फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Sawan passed in the absurdity of monsoon, not a pleasant sign even in August

Weather Update: यूं ही गुजर गया सावन, नहीं बना मनभावन, भादो में होगी बारिश? जानें मौसम विज्ञानी ने क्या कहा

Sun, 14 Aug 2022 09:45 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sun, 14 Aug 2022 09:45 AM IST
सार

सावन का महीना आया और चला भी गया। लोगों रिमझिम फुहारों में भींगना और काली घटाओं के बरसने का इंतजार अब भी पहले जैसा है। कसक सिर्फ इतनी है कि सावन बीत गया, अब भादो से उम्मीद है। 
 

विज्ञापन
Sawan passed in the absurdity of monsoon, not a pleasant sign even in August
बारिश की कमी के कारण धान की खेत में दरार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मानसून के दस्तक देने के बाद हर किसी को अच्छी बारिश की उम्मीद होती है, लेकिन इस बार लोगों को निराशा हाथ लगी। मानसून की बेरुखी में सावन बीत गया और अगस्त में भी सुखद संकेत नहीं है। इसका सबसे अधिक असर खेती पड़ा है। पर्याप्त पानी न मिलने से किसान चिंतित हैं।

विज्ञापन


सावन में झमाझम बारिश होने से जहां लोगों को उमस से राहत मिलती थी, वहीं किसानों के चेहरे भी खिल उठते थे। लेकिन इस बार निराशा हाथ लगी। समय से यानी 20 जून से पहले ही मानसून की दस्तक के बाद भी बारिश का औसत कम ही रहा। जुलाई में औसत 299 मिलीमीटर के सापेक्ष केवल 130 से 140 मिलीमीटर बारिश हुई।

विज्ञापन

बारिश की संभावना बहुत कम

अब अगस्त महीने के 15 दिन बीतने के बाद भी औसत 264 मिलीमीटर बारिश की तुलना में केवल 50 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। ऐसे में किसान परेशान हैं हीं गर्मी भी अब तक खत्म नहीं हुई है।मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय ने कहा कि इस साल मौसम में जिस तरह का बदलाव हुआ है और बारिश औसत से कम हुई है, यह चिंताजनक है। अगस्त में भी जिस तरह का मौसम बन रहा है, बारिश की संभावना बहुत कम ही दिख रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

30 से 35 प्रतिशत तक धान के उत्पादन पर असर पड़ने के आसार

सावन भर बारिश न होने से धान की फसल काफी प्रभावित हुई। किसान धान की फसल का रकबा घटा कर फूल और सब्जी की खेती की तैयारी कर रहे हैं। जिन किसानों ने धान की खेती की है, उन्हें भी फायदे के आसार नहीं है। इधर कृषि वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बारिश न होने से 30 से 35 प्रतिशत तक धान के उत्पादन पर असर पडे़गा।

किसान रविंद्र पटेल के अनुसार नलकूप और निजी साधनों के सहयोग से किसानों ने धान की रोपाई तो कर ली लेकिन अब बारिश के पानी के बगैर फसलों का विकास रुक गया है। दुर्गानारायण का कहना है कि शुरुआती बारिश में धान की रोपाई तो कर ली लेकिन अब सिंचाई के लिए किसी भी माध्यम से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा।

बारिश न होने धान की फसल पर 30 प्रतिशत तक असर पडे़गा। अगस्त में बारिश के पानी से धान के कल्लों का विकास होता है जिसमें बालियां अधिक लगती हैं, लेकिन बारिश न होने कल्लों की संख्या कम होने से उत्पादन भी कम होगा। - डॉ. नरेंद्र रघुवंशी, कृषि वैज्ञानिक, केविके

वाराणसी जिले में पिछले साल 47967 हेक्टेयर क्षेत्रफल के मुकाबले इस बार 47405 हेक्टेयर में धान का उत्पादन का लक्ष्य है जो पिछले साल के मुकाबले 562 हेक्टेयर कम है। बारिश न होने से उत्पादन पर असर पड़ेगा। - संगम सिंह मौर्य, जिला कृषि अधिकारी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed