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बदलते मौसम में बढ़े सर्दी, खांसी और बुखार के मरीज
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 20 Feb 2017 11:07 PM IST
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बदलते मौसम में थोड़ी सी लापरवाही अस्पताल पहुंचा सकती है। दिन में तेज धूप, शाम में सिहरन और रात में ठंडी के चलते तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसके चलते सर्दी, खांसी, बुखार के मरीज बढ़े हैं।
अस्थमा और पेट के रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। इस समय बच्चों के खास देखरेख की जरूरत है। सर्दी के चलते निमोनिया का खतरा हो सकता है।
दीनदयाल उपाध्याय, कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल, रामनगर अस्पताल की ओपीडी में एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में 25-30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। मंडलीय अस्पताल के चेस्ट फीजिशियन डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि दिन में हल्की गर्मी और शाम को ठंड में सावधानी बरतने की जरूरत है।
मौसम में बदलाव के चलते ओपीडी में मरीजों की संख्या 100 की जगह 130 तक पहुंच जा रही है। अधिकांश मरीजों को सर्दी, खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ है। डॉ. वीके श्रीवास्तव ने बताया कि मार्च तक ठंड रहती है।
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जरा सी लापरवाही से बच्चे निमोनिया, पेट संबंधी परेशानी से ग्रसित हो सकते हैं। दीनदयाल अस्पताल के फीजिशियन डॉ. पीके सिंह ने कहा कि टाइफाइड, नाक-गले में संक्रमण का खतरा है। होली तक रात को घर से निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें। जरूरत के हिसाब से ऊनी कपड़े भी पहनें।
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अस्थमा और पेट के रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। इस समय बच्चों के खास देखरेख की जरूरत है। सर्दी के चलते निमोनिया का खतरा हो सकता है।
दीनदयाल उपाध्याय, कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल, रामनगर अस्पताल की ओपीडी में एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में 25-30 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। मंडलीय अस्पताल के चेस्ट फीजिशियन डॉ. आरके शर्मा ने बताया कि दिन में हल्की गर्मी और शाम को ठंड में सावधानी बरतने की जरूरत है।
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मौसम में बदलाव के चलते ओपीडी में मरीजों की संख्या 100 की जगह 130 तक पहुंच जा रही है। अधिकांश मरीजों को सर्दी, खांसी, बुखार, सांस की तकलीफ है। डॉ. वीके श्रीवास्तव ने बताया कि मार्च तक ठंड रहती है।
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जरा सी लापरवाही से बच्चे निमोनिया, पेट संबंधी परेशानी से ग्रसित हो सकते हैं। दीनदयाल अस्पताल के फीजिशियन डॉ. पीके सिंह ने कहा कि टाइफाइड, नाक-गले में संक्रमण का खतरा है। होली तक रात को घर से निकलते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें। जरूरत के हिसाब से ऊनी कपड़े भी पहनें।