संकट मोचन संगीत समारोह : अमेरिकी सेक्सोफोन पर सजे शास्त्रीय राग
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संकट मोचन संगीत समारोह में रविवार को लय, ताल के नए प्रवाह, सुरों की नई खनक और रागों का अनूठा तालमेल हर किसी के लिए यादगार बना। कथक नृत्य गुरु पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज की तीसरी पीढ़ी ने थिरकन से चार चांद लगाया तो अमेरिका के सेक्सोफोन वादक जार्ज ब्रुक ने पश्चिम के साज पर भारतीय शास्त्रीय रागों को निबद्ध कर नई बानगी पेश की।
गायन-वादन और नृत्य की इन्हीं ऊंचाइयों और प्रयोगों के साथ संगीत समारोह की दूसरी निशा परवान चढ़ी। रात आठ बजे फूलों से सुसज्जित मंच पर पं. बिरजू महाराज की पौत्री रागिनी महाराज ने उठान से कथक नृत्य की शुरूआत की। सबसे पहले उन्होंने अपने पितामह जयकृष्ण महाराज की बंदिश पर शिवस्तुति की।
रागिनी ने लखनऊ घराने की कई पारंपरिक बंदिशों पर तोड़ी, टुकड़ा, छोटी-छोटी तिहाइयां, गतें और अपने दादा गुरु के अंदाज में बंदिशों पर नृत्य किया। उनके साथ युगलबंदी की सिंजनी कुलकर्णी ने। उन्होंने सत्कार से समापन किया।
तबले पर अनुव्रत चटर्जी, बोल पढंत और गायन दीपक महाराज, हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्र, सारंगी पर संतोष मिश्र और सितार पर ध्रुवनाथ मिश्र ने संगत की। पं. रविंद्र नारायण गोस्वामी ने सितार पर राग ऋषभ प्रिय की अवतारणा की। रागचारी के बाद एक ताल और फिर तीन ताल में द्रुत लय की गत बजाई।
तबले पर रजनीश तिवारी ने संगत की। इनके बाद जानी-मानी शास्त्रीय गायिका अंजलि पोेहनकर ने मंच संभाला। इन्होंने राग काफी में तीन ताल में निबद्ध बंदिश की अवतारणा की। बंदिश के बोल थे जब से श्याम सुधारे।
सुपर हीरोज की दीर्घा में लोकबंधु, रुस्तम सैटिन से कथक क्वीन तक
इसके बाद दादरा के बोल कोयलिया मत कर पुकार पर इन्होंने सुर लगाया। इनके बाद दिल्ली से आए भास्करनाथ ने शहनाई पर अपनी दमकशी और सुरों की कशिश से संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।
उधर, रात 12 बजे मंच पर जैसे ही अमेरिकी कलाकार जार्ज ब्रुक पहुंचे हर-हर महादेव और तालियों की जोरदार गड़गहड़ाहट के साथ लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। पहली बार समारोह में हाजिरी लगाने के लिए मंदिर प्रबंधन का आभार जताया और कहा कि समारोह में आना गौरव की बात है।
उन्होंने सेक्सोफोन पर राग चारु केशी की अवतारणा की। तबले पर ओजस आर्य, पखावज पर जाने-माने कलाकार भवानी शंकर, वायलिन पर दीपक पंडित ने संगत की।
संकट मोचन संगीत समारोह में संगीत के साथ चित्रकला और मूर्ति कला का अनूठा समन्वय रविवार की रात देश-दुनिया के संगीत प्रेमियों, कला साधकों, समीक्षकों के लिए नई मिसाल पेश कर गया। एक तरफ सुरों की साधना जीवंत हुई तो दूसरी ओर कला-परिकल्पना के सपने सजाए गए।
बीएचयू दृश्यकला संकाय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ललित कला विभाग, इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट्स सहित अन्य संस्थानों से आए कलाकारों ने सुपर हीरोज आफ द बनारस की कला दीर्घा को रंग और कूंची से जीवंत कर दिया।
कलाकारों ने रविवार की रात ख्याल गायक पं. ओंकारनाथ ठाकुर, भारतरत्न डॉ. भगवान दास, डॉ. सर सुंदरलाल, पं. बलवंत राय भट्ट, रुस्तम सैटिन, कथक क्वीन सितारा देवी, तबले में बनारस घराने के प्रवर्तक पं. राम सहाय और सितार के शहंशाह भारतरत्न पं. रविशंकर, भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, एनी बेसेंट, माता आनंदमयी, लोकबंधु राजनारायण के चित्र कैनवास पर देखते-देखते उकेर दिए। कला संगम में आनंद वन कला समूह के चित्रकारों की ओर से काशी के बेहतरीन क्षणों को सजोया जा रहा है।