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Varanasi: समस्याओं से कराहता वाराणसी का पांच स्मार्ट वार्ड, सीवर ओवरफ्लो होने से 35 हजार लोग हो रहे हैं परेशान
Mon, 03 Jun 2024 09:56 AM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Mon, 03 Jun 2024 09:56 AM IST
सार
वाराणसी शहर के पांच स्मार्ट वार्डों में सीवर ओवरफ्लो होने से 35 हजार लोग परेशान हैं। दो दिन से जलकल के कर्मचारियों के लगने के बाद भी समस्या वैसी ही है। लोगों ने इसे लेकर नाराजगी भी जताई है।
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जंगबाड़ी में सड़क पर बह रहा सीवर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वाराणसी में नगर निगम सीमा के 100 वार्डों में से पांच वार्डों को स्मार्ट बनाया गया। 75.73 करोड़ रुपये खर्च कर इन वार्डों में नए सिरे से सीवर, पेयजल की पाइपलाइन भी डाली गई। पत्थर का चौका और स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं। बावजूद इसके यहां मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो पाईं। यहां सीवर ओवरफ्लो की समस्या बढ़ गई है। इसे दूर करने के लिए दो दिन से जलकल के कर्मचारी लगे हैं, लेकिन समस्या दूर नहीं हुई।
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शहर के जंगमबाड़ी, हनुमान गली, गणेश महाल, दशाश्वमेध, विश्वनाथ गली स्मार्ट वार्ड के हिस्सा हैं। इनमें सीवर की समस्या से लोग परेशान हैं। शिकायत करने के बाद केवल फौरी तौर पर राहत मिल रही है। कुछ दिन बाद फिर से समस्या खड़ी हो रही है।
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इन क्षेत्रों में रहने वालों के अनुसार जब से स्मार्ट वार्ड बनाया गया है, तब से समस्या और गंभीर हो गई है। पहले तो शिकायत करने पर समस्या का हल भी हो जाता था लेकिन अब समस्या खोजने में विभाग खुद उलझ जाता है। क्योंकि यहां की लाइनों का निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों ने कराया है। जबकि देखरेख की जिम्मेदारी जलकल को दी गई है। ऐसी स्थिति में जलकल को पहले पता करना होता है कि सीवर की लाइनों को कहां मोड़ा गया है। इसके बाद काम शुरू करते हैं।
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क्षेत्र के आलोक ने कहा कि जलकल के जेई आए थे। कई जगहों पर मैनहोल खुलवाकर साफ कराने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल पाई है। बाबू यादव ने बताया कि ज्यादातर स्मार्ट वार्डों में मंदिरों की संख्या अधिक है। यहां दर्शनार्थी आते हैं। उन्हें भी सीवर से होकर मंदिर जाना पड़ता है। यहां के सभी सीवर शाही नाले से जुड़े हैं।
जानकारों के अनुसार यहां पर पाइपों की चौड़ाई छोटी है। बदलने के दौरान इसका ध्यान नहीं रखा गया। कई जगहों पर पुरानी पाइपों को वैसे ही छोड़ दिया गया। इससे पुरानी पाइप लाइनों पर लोड बढ़ गया है। पाइप लाइनों का व्यास बढ़ाने से इस समस्या का हल हो सकता है।
जानकारों के अनुसार यहां पर पाइपों की चौड़ाई छोटी है। बदलने के दौरान इसका ध्यान नहीं रखा गया। कई जगहों पर पुरानी पाइपों को वैसे ही छोड़ दिया गया। इससे पुरानी पाइप लाइनों पर लोड बढ़ गया है। पाइप लाइनों का व्यास बढ़ाने से इस समस्या का हल हो सकता है।
शहर की सीवर व्यवस्था शाही नाले पर निर्भर
शहर की सीवर व्यवस्था सिर्फ शाही नाले पर ही निर्भर है। वो शाही नाला जिसे मुगलों ने सुरंग के रूप में विकसित किया था। बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने उसे सीवर व्यवस्था में तब्दील कर दिया। नाले की उम्र 200 साल से भी ज्यादा हो गई। जगह-जगह तोडफ़ोड़ कर लोगों ने अपनी सीवर लाइन जुड़वा ली है। नतीजा यह है कि नाला भी जीर्ण-शीर्ण हो गया। इस कारण से आए दिन सीवर ओवरफ्लो की समस्या आ रही है।
यह भी जानें
स्मार्ट वार्ड का नाम - धनराशि खर्च
दशाश्वमेध - 16.22 करोड़
जंगमबाड़ी - 12.65 करोड़
कामेश्वर महादेव - 17.09 करोड़
कालभैरव - 16.24 करोड़
राजमंदिर - 13.53 करोड़
क्या बोले अधिकारी
कुछ लोगों ने फोन के माध्यम से सीवर की समस्या बताई थी। शिकायत मिलने के बाद वहां काम शुरू कराया गया है। जल्द ही वार्डों में सीवर की समस्या दूर हो जाएगी। - ओपी सिंह, सचिव जलकल
दशाश्वमेध - 16.22 करोड़
जंगमबाड़ी - 12.65 करोड़
कामेश्वर महादेव - 17.09 करोड़
कालभैरव - 16.24 करोड़
राजमंदिर - 13.53 करोड़
क्या बोले अधिकारी
कुछ लोगों ने फोन के माध्यम से सीवर की समस्या बताई थी। शिकायत मिलने के बाद वहां काम शुरू कराया गया है। जल्द ही वार्डों में सीवर की समस्या दूर हो जाएगी। - ओपी सिंह, सचिव जलकल