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Varanasi News: बॉन्ड के जरिये छह कंपनियों से फंड जुटा कर सेबी ने नगर निगम को दिए 50 करोड़ रुपये
Tue, 31 Mar 2026 02:26 AM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 02:26 AM IST
सार
Varanasi News: पुराने बॉन्ड के क्रेडिट चुकाने के बाद नई धनराशि मिलेगी। इसके लिए निगम ने काम समय पर पूरा करने पर जोर दिया है, ताकि आगामी वर्षों में 50 करोड़ रुपये चुकाकर अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये जुटाए जा सकें।
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वाराणसी नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सेबी ने छह कंपनियों के जरिये फंड जुटाकर नगर निगम को 50 करोड़ रुपये म्युनिसिपल बॉन्ड के माध्यम से उपलब्ध कराए हैं। इस राशि से नगर निगम दो विकास कार्य करा रहा है। सेबी के नियमानुसार इस धनराशि पर 8.01 प्रतिशत का ब्याज लागू है। नगर निगम ने इसे 8 वर्षों में वापस करने का वायदा किया है।
जानकारों के अनुसार, पुराने बॉन्ड के क्रेडिट चुकाने के बाद नई धनराशि मिलेगी। इसके लिए निगम ने काम समय पर पूरा करने पर जोर दिया है, ताकि आगामी वर्षों में 50 करोड़ रुपये चुकाकर अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये जुटाए जा सकें।
सिगरा स्टेडियम और लहुराबीर में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए यह म्युनिसिपल बॉन्ड जारी किया गया है। इससे न केवल शहरवासियों को लाभ होगा, बल्कि आने वाले सैलानियों के लिए भी सुविधाएं बेहतर होंगी। बॉन्ड निवेश में समय सीमा निर्धारित होती है, कुछ 5 वर्ष, कुछ 8, 10 या 15 वर्ष की। इस दौरान ब्याज भी मिलता है।
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आम जनता आम तौर पर सरकारी बॉन्ड में निवेश को अधिक भरोसेमंद मानती है। हालांकि इस मामले में सेबी ने सीधे जनता के बजाय छह बड़ी कंपनियों के जरिए फंड मुहैया कराया है। दरअसल, म्युनिसिपल बॉन्ड एक तरह का साख पत्र है, जिसके जरिए आम जनता या संस्थाओं से पैसा जुटाया जा सकता है। यह व्यवस्था पहले प्राइवेट कंपनियों द्वारा फंड जुटाने के लिए होती थी, लेकिन अब इसे शहरी स्थानीय निकायों द्वारा जारी किया जा रहा है।
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जानकारों के अनुसार, पुराने बॉन्ड के क्रेडिट चुकाने के बाद नई धनराशि मिलेगी। इसके लिए निगम ने काम समय पर पूरा करने पर जोर दिया है, ताकि आगामी वर्षों में 50 करोड़ रुपये चुकाकर अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये जुटाए जा सकें।
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सिगरा स्टेडियम और लहुराबीर में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए यह म्युनिसिपल बॉन्ड जारी किया गया है। इससे न केवल शहरवासियों को लाभ होगा, बल्कि आने वाले सैलानियों के लिए भी सुविधाएं बेहतर होंगी। बॉन्ड निवेश में समय सीमा निर्धारित होती है, कुछ 5 वर्ष, कुछ 8, 10 या 15 वर्ष की। इस दौरान ब्याज भी मिलता है।
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आम जनता आम तौर पर सरकारी बॉन्ड में निवेश को अधिक भरोसेमंद मानती है। हालांकि इस मामले में सेबी ने सीधे जनता के बजाय छह बड़ी कंपनियों के जरिए फंड मुहैया कराया है। दरअसल, म्युनिसिपल बॉन्ड एक तरह का साख पत्र है, जिसके जरिए आम जनता या संस्थाओं से पैसा जुटाया जा सकता है। यह व्यवस्था पहले प्राइवेट कंपनियों द्वारा फंड जुटाने के लिए होती थी, लेकिन अब इसे शहरी स्थानीय निकायों द्वारा जारी किया जा रहा है।