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जुलाई माह से एक बूंद भी नहीं गिरेगा गंगा में सीवर

Wed, 11 Nov 2020 01:32 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2020 01:32 AM IST
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वाराणसी/ चिरईगांव। गंगा को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए नमामि गंगे की ओर से एसटीपी संचालकों और जल निगम के अधिकारियों को सुझाव दिए गए हैं। इन सुझावों का बेहतर ढंग से पालन कराया गया तो अगले वर्ष जुलाई माह से एक बूंद भी सीवर गंगा में नहीं बहेगा।
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मौजूदा समय खिड़कियां घाट और अस्सी नाले को टैप करने का काम चल रहा है। इन्हीं नालों से गंगा में सीवर अभी जा रहा है। रमना एसटीपी में अस्सी नाले का सीवर जाएगा, जबकि दीनापुर में खिड़किया घाट पर गिरने वाला सीवर जाएगा। वहीं एसटीपी दीनापुर से निकल रहे गीले स्लज से आसपास के ग्रामीण परेशान हैं। ट्रैक्टरों से गीले स्लज की ढुलाई बिना ढंके की जाती है। इससे स्लज सड़कों पर गिरता और दुर्गंध निकलती है।
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जल निगम के मुख्य अभियंता एके पुरवार ने बताया कि रमना एसटीपी 50 एमएलडी का बन रहा है। 90 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। दिसंबर तक यह काम पूरा हो जाएगा। अस्सी नाले का सीवर इसके जरिए ट्रीट किया जाएगा। दीनापुर एसटीपी चालू है। लेकिन खिड़किया घाट पर गिरने वाले सीवर को डायवर्ट किया जा रहा है। इसके बाद गंगा में एक बूंद भी सीवर नहीं गिरेगा। यह काम जून 2021 तक पूरा हो जाएगा। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगले साल जुलाई माह से एक बूंद भी सीवर गंगा में नहीं जाएगा। नमामि गंगे की ओर से जो सुझाव दिए गए, उनका पालन कराने के लिए मातहतों को निर्देश दिया गया है। जलनिगम के अधिशासी अभियंता विवेक सिंह ने कहा कि दीनापुर के पुराने एसटीपी में 80 एमएलडी सीवरेज आता है, जो ट्रीट करके पाइपलाइन से गंगा में भेजा जाता है। प्लांट मैनेजर अमिताभ श्रीवास्तव का कहना है कि 140 एमएलडी का प्लांट बना है। वर्तमान में 120 एमएलडी सीवरेज आ रहा है, जो ट्रीट करके वरुणा नदी में गिराया जाता है।
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एसटीपी से निकले कचरे को खुली गाडि़यों से भेजा जाता है, जो सड़कों पर गिर जाता है। गाडि़यों के आने-जाने से डस्ट बनकर उड़ता है, जिससे लोग दमा के मरीज हो रहे हैं। कचरा गिरने से क्षेत्र में मच्छरों और मक्खियों की भरमार हैं। एसटीपी के कारण आसपास का जलस्तर भी दूषित हो गया है। - शिवमूरत राजभर , रघुनाथपुर

एसटीपी दीनापुर की बाउंड्री बहुत कम ऊंचाई की बनी है। किनारे-किनारे पौधे भी नहीं लगाए गए हैं। इससे हमेशा दुर्गंध निकलती है। कई बार दवा छिड़काव के लिए कहा गया। अब तक आसपास कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं होता है। ग्रामीणों को दूषित वातावरण में रहना पड़ता है।
दिनेश मौर्या, सलारपुर
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