{"_id":"37990e4e515c699dcb1165dfeddca53c","slug":"sant-morari-bapu-speak-at-asi-ghat-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांप से अधिक जहरीला हुआ आदमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांप से अधिक जहरीला हुआ आदमी
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2015 02:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। संत मोरारी बापू ने शुक्रवार को रामकथा के एक प्रसंग में कहा कि अब आदमी सांप से अधिक जहरीला हो गया है। सांप तो अब कम हो गए हैं और उनका जहर भी नहीं लगता। इसलिए कि अब आदमी विषाक्त होकर डसने लगा है। उन्होंने कहा कि विचार की मथानी में दृढ़ता का मंदराचल घूमना चाहिए।
विज्ञापन
तभी प्रसन्नता निकलेगी। रेत-बालू को पेरने से तेल और पानी को मथने से घी भले निकल जाए लेकिन बिना हरि भजन से जीवन का बेड़ा पार नहीं हो सकता।
अस्सी और संत रविदास घाट के बीच गंगा तट पर राम कथा की यात्रा को आठवें दिन बापू ने पुराने फिल्मी नगमों और शेरों से रसमय बनाया। कभी ईश्वर को याद करने के लिए -बेदर्दी बालमा तुझको मेरा दिल याद करता है... गुनगुनाया तो कभी मेरा सूना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं... को लय देकर भक्तों को झूमने-थिरकने के लिए मजबूर किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि विचारों का पतन तब होता है जब नींव में ईश्वर रूपी विश्वास नहीं होता। प्रेम और सत्य पर उन्होंने विस्तार से रोशनी डाली। कहा कि प्रेम के लिए कभी किसी प्राणायाम की जरूरत नहीं होती। प्रेम तो चाह यानी भक्ति -समर्पण की राह में प्रस्फुटित होता है। सहजता ही सत्य है।
विज्ञापन
सत्य भटकता ही नहीं तो उसे खोजने की जरूरत कहां से आएगी। उन्होंने कहा कि गुरु को भले भूल जाएं लेकिन गुरु कृपा को हमेशा याद रखना चाहिए। इसलिए कि जीवन की गति वहीं से शुरू होती है। तुलसी, कबीर, मीरा, रैदास,चैतन्य महाप्रभु ने भी गति को ही पकड़ा था। उन्होंने कहा कि सबकुछ परमात्मा की कृपा से ही हो रहा है। मैं नहीं बोलता, बोलता है त्रिभुवन दादा। इसलिए ईश्वर का भरोसा कभी नहीं छोड़ना चाहिए।