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वाराणसी: कोविड वैक्सीन, ऑक्सीजन सिलिंडर व जीवनरक्षक दवाओं के नाम पर लिंक भेजकर उड़ा रहे बैंक खाते से रकम
Sun, 09 May 2021 09:14 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sun, 09 May 2021 09:14 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में पहले से परेशान कोरोना मरीजों और तीमारदारों को साइबर जालसाज और परेशानी में डाल दे रहे हैं। जान बचाने के लिए लोगों को जहां आक्सीजन सिलिंडर और जीवनरक्षक दवाओं की जरूरत पड़ रही है तो जालसाज आनलाइन फ्राड करके बैंक खाते से रकम उड़ा दे रहे हैं। पिछले एक माह में इस तरह की शिकायतें साइबर सेल के पास पहुंची हैं। लगभग हर थाने में सप्ताह भर में दो से चार ऐसे केस पहुंच रहे हैं। कुछ तो परेशानी में होने के कारण थानों तक नहीं पहुंच रहे हैं। व्हाट्सएप पर लिंक और मोबाइल पर ओटीपी भेजकर जालसाज यह कारनामा कर रहे हैं।
इस तरह की साइबर फ्राडगिरी से बचाव को लेकर पुलिस कमिश्रर ए सतीश गणेश लगातार जागरूक कर रहे हैं। वहीं उन्होंने साइबर सेल को भी सतर्क किया है कि इस तरह की जालसाजी करने वालों तक पहुंचें। ट्विटर और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर पुलिस कमिश्रर लोगों को आगाह व जागरूक करते रहते हैं कि अपरिचित फोन काल और कोई भी लुभावने मैसेज के लिंक के फेर में न आएं। टीकाकरण को रजिस्ट्रेशन के समय काफी एहतियात बरतें।
पुलिस कमिश्रर ए सतीश गणेश के अनुसार कोविड-19 के नाम पर मददगार बनकर आनलाइन धोखा देने वालों से सावधान रहें। सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे धोखेबाजों से बचने के लिए उचित प्रमाणीकरण और सत्यापन हमेशा आवश्यक होता है।
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इस तरह की साइबर फ्राडगिरी से बचाव को लेकर पुलिस कमिश्रर ए सतीश गणेश लगातार जागरूक कर रहे हैं। वहीं उन्होंने साइबर सेल को भी सतर्क किया है कि इस तरह की जालसाजी करने वालों तक पहुंचें। ट्विटर और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर पुलिस कमिश्रर लोगों को आगाह व जागरूक करते रहते हैं कि अपरिचित फोन काल और कोई भी लुभावने मैसेज के लिंक के फेर में न आएं। टीकाकरण को रजिस्ट्रेशन के समय काफी एहतियात बरतें।
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पुलिस कमिश्रर ए सतीश गणेश के अनुसार कोविड-19 के नाम पर मददगार बनकर आनलाइन धोखा देने वालों से सावधान रहें। सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे धोखेबाजों से बचने के लिए उचित प्रमाणीकरण और सत्यापन हमेशा आवश्यक होता है।
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कोई भी पैसे भुगतान के लिए कहे तो उससे उसका सीआईएन, टिन, जीएसटी नंबर व व्यवसायिक नाम जरूर पूछें। सरकारी पोर्टल पर जाकर जीएसटी को सत्यापित भी करें। किसी के साथ आनलाइन जालसाजी हो तो तत्काल अपने खाते से संबंधित बैंक के कस्टमर केयर नंबर और पुलिस से संपर्क करें।
केस-1
पखवारे भर पूर्व भिखारीपुर की रहने वाली सुमन श्रीवास्तव को जीवनरक्षक दवाओं की दरकार थी। परिवार में उनके पिता कोरोना से संक्रमित थे। आसपास दवा नहीं मिली तो गूगल पर एक नंबर पर उन्होंने संपर्क किया और उधर से दिए हुए मोबाइल नंबर से एक लिंक आया। लिंक पर क्लिक करते ही सुमन के बैंक खाते से 23 हजार रुपये निकल गए। परेशान सुमन अब तक बैंक का चक्कर काट रही हैं।
केस-2
अजगरा के रहने वाले सुरेश सोनकर ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में आए मैसेज आक्सीजन सिलिंडर चाहिए तो इस लिंक पर क्लिक करें देखा। उन्हें ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत थी। उन्होंने सिलिंडर लेने के लिए क्लिक किया और खाते से सात हजार रुपये कट गए। परिवार वालों के डर के कारण कहीं शिकायत करने भी नहीं गए। ऐसे कई लोगों के खातों से रकम कट चुकी है।
केस-1
पखवारे भर पूर्व भिखारीपुर की रहने वाली सुमन श्रीवास्तव को जीवनरक्षक दवाओं की दरकार थी। परिवार में उनके पिता कोरोना से संक्रमित थे। आसपास दवा नहीं मिली तो गूगल पर एक नंबर पर उन्होंने संपर्क किया और उधर से दिए हुए मोबाइल नंबर से एक लिंक आया। लिंक पर क्लिक करते ही सुमन के बैंक खाते से 23 हजार रुपये निकल गए। परेशान सुमन अब तक बैंक का चक्कर काट रही हैं।
केस-2
अजगरा के रहने वाले सुरेश सोनकर ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में आए मैसेज आक्सीजन सिलिंडर चाहिए तो इस लिंक पर क्लिक करें देखा। उन्हें ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत थी। उन्होंने सिलिंडर लेने के लिए क्लिक किया और खाते से सात हजार रुपये कट गए। परिवार वालों के डर के कारण कहीं शिकायत करने भी नहीं गए। ऐसे कई लोगों के खातों से रकम कट चुकी है।