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सिमटने लगा बाग-बगीचे का दायरा: चिरईगांव में आम, अमरूद और फालसा का उत्पादन भी हुआ कम; किसान परेशान

Sun, 16 Mar 2025 07:29 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 16 Mar 2025 07:29 AM IST
सार

वाराणसी का चिरईगांव एक जमाने में खेती-बारी का हब हुआ करता था। यहां किसान अपनी मेहनत से सब्जियों और फलों की खेती किया करते थे लेकिन अब वे परेशान हैं। यहां खेती का रकबा करीब 70 फीसदी कम हो गया है।

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scope of orchards started shrinking in varanasi Production of mango guava phalsa also decreased
चिरईगांव में 70 फीसदी कम हुआ खेती का रकबा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमरूद, आम और फालसा उत्पादन में पहचान बनाने वाला क्षेत्र में बाग-बगीचे का दायरा अब सिमटने लगा है। 15 साल में 70 फीसदी रकबा घटा है। शहरीकरण के कारण जमीन की कमी और लागत ज्यादा लगने से किसान बागवानी कम जमीन में कर रहे हैं। 

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चिरईगांव ब्लॉक के किसान आंवला, बेल, मिर्च और कटहल से अचार, मुरब्बा और जैम बनाकर देश के कोने-कोने में बेचते हैं।  बीते कुछ वर्षों में अमरूद के पेड़ों में उकठा रोग और फालसा की खेती के लिए मजदूरों की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। 
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चिरईगांव के पूर्व प्रधान धनंजय मौर्य बताते हैं कि क्षेत्र में बीते 15 साल में अमरूद की खेती केवल 30 प्रतिशत ही बची है। साल 1962 में चिरईगांव में 709 एकड़ में बाग थे। शहरीकरण के चलते इनका रकबा घटकर आधे से भी कम रह गया है। चिरईगांव में नींबू, सीताफल, गुलाब, पपीता, केला, कटहल, आंवला, बेल, शरीफा, करौंदा, बेर, शहतूत, इमली, जामुन, नाशपाती, लीची, महुआ और अंगूर का उत्पादन खूब होता था। 

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खेती में मजदूरों की कमी
बरियासनपुर गांव के पूर्व प्रधान बालकिशुन पटेल ने बताया कि चिरईगांव ब्लॉक के सीवो, गौराकला, नवशहरी और रुस्तमपुर गांवों में बड़े पैमाने पर फालसा की खेती होती थी। लेकिन, अब यह खेती केवल 20 प्रतिशत ही बची है

रिंग रोड का प्रभाव
विकास खंड की लगभग 15 ग्राम पंचायतें नगर निगम में शामिल हो गईं। संदहा से बभनपुरा रिंग रोड गंगा पार चंदौली को जोड़ती है, इससे जमीनों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। काॅलोनाइजर किसानों जमीन खरीदकर प्लाॅटिंग कर रहे हैं। 

बोले अधिकारी
अमरूद की नई प्रजातियों में उकठा रोग का प्रभाव कम होता है। इलाहाबादी सफेदा, संगम मुख्य प्रजातियां हैं। आम, फालसा फसलों के लिए किसानों को जागरूक कर रहे है। - सुभाष कुमार, जिला उद्यान अधिकारी

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