काशी विश्वनाथ की सप्तर्षि आरती विवाद सुलझा, पूजा को लेकर लागू हुई ये व्यवस्था
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती का विवाद मंडलायुक्त की पहल पर 10 दिन बाद सुलझ गया है। प्रशासन ने मंदिर की परंपरा के अनुसार महंत परिवार के तीन सदस्यों, सभी स्टेट के पुजारी और मंदिर के एक पुजारी को आरती की अनुमति दे दी है। सोमवार से सप्तर्षि आरती अपने पुराने स्वरूप में होगी।
सात मई को सप्तर्षि आरती के अर्चकों को मंदिर प्रशासन ने प्रवेश करने से रोक दिया था। विरोधस्वरूप अर्चकों ने गेट नंबर चार पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर बाबा विश्वनाथ की सप्तर्षि आरती की। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने महंत परिवार को नोटिस जारी कर दी थी। घटना की वीडियो और तस्वीरें भी खूब वायरल हुईं।
मामला जब सीएम के दरबार में पहुंचा तो उनके निर्देश पर सूबे के राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया था और मंदिर प्रशासन को क्लीन चिट दी थी। उधर, मामले में महंत परिवार की तरफ से शास्त्रार्थ की चुनौती दी गई और मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गया। उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी मामले में पल-पल जानकारी ले रहा था।
काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा, पद्मश्री महामहोपाध्याय भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री ने मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाए थे। सोशल मीडिया पर भी महंत परिवार को आरती से रोकने के विरोध में मुहिम शुरू हो गई थी।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि काशी की परंपरा का संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। पुरानी व्यवस्था को बहाल करते हुए महंत परिवार के तीन, सभी स्टेट के पुजारी और मंदिर के एक पुजारी को सप्तर्षि आरती करने की अनुमति दी गई है। महंत परिवार तीन सदस्य स्वयं तय करके बताएंगे। महंत परिवार ने नोटिस का जवाब दे दिया है। इसी के साथ इस मामले का पटाक्षेप कर दिया गया है।
डीएम ने दिया था मामला शांत करने का सुझाव
जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने इस मामले में जांच कमेटी गठित कर अपर जिलाधिकारी नगर विनय कुमार को जांच सौंपी। जांच रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी ने मंडलायुक्त को रिपोर्ट दी है। इसमें भी मामले का पटाक्षेप का सुझाव दिया गया था।