खिलाड़ियों के लिए एक विकल्प की तरह होती थीं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सहयोग से तो खिलाड़ी राज्य स्तर तक अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे। मगर नेशनल के लिए अन्य खेल संघों के ओपन प्रतियोगिताओं में अवसर तलाशना काफी कठिन होगा।
महामना इंटर कॉलेज बच्छांव के खेल प्रशिक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया एसजीएफआई की नेशनल प्रतियोगिता काशी के स्कूली खिलाड़ियों के लिए एक आसान प्लेटफार्म था। स्कूली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने से वंचित होना पड़ रहा है।
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ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर 2017 में 10वीं पेसेफिक स्कूल गेम्स में एसजीएफआई की तरफ से हॉकी की टीम भेजी गई थी। इसी टीम की एक छात्रा की आयोजन के दौरान डूबने से मौत हो गई थी। मंत्रालय ने इसे फेडरेशन की लापरवाही मानते हुए मान्यता रद्द कर दी थी।
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एसजीएफआई में चयनकर्ता और वीवीएस इंटर कॉलेज के खेल प्रशिक्षक गोपाल प्रसाद ने बताया कि 2017 की एक घटना के बाद मंत्रालय ने महासंघ से मान्यता रद्द कर दी थी। एसजीएफआई की नेशनल प्रतियोगिताएं स्कूली खिलाड़ियों के लिए एक विकल्प की तरह होती थीं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सहयोग से तो खिलाड़ी राज्य स्तर तक अच्छा प्रदर्शन कर सकेंगे। मगर नेशनल के लिए अन्य खेल संघों के ओपन प्रतियोगिताओं में अवसर तलाशना काफी कठिन होगा।
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महामना इंटर कॉलेज बच्छांव के खेल प्रशिक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया एसजीएफआई की नेशनल प्रतियोगिता काशी के स्कूली खिलाड़ियों के लिए एक आसान प्लेटफार्म था। स्कूली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने से वंचित होना पड़ रहा है।
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ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर 2017 में 10वीं पेसेफिक स्कूल गेम्स में एसजीएफआई की तरफ से हॉकी की टीम भेजी गई थी। इसी टीम की एक छात्रा की आयोजन के दौरान डूबने से मौत हो गई थी। मंत्रालय ने इसे फेडरेशन की लापरवाही मानते हुए मान्यता रद्द कर दी थी।