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सत्ता का संग्राम: देश की सबसे खास लोकसभा सीट के युवाओं ने रखी अपनी राय, काशी के वोटरों से हुई चुनाव पर चर्चा
Mon, 15 Apr 2024 06:07 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Mon, 15 Apr 2024 06:07 PM IST
सार
अमर उजाला का चुनावी रथ काशी पहुंचा। यहां युवाओं से उनके चुनावी मुद्दों व शहर में विकास को लेकर बातचीत की गई। छात्राओं ने सत्ता के संग्राम में खुलकर अपनी राय रखी।
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चुनावी रथ में छात्राओं से बातचीत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' सोमवार को देश के प्रमुख लोकसभा सीट वाराणसी में पहुंचा। यहां युवा वोटरों से उनके इस बार लोकसभा चुनाव में मुद्दों को जानने की कोशिश की गई। उनसे जानने की कोशिश की गई कि शहर में कितना विकास हुआ है। दावे और वादों को लेकर भी चर्चा की गई।
वसंत महिला महाविद्यालय में चुनावी रथ पहुंचा। यहां कुछ छात्राओं ने विकास को लेकर कहा कि काशी में बहुत विकास हुआ है, लेकिन कहीं न कहीं महंगाई को लेकर हमें बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टूडेंट होने के नाते कई बार महंगाई के चलते बैकआउट हो रही है। कुछ ने कहा कि चुनाव का दौर चल रहा है ऐसे में महिलाओं की भागीदारी कहीं नहीं दिख रही। महिलाओं की भागीदारी हर जगह होनी चाहिए।
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अनन्या केशरी कहती हैं कि वाराणसी लोकसभा सीट से जो प्रत्याशी खड़ा हो, उसे अब महंगाई के मुद्दे पर बात करनी चाहिए। महंगाई कैसे कम हो इस पर विचार-विमर्श करना चाहिए।
सत्ता में महिला प्रतिनिधित्व पर वह कहती हैं कि आरक्षण की बात तो हो रही है, लेकिन मैं सिर्फ चुनावी रैलियों और सभाओं की बात करें तो वहीं पर ही महिलाओं की कुछ खास उपस्थिति नहीं दिखती।
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वसंत महिला महाविद्यालय में चुनावी रथ पहुंचा। यहां कुछ छात्राओं ने विकास को लेकर कहा कि काशी में बहुत विकास हुआ है, लेकिन कहीं न कहीं महंगाई को लेकर हमें बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टूडेंट होने के नाते कई बार महंगाई के चलते बैकआउट हो रही है। कुछ ने कहा कि चुनाव का दौर चल रहा है ऐसे में महिलाओं की भागीदारी कहीं नहीं दिख रही। महिलाओं की भागीदारी हर जगह होनी चाहिए।
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अनन्या केशरी कहती हैं कि वाराणसी लोकसभा सीट से जो प्रत्याशी खड़ा हो, उसे अब महंगाई के मुद्दे पर बात करनी चाहिए। महंगाई कैसे कम हो इस पर विचार-विमर्श करना चाहिए।
सत्ता में महिला प्रतिनिधित्व पर वह कहती हैं कि आरक्षण की बात तो हो रही है, लेकिन मैं सिर्फ चुनावी रैलियों और सभाओं की बात करें तो वहीं पर ही महिलाओं की कुछ खास उपस्थिति नहीं दिखती।
महिला आरक्षण बिल पर अनन्या कहती हैं कि इसे लागू होने में काफी समय लग सकता है। साथ ही इसे मजबूत तरीके से लागू करने के लिए अभी से ही इस पर काम करना होगा। चुनावी दौर चल रहा है, इसमें भी महिलाओं को आगे करना चाहिए।
गांव की शिक्षा पर अनन्या ने कहा कि इस क्षेत्र में काफी ध्यान देने की आवश्यकता है। अंत में अनन्या ने दो टूक में अपनी बात कही कि विकास के अलावा भी कई बुनियादी मुद्दे हैं, जिस पर अभी ठोस तरीके से काम होना बाकी है। इसी क्रम में आर्या अनुपम कहती हैं कि देश में बेरोजगारी और महिला सुरक्षा का मुद्दा काफी गंभीर है। एक रिसर्च को लेकर उन्होंने कहा कि भारत में 83 प्रतिशत आबादी बेरोजगारी की शिकार है।
उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण बिल पास करके सशक्तीकरण की बात करना काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन इस पर काम भी करना होगा। वह कहती हैं कि एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के अनुसार भारत में 70 प्रतिशत महिला घरेलू हिंसा का शिकार है। वहीं, 60 प्रतिशत महिलाएं जालसाजी का शिकार हैं। इस प्रतिशत को कम करने पर सरकार का ध्यान होना चाहिए। एक सवाल के जवाब में आर्या कहती हैं कि सरकार महिला सशक्तीकरण पर काम कर रही है, इसी कारण हमें उम्मीद जगी है।
गांव की शिक्षा पर अनन्या ने कहा कि इस क्षेत्र में काफी ध्यान देने की आवश्यकता है। अंत में अनन्या ने दो टूक में अपनी बात कही कि विकास के अलावा भी कई बुनियादी मुद्दे हैं, जिस पर अभी ठोस तरीके से काम होना बाकी है। इसी क्रम में आर्या अनुपम कहती हैं कि देश में बेरोजगारी और महिला सुरक्षा का मुद्दा काफी गंभीर है। एक रिसर्च को लेकर उन्होंने कहा कि भारत में 83 प्रतिशत आबादी बेरोजगारी की शिकार है।
उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण बिल पास करके सशक्तीकरण की बात करना काबिल-ए-तारीफ है, लेकिन इस पर काम भी करना होगा। वह कहती हैं कि एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो) के अनुसार भारत में 70 प्रतिशत महिला घरेलू हिंसा का शिकार है। वहीं, 60 प्रतिशत महिलाएं जालसाजी का शिकार हैं। इस प्रतिशत को कम करने पर सरकार का ध्यान होना चाहिए। एक सवाल के जवाब में आर्या कहती हैं कि सरकार महिला सशक्तीकरण पर काम कर रही है, इसी कारण हमें उम्मीद जगी है।
सूर्यांशी सिंह कहती हैं कि यूथ को अगर इंप्लायमेंट चाहिए तो उसके लिए एजुकेशन को मजबूत करना होगा। बदलाव के हिसाब से यूथ अब हायर एजुकेशन की तरफ फोकस कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीन के बाद भारत के यूथ सबसे ज्यादा रिसर्च पेपर बनाते हैं, लेकिन वह पब्लिश नहीं हो पाते। वह बताती हैं कि अगर युवाओं को हायर एजुकेशन मिलता है तो इसका असर सरकारी विभागों पर भी पड़ेगा। उस हिसाब से कई चीजें बदलेंगी।
एक सवाल के जवाब में वह कहती हैं कि बनारस एजुकेशन का हब है क्योंकि यहां बीएचयू जैसी संस्था है, लेकिन इसके अलावा यहां और कोई बड़ा विश्वविद्यालय नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के घोषणा-पत्र में तीन विश्वविद्यालयों की बात की गई है। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय तो आए दिन बन रहे हैं लेकिन उन्हें मजबूती नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ विश्वविद्यालयों ऐसे होने चाहिए कि इसमें भी लोग बाहर से आकर पढ़ाई करें। एजुकेशन के हब वाराणसी को और डेवलप की जरूरत है।
ममता सिंह कहती हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पांचवें नंबर पर आ गई है, लेकिन देश के बेसिक बैक बोन यानी किसानों पर कुछ खास बात नहीं हो पा रही है। उन्होंने ‘फार्मर्स सैलरी बिल’ का सुझाव दिया है, जिसके माध्यम से किसानों को हर माह सैलरी मिल सके। किसानों के विकास से ही गांवों का विकास होगा। ममता ने नई शिक्षा नीति में सेक्स एजुकेशन को जोड़ने का सुझाव दिया। कहा कि शिक्षा नीति मोदी-योगी सरकार काम कर रही है लेकिन आरक्षण को लेकर कुछ नया करने की जरूरत है। जैसे जनरल कोटे के बच्चे 80 प्रतिशत अंक लाकर भी स्ट्रगल करते हैं। वहीं, एससी/ एसटी के बच्चे 60-65 अंक लाने के बाद आरक्षण का उपयोग कर सेलेक्ट हो जाते हैं, जबकि वह मजबूत परिवार से होते हैं।
एक सवाल के जवाब में वह कहती हैं कि बनारस एजुकेशन का हब है क्योंकि यहां बीएचयू जैसी संस्था है, लेकिन इसके अलावा यहां और कोई बड़ा विश्वविद्यालय नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के घोषणा-पत्र में तीन विश्वविद्यालयों की बात की गई है। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय तो आए दिन बन रहे हैं लेकिन उन्हें मजबूती नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ विश्वविद्यालयों ऐसे होने चाहिए कि इसमें भी लोग बाहर से आकर पढ़ाई करें। एजुकेशन के हब वाराणसी को और डेवलप की जरूरत है।
ममता सिंह कहती हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पांचवें नंबर पर आ गई है, लेकिन देश के बेसिक बैक बोन यानी किसानों पर कुछ खास बात नहीं हो पा रही है। उन्होंने ‘फार्मर्स सैलरी बिल’ का सुझाव दिया है, जिसके माध्यम से किसानों को हर माह सैलरी मिल सके। किसानों के विकास से ही गांवों का विकास होगा। ममता ने नई शिक्षा नीति में सेक्स एजुकेशन को जोड़ने का सुझाव दिया। कहा कि शिक्षा नीति मोदी-योगी सरकार काम कर रही है लेकिन आरक्षण को लेकर कुछ नया करने की जरूरत है। जैसे जनरल कोटे के बच्चे 80 प्रतिशत अंक लाकर भी स्ट्रगल करते हैं। वहीं, एससी/ एसटी के बच्चे 60-65 अंक लाने के बाद आरक्षण का उपयोग कर सेलेक्ट हो जाते हैं, जबकि वह मजबूत परिवार से होते हैं।
भाजपा के कार्यों को ममता ने सराहा, लेकिन यह भी कहा कि कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां आज भी सरकार को काम करने की जरूरत है। बिहार की सोनाली कहती हैं कि युवाओं के मुद्दों पर भाजपा या कोई भी सरकार गंभीर तरीके से काम करे, तो ही देश का विकास हो सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए मीडिया को भी खुद पर ध्यान देना चाहिए। अधिकतर मीडिया रूलिंग पार्टी पर ही फोकस करती है, लेकिन उसे राइट टू इन्फॉर्मेशन के तहत काम करना चाहिए।
सोनाली स्कील डेवलपमेंट पर कहती हैं कि इसमें सरकार और काम करने की जरूरत है। साथ ही राइट टू इन्फॉर्मेशन और पारदर्शी करना चाहिए। जालौन की अनुश्का यादव वाराणसी में पढ़ने आई हैं। वह कहती हैं कि शिक्षा का हब कहे जाने वाले बनारस में छात्रों के लिए फ्री लाइब्रेरी नहीं है, जहां वे जब चाहे जाकर किताबें पढ़ सकें। फ्री हॉस्टल की सुविधाएं होनी चाहिए।
कौशल से क्या होगा, जब रोजगार ही नहीं होगा
जाह्नवी सिंह कहती हैं कि भारत में युवाओं की सबसे बड़ी उपस्थिति है फिर भी यहां पर स्वच्छता अभियान जैसे काम को ग्राउंड लेवल पर बताया गया। इसका मतलब है कि यहा शुरू से ही जागरूकता का अभाव रहा है। युवा आज भी गे्रजुएशन के समय ही यह सोचकर परेशान होता है कि वह आगे क्या करेगा।
उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर मुद्दा है रिसर्च का। इस मामले मे यूरोपीयन देश आज भी आगे बढ़ते जा रहे हैं। इस पर भारत सरकार को काम करने की जरूरत है। सरकारी घोषणा-पत्र को लेकर जाह्नवी कहती हैं कि सरकार को अपने मैनीफेस्टो के हिसाब से ही काम करना चाहिए। इससे वह अपना विश्वास जनता पर कायम करती है। सौम्या मिश्रा कहती हैं कि स्किल डेवलपमेंट के साथ सरकार को अनइंप्लायमेंट (बेरोजगारी) को कम करने पर भी काम करना चाहिए। कौशल से क्या होगा, जब रोजगार ही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार बनाने में पूर्वांचल के लोगों का सबसे बड़ा योगदान होता है लेकिन कुर्सी मिलने के बाद यहीं के लोगों की उपेक्षा की जाती है। सौम्या ने स्किल डेवलपमेंट के लिए अलग यूनिवर्सिटी की मांग की। कहा कि होना यह चाहिए, छात्र अपने ही जिले में रहकर अच्छी और उच्च शिक्षा प्राप्त करें।
सोनाली स्कील डेवलपमेंट पर कहती हैं कि इसमें सरकार और काम करने की जरूरत है। साथ ही राइट टू इन्फॉर्मेशन और पारदर्शी करना चाहिए। जालौन की अनुश्का यादव वाराणसी में पढ़ने आई हैं। वह कहती हैं कि शिक्षा का हब कहे जाने वाले बनारस में छात्रों के लिए फ्री लाइब्रेरी नहीं है, जहां वे जब चाहे जाकर किताबें पढ़ सकें। फ्री हॉस्टल की सुविधाएं होनी चाहिए।
कौशल से क्या होगा, जब रोजगार ही नहीं होगा
जाह्नवी सिंह कहती हैं कि भारत में युवाओं की सबसे बड़ी उपस्थिति है फिर भी यहां पर स्वच्छता अभियान जैसे काम को ग्राउंड लेवल पर बताया गया। इसका मतलब है कि यहा शुरू से ही जागरूकता का अभाव रहा है। युवा आज भी गे्रजुएशन के समय ही यह सोचकर परेशान होता है कि वह आगे क्या करेगा।
उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर मुद्दा है रिसर्च का। इस मामले मे यूरोपीयन देश आज भी आगे बढ़ते जा रहे हैं। इस पर भारत सरकार को काम करने की जरूरत है। सरकारी घोषणा-पत्र को लेकर जाह्नवी कहती हैं कि सरकार को अपने मैनीफेस्टो के हिसाब से ही काम करना चाहिए। इससे वह अपना विश्वास जनता पर कायम करती है। सौम्या मिश्रा कहती हैं कि स्किल डेवलपमेंट के साथ सरकार को अनइंप्लायमेंट (बेरोजगारी) को कम करने पर भी काम करना चाहिए। कौशल से क्या होगा, जब रोजगार ही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार बनाने में पूर्वांचल के लोगों का सबसे बड़ा योगदान होता है लेकिन कुर्सी मिलने के बाद यहीं के लोगों की उपेक्षा की जाती है। सौम्या ने स्किल डेवलपमेंट के लिए अलग यूनिवर्सिटी की मांग की। कहा कि होना यह चाहिए, छात्र अपने ही जिले में रहकर अच्छी और उच्च शिक्षा प्राप्त करें।
काम को देखकर ही वोट देना चाहिए
मानसी सिंह कहती हैं कि भाजपा अच्छा काम कर रही है, लेकिन कांग्रेस के मुकाबले गवर्नमेंट जॉब उपलब्ध कराने में वह आज भी पीछे है। वैकेंसीज भी पहले से कम हो गई है। भाजपा सरकार के विकास कार्यों से मानसी खुश हैं। कहती हैं कि वाराणसी में पर्यटन बढ़ा है लेकिन पर्यटकों को और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
अनुष्का कहती हैं कि हम सरकार को अपने लिए ही चुनते हैं। उस सरकार से हमें काफी उम्मीदें रहती हैं, बावजूद इसके काम नहीं होता है तो निराशा हमें ही होती है। उन्होंने कहा कि काम को देखकर ही वोट देना चाहिए। लोकल समस्याओं को बड़े नेता नहीं जान पाएंगे। इस पर कम्युनिकेशन की जरूरत है।
शगुन मिश्रा कहती हैं कि 2014 के बाद से सरकार ने काफी विकास किया है। स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा पर सरकार ने काफी काम किया है। आज सड़क पर भी मैं काफी सेफ महसूस करती हूं। वह कहती हैं कि सरकारी योजनाओं को लेकर अभी जागरूकता की कमी है। गांवों में इसकी ज्यादा जरूरत है।
सरकार की योजनाओं को लेकर शिवानी कहती हैं कि एजुकेशन को लेकर गांव आज भी पिछड़े हुए हैं। यही कारण है कि युवा शहरों में बने विश्वविद्यालय की तरफ भागते हैं। इस समय कोई भी बुनियादी मुद्दा हो उसे रामजी या मथुरा का नाम लेकर दबा दिया जाता है। लेकिन पढ़ाई करने वालें युवाओं को आज भी चिंता है कि वह आगे क्या करेंगे?
बनारस के स्वच्छता को लेकर सौम्या काफी खुश हैं। वह कहती हैं कि रोजगार और स्वास्थ्य को लेकर आज भी काम करने की जरूरत है। कुल लेकर यह कहा जा सकता है कि मुद्दे सिर्फ ऊपर ही ठीक हैं ग्राउंड लेवल पर अभी भी काम करना है।
अनुष्का कहती हैं कि हम सरकार को अपने लिए ही चुनते हैं। उस सरकार से हमें काफी उम्मीदें रहती हैं, बावजूद इसके काम नहीं होता है तो निराशा हमें ही होती है। उन्होंने कहा कि काम को देखकर ही वोट देना चाहिए। लोकल समस्याओं को बड़े नेता नहीं जान पाएंगे। इस पर कम्युनिकेशन की जरूरत है।
शगुन मिश्रा कहती हैं कि 2014 के बाद से सरकार ने काफी विकास किया है। स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा पर सरकार ने काफी काम किया है। आज सड़क पर भी मैं काफी सेफ महसूस करती हूं। वह कहती हैं कि सरकारी योजनाओं को लेकर अभी जागरूकता की कमी है। गांवों में इसकी ज्यादा जरूरत है।
सरकार की योजनाओं को लेकर शिवानी कहती हैं कि एजुकेशन को लेकर गांव आज भी पिछड़े हुए हैं। यही कारण है कि युवा शहरों में बने विश्वविद्यालय की तरफ भागते हैं। इस समय कोई भी बुनियादी मुद्दा हो उसे रामजी या मथुरा का नाम लेकर दबा दिया जाता है। लेकिन पढ़ाई करने वालें युवाओं को आज भी चिंता है कि वह आगे क्या करेंगे?
बनारस के स्वच्छता को लेकर सौम्या काफी खुश हैं। वह कहती हैं कि रोजगार और स्वास्थ्य को लेकर आज भी काम करने की जरूरत है। कुल लेकर यह कहा जा सकता है कि मुद्दे सिर्फ ऊपर ही ठीक हैं ग्राउंड लेवल पर अभी भी काम करना है।