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भदोही में वैन हादसाः कोचिंग की आड़ में चल रहा था स्कूल
Sat, 12 Jan 2019 06:53 PM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,भदोही
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Published by: shashikant misra
Updated Sat, 12 Jan 2019 06:53 PM IST
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एससी क्लासेज
- फोटो : amar ujala
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भदोही जिले के नथईपुर रोड पर मिल्की गांव के समीप स्थित एससी क्लासेस नाम से नवोदय विद्यालय में प्रवेश की तैयारी कराने के लिए कोचिंग कक्षाएं चलाई जाती थी। उसी की आड़ में संचालक पांचवीं तक स्कूल भी चलवाता था।
स्कूल की न तो मान्यता थी न ही अन्य कोई मानक पूरे हो रहे थे। किराए के कमरे में एससी क्लासेज के नाम से बैनर लगाकर पीछे टीन शेड में स्कूल चलाया जाता है। स्कूल का कोई बोर्ड नहीं है, जबकि बच्चों को एससी कान्वेंट स्कूल के नाम का आईकार्ड जारी किया गया है।
जिले में 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा करीब 500 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित होते हैं। शिक्षा विभाग की सूची में बिना मान्यता के स्कूलों की संख्या 89 है। हालांकि हकीकत में यह संख्या 250 के करीब है। शनिवार सुबह जिस स्कूल वैन में आग लगने की घटना हुई, वह स्कूल भी गुप्त तरीके से चलाया जा रहा था। शिक्षा विभाग भी इससे अनजान था।
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घटना के बाद जब पड़ताल शुरू हुई तो यह तथ्य सामने आए। नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के नाम पर संचालक गुपचुप तरीके से विद्यालय चलवाता था। यहां तक कि स्कूल का कोई बोर्ड भी नहीं लगा है, लेकिन बच्चों को जो आईकार्ड जारी किया गया है, उस पर एससी कॉन्वेंट स्कूल लिखा है।
जुलाई में विद्यालय खुलने के बाद शासन के निर्देश पर डीएम ने अवैध स्कूलों को बंद कराने के लिए टीमें गठित की, लेकिन तीन से चार माह बाद भी टीमें एक भी विद्यालय पर नहीं पहुंचीं। अभोली, सुरियावां, चौरी, औराई, डीघ इलाकों में भी कोचिंग की आड़ में अवैध स्कूलों का संचालन हो रहा है।
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स्कूल की न तो मान्यता थी न ही अन्य कोई मानक पूरे हो रहे थे। किराए के कमरे में एससी क्लासेज के नाम से बैनर लगाकर पीछे टीन शेड में स्कूल चलाया जाता है। स्कूल का कोई बोर्ड नहीं है, जबकि बच्चों को एससी कान्वेंट स्कूल के नाम का आईकार्ड जारी किया गया है।
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जिले में 1143 प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के अलावा करीब 500 मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित होते हैं। शिक्षा विभाग की सूची में बिना मान्यता के स्कूलों की संख्या 89 है। हालांकि हकीकत में यह संख्या 250 के करीब है। शनिवार सुबह जिस स्कूल वैन में आग लगने की घटना हुई, वह स्कूल भी गुप्त तरीके से चलाया जा रहा था। शिक्षा विभाग भी इससे अनजान था।
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घटना के बाद जब पड़ताल शुरू हुई तो यह तथ्य सामने आए। नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के नाम पर संचालक गुपचुप तरीके से विद्यालय चलवाता था। यहां तक कि स्कूल का कोई बोर्ड भी नहीं लगा है, लेकिन बच्चों को जो आईकार्ड जारी किया गया है, उस पर एससी कॉन्वेंट स्कूल लिखा है।
जुलाई में विद्यालय खुलने के बाद शासन के निर्देश पर डीएम ने अवैध स्कूलों को बंद कराने के लिए टीमें गठित की, लेकिन तीन से चार माह बाद भी टीमें एक भी विद्यालय पर नहीं पहुंचीं। अभोली, सुरियावां, चौरी, औराई, डीघ इलाकों में भी कोचिंग की आड़ में अवैध स्कूलों का संचालन हो रहा है।
हादसों के बाद खुलती है नींद
आग लगने के बाद स्कूली वैन की हालत
- फोटो : amar ujala
अवैध स्कूल, नियम विरुद्ध बच्चों को लाना-ले जाना और सीएनजी के बजाए घरेलू सिलिंडर का प्रयोग के मामले में बेसिक शिक्षा, एआरटीओ और डीएसओ विभाग उदासीन बना हुआ है। लखनो की घटना के लिए यह सवाल कौंधने लगा है कि बिना मान्यता के इस तरह से स्कूल कैसे संचालित हो रहा था, वाहन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और घरेलू गैस सिलिंडर से वाहन कैसे चल रहा था।
मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने इन विभागों के खिलाफ गुस्से का इजहार किया। सूबे में सरकार किसी की रहे, लेकिन अफसर अपने तरीके से ही काम करते हैं। सपा सरकार में चाहे कैयरमऊ की घटना को ले लिया जाए, चाहे अब भाजपा सरकार में लखनों की घटना को। हादसों के बाद ही अफसरों की नींद खुलती है। कुछ दिन बाद जैसे-जैसे मामला पुराना होता जाता है, अफसर भी शांत हो जाते हैं।
नथईपुर रोड के किनारे गुप्त रूप से एससी कान्वेंट स्कूल चलने का दावा शिक्षा विभाग भले कर रहा है, लेकिन कई साल से चल रहे इस गोरखधंधे की भनक विभाग को कैसे नहीं लगी, इसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। इसी तरह परिवहन विभाग की ओर से निरीक्षण का दावा किया जाता है बावजूद इसके जिला मुख्यालय पर ही प्राइवेट वाहनों से बच्चों को नियम विरुद्ध बेधड़क ढोया जा रहा है।
ट्रैफिक इंस्पेक्टर, एआरटीओ और विभाग के अन्य अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीएनजी गैस से वाहनों को चलाना चाहिए, लेकिन घरेलू गैस से उसे चलाया जाता है। पूर्ति विभाग की ओर से इसको लेकर कभी भी जांच तक नहीं की गई। लखनों में घटना के बाद नाराज लोगों ने संबंधित विभागों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने इन विभागों के खिलाफ गुस्से का इजहार किया। सूबे में सरकार किसी की रहे, लेकिन अफसर अपने तरीके से ही काम करते हैं। सपा सरकार में चाहे कैयरमऊ की घटना को ले लिया जाए, चाहे अब भाजपा सरकार में लखनों की घटना को। हादसों के बाद ही अफसरों की नींद खुलती है। कुछ दिन बाद जैसे-जैसे मामला पुराना होता जाता है, अफसर भी शांत हो जाते हैं।
नथईपुर रोड के किनारे गुप्त रूप से एससी कान्वेंट स्कूल चलने का दावा शिक्षा विभाग भले कर रहा है, लेकिन कई साल से चल रहे इस गोरखधंधे की भनक विभाग को कैसे नहीं लगी, इसे लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। इसी तरह परिवहन विभाग की ओर से निरीक्षण का दावा किया जाता है बावजूद इसके जिला मुख्यालय पर ही प्राइवेट वाहनों से बच्चों को नियम विरुद्ध बेधड़क ढोया जा रहा है।
ट्रैफिक इंस्पेक्टर, एआरटीओ और विभाग के अन्य अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीएनजी गैस से वाहनों को चलाना चाहिए, लेकिन घरेलू गैस से उसे चलाया जाता है। पूर्ति विभाग की ओर से इसको लेकर कभी भी जांच तक नहीं की गई। लखनों में घटना के बाद नाराज लोगों ने संबंधित विभागों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
स्कूल वैन की घटना पर नेताओं ने जताया दुख
झुलसे बच्चों का हाल लेते विधायक और कुलपति
- फोटो : amar ujala
स्कूली वैन में बच्चों के झुलसने की घटना को लेकर राजनीतिक दलों ने भी संवेदना जताई। प्रबंधक और चालक पर कारवाई करते हुए गिरफ्तारी की मांग की गई। ज्ञानपुर जिला अस्पताल में पहुंचे ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र ने बच्चों का हाल जाना। उन्होंने बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए कहा।
भदोही विधायक रवींद्र त्रिपाठी राष्ट्रीय समिति की बैठक छोड़कर दिल्ली से वाराणसी आए और बीएचयू में झुलसे बच्चों का कुशलक्षेम पूछी। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा ने घटना को लेकर अफसोस जताया। प्रशासन से प्रबंधक, चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सपा जिला महासचिव ओम प्रकाश यादव और सपा नेता अजीत सिंह क्षत्रिय ने लापरवाह विभागों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं दूसरी ओर दिल्ली के राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने गए सांसद वीरेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों संग बीएचयू में बात कर बच्चों को बेहतर सुविधा देने का निर्देश दिया।
भदोही विधायक रवींद्र त्रिपाठी राष्ट्रीय समिति की बैठक छोड़कर दिल्ली से वाराणसी आए और बीएचयू में झुलसे बच्चों का कुशलक्षेम पूछी। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डॉ. नीलम मिश्रा ने घटना को लेकर अफसोस जताया। प्रशासन से प्रबंधक, चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सपा जिला महासचिव ओम प्रकाश यादव और सपा नेता अजीत सिंह क्षत्रिय ने लापरवाह विभागों पर कार्रवाई की मांग की। वहीं दूसरी ओर दिल्ली के राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने गए सांसद वीरेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों संग बीएचयू में बात कर बच्चों को बेहतर सुविधा देने का निर्देश दिया।