संकट मोचन संगीत समोराह: मां ने ढाई महीने में बनाई मधुबनी पेंटिंग, बेटी ने फड़ कला का दिखाया हुनर; बना आकर्षण
संकट मोचन संगीत समारोह का समापन हो गया। इसमें लगी चित्र प्रदर्शनी में मां और बेटी की बनाई पेंटिंग को काफी सराहना मिली। मां ने मधुबनी तो बेटी ने फड़ चित्रकला के माध्यम से हनुमत दरबार में अपनी हाजिरी दर्ज कराई।
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Sankat Mochan sangeet samaroh: संकट मोचन संगीत समोराह में लगी चित्र प्रदर्शनी में एक महिला और उसकी 10 वर्षीय बेटी ने भी आकर्षक पेंटिंग बनाकर हनुमत दरबार में हाजिरी लगाई है। मधुबनी और फड़ कला का अनोखा मेल देख हर कोई आकर्षित हो रहा था।
वाराणसी की रहने वाली पद्मिनी शर्मा ने अपनी कला साधना से एक और मिसाल कायम की है। उन्होंने करीब ढाई महीने की मेहनत से एक खूबसूरत मधुबनी पेंटिंग तैयार की है, जो पारंपरिक भारतीय लोककला की बेजोड़ मिसाल है।
इस चित्र में मिथिला की संस्कृति, प्रकृति और राम-सीता के विवाह को बेहद बारीकी और समर्पण के साथ उकेरा गया है। यह पेंटिंग संकट मोचन संगीत समारोह में लगी चित्र प्रदर्शनी में काफी आकर्षक लग रही है।
पद्मिनी बताती हैं कि मधुबनी पेंटिंग उनके लिए केवल एक कला नहीं, बल्कि ध्यान और आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है। उन्होंने बताया कि हर दिन वे घंटों तक बैठकर बारीक लकीरों, प्राकृतिक रंगों और पारंपरिक प्रतीकों को संयम और लगन के साथ कागज़ पर उतारती थीं। यह प्रक्रिया उनके लिए आत्मिक रूप से जुड़ने और भीतर की शांति पाने का जरिया बन गई।
पद्मिनी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस पेंटिंग के जरिए उन्होंने न सिर्फ मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को बताने का अवसर पाया, बल्कि खुद को भी एक नई दृष्टि से देखा। उनके अनुसार, हर रंग, हर रेखा मेरे अनुभवों की कहानी कहती है।
पद्मिनी की 10 वर्षीय बेटी प्रज्ञा मनस्वी ने हनुमानजी की आकर्षक पेंटिंग बनाई है, जो राजस्थान की लोक कला फड़ पर आधारित है। इसे बनाने में प्रज्ञा को 10 दिन लगे। वे अपनी नानी और मां से काफी प्रभावित हैं। प्रज्ञा ने पहले पेंसिल से इस स्केच को बनाया फिर रंगों का उपयोग कर इसकी आकर्षकता बढ़ाई।
प्रज्ञा बताती हैं कि यह पेंटिंग बनाने में काफी मशक्कत हुई। कई बार बिगड़ भी गई लेकिन नानी मेरा मनोबल बढ़ाती रहीं। मैंने भी हार नहीं मानी और 10वें दिन मुझे सफलता मिल ही गई। पेंटिंग में खालीपन दिख रहा था तो मैंने उन स्थानों पर प्रभु श्रीराम के नाम लिख दिए।