{"_id":"59b10d644f1c1bb0488b4871","slug":"sdm-vasant-kumar-suspended-for-corruption","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बनारस में रहते हुए जमीन का फर्जीवाड़ा करने वाला SDM सस्पेंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बनारस में रहते हुए जमीन का फर्जीवाड़ा करने वाला SDM सस्पेंड
ब्यूरो,अमर उजाला,लखनऊ/वाराणसी
Updated Thu, 07 Sep 2017 02:42 PM IST
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वाराणसी में वरुणा नदी का गला घोंटने वाले होटल कारोबारी के मददगार तत्कालीन एसडीएम को सस्पेंड कर दिया गया है। 'अमर उजाला' ने इस 'खेल' को उजागर किया था।
भीमनगर में वरुणा किनारे फर्जी तरीके से नगर निगम की बंजर जमीन को होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल के पक्ष में विनिमय का आदेश करने वाला तत्कालीन एएसडीएम सदर बसंत कुमार गुप्ता को शासन ने निलंबित कर दिया है। उनकी तैनाती फिलहाल फर्रुखाबाद में एसडीएम के रूप में थी।
सेंट्रल जेल रोड स्थित सिकरौल निवासी अजय मौर्या ने कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण से शिकायत की थी कि वरुणा गार्डेन के सामने वरुणा नदी के किनारे आराजी नंबर 973/3 पर नगर निगम के सहयोग से कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है।
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जांच में पाया गया कि जमीन के कुछ भाग पर आसरा योजना के तहत भवन निर्माण चल रहा और एक हिस्से पर होमगार्ड कमांडेंट का कार्यालय बनना है। कागजात में ये पूरी जमीन रकबा 0.302 हेक्टेयर भूमि (करीब डेढ़ बीघा) पर हीरालाल का कब्जा है।
बसंत कुमार गुप्ता ने मानकों को अनदेखी कर हीरालाल के पक्ष विनिमय का आदेश दिया था। अमर उजाला ने इस मामले को उजागर किया था। डीएम ने मामले का संज्ञान लेते हुए विनिमय का आदेश निरस्त कर बंजर भूमि को फिर निगम के कब्जे में दे दी।
बसंत कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
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भीमनगर में वरुणा किनारे फर्जी तरीके से नगर निगम की बंजर जमीन को होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल के पक्ष में विनिमय का आदेश करने वाला तत्कालीन एएसडीएम सदर बसंत कुमार गुप्ता को शासन ने निलंबित कर दिया है। उनकी तैनाती फिलहाल फर्रुखाबाद में एसडीएम के रूप में थी।
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सेंट्रल जेल रोड स्थित सिकरौल निवासी अजय मौर्या ने कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण से शिकायत की थी कि वरुणा गार्डेन के सामने वरुणा नदी के किनारे आराजी नंबर 973/3 पर नगर निगम के सहयोग से कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है।
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जांच में पाया गया कि जमीन के कुछ भाग पर आसरा योजना के तहत भवन निर्माण चल रहा और एक हिस्से पर होमगार्ड कमांडेंट का कार्यालय बनना है। कागजात में ये पूरी जमीन रकबा 0.302 हेक्टेयर भूमि (करीब डेढ़ बीघा) पर हीरालाल का कब्जा है।
बसंत कुमार गुप्ता ने मानकों को अनदेखी कर हीरालाल के पक्ष विनिमय का आदेश दिया था। अमर उजाला ने इस मामले को उजागर किया था। डीएम ने मामले का संज्ञान लेते हुए विनिमय का आदेश निरस्त कर बंजर भूमि को फिर निगम के कब्जे में दे दी।
बसंत कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
अब कुछ और पर कार्रवाई का इंतजार
वरुणा के डूब क्षेत्र में कब्जा
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी नगर निगम की जमीन का फर्जीवाड़ा करने में अहम भूमिका निभाने वाले अधिकारी बसंत कुमार गुप्ता को शासन ने निलंबित कर इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत की है। इस बहुचर्चित मामले में बसंत अकेले नहीं थे।
प्रशासन, नगर निगम और खनन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ही इस काम को अंजाम दिया गया था। अब इनमें से कई पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। माना जा रहा है कि कार्रवाई में अगला नंबर इन्हीं का होगा। लोगों को इसका इंतजार है।
नगर निगम की बंजर जमीन पर होटल कारोबारी ने कब्जा कर लिया और उसे पता तक नहीं था। निगम की ये बड़ी लापरवाही ही नहीं थी, इसमें भ्रष्टाचार भी खूब हुआ था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. रजनीश दुबे की ओर से हाल में सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सख्त निर्देश के बाद निगम ने अपनी जान बचाने के लिए 90 लोगों को नोटिस जारी किया है।
इस बारे में बनाई गई रिपोर्ट से जाहिर है कि इसमें 1990 के पूर्व से भी कई लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। मकान और दुकान बना रखे हैं। निगम के अधिकारियों ने कई दशक बाद इन सभी को तत्काल कब्जा हटाने को कहा है लेकिन एक सप्ताह बाद अब तक बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
प्रशासन, नगर निगम और खनन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ही इस काम को अंजाम दिया गया था। अब इनमें से कई पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। माना जा रहा है कि कार्रवाई में अगला नंबर इन्हीं का होगा। लोगों को इसका इंतजार है।
नगर निगम की बंजर जमीन पर होटल कारोबारी ने कब्जा कर लिया और उसे पता तक नहीं था। निगम की ये बड़ी लापरवाही ही नहीं थी, इसमें भ्रष्टाचार भी खूब हुआ था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. रजनीश दुबे की ओर से हाल में सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सख्त निर्देश के बाद निगम ने अपनी जान बचाने के लिए 90 लोगों को नोटिस जारी किया है।
इस बारे में बनाई गई रिपोर्ट से जाहिर है कि इसमें 1990 के पूर्व से भी कई लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। मकान और दुकान बना रखे हैं। निगम के अधिकारियों ने कई दशक बाद इन सभी को तत्काल कब्जा हटाने को कहा है लेकिन एक सप्ताह बाद अब तक बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
खनन विभाग ने भी खूब मलाई काटी
मिट्टी से पाटा गया वरुणा नदी का जलभराव क्षेत्र
- फोटो : अमर उजाला
होटल कारोबारी हीरालाल को फर्जीवाड़ी कर जमीन देने के मामले में खनन विभाग ने भी खूब मलाई काटी। निगम की जमीन पर कब्जे के बाद रोजाना पचास से ज्यादा ट्रैक्टर मिट्टी पाटने के काम में लगाए गए थे।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि वरुणा किनारे करीब दो बीघे जमीन पर हजारों ट्रैक्टर मिट्टी पाटी गई थी। पहले यहां पानी भरा रहता था। सबसे पहले वरुणा किनारे बाउंड्री बनाई गई। इसके बाद मिट्टी पाटने का काम शुरू हुआ।
करीब दो साल तक मिट्टी पाटने का काम चलता रहा लेकिन खनन विभाग ने पूछताछ ही नहीं की। मिट्टी कहां से आती है और कहां जाती है ये पूछने वाला कोई नहीं था।
उच्चाधिकारियों के दबाव पर खनन विभाग ने हीरालाल पर मिट्टी पाटने और हरे पेड़ काटने के आरोप में 36 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि विभाग अब तक जुर्माना वसूल नहीं सका है।
पूरा मामला दांव-पेंच में उलझा हुआ है। कहा जा रहा है कि खनन विभाग अब भी प्रभाव में है। यही नहीं, प्रशासनिक अधिकारी भी पूरे मामले को ठंडा करने में जुटे हुए हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि वरुणा किनारे करीब दो बीघे जमीन पर हजारों ट्रैक्टर मिट्टी पाटी गई थी। पहले यहां पानी भरा रहता था। सबसे पहले वरुणा किनारे बाउंड्री बनाई गई। इसके बाद मिट्टी पाटने का काम शुरू हुआ।
करीब दो साल तक मिट्टी पाटने का काम चलता रहा लेकिन खनन विभाग ने पूछताछ ही नहीं की। मिट्टी कहां से आती है और कहां जाती है ये पूछने वाला कोई नहीं था।
उच्चाधिकारियों के दबाव पर खनन विभाग ने हीरालाल पर मिट्टी पाटने और हरे पेड़ काटने के आरोप में 36 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि विभाग अब तक जुर्माना वसूल नहीं सका है।
पूरा मामला दांव-पेंच में उलझा हुआ है। कहा जा रहा है कि खनन विभाग अब भी प्रभाव में है। यही नहीं, प्रशासनिक अधिकारी भी पूरे मामले को ठंडा करने में जुटे हुए हैं।