फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Sankat Mochan sangeet samaroh flute of Hari charmed Vishwambhar Pakhavaj

संकट मोचन संगीत समारोह: हरि की बांसुरी ने विश्वंभर के पखावज को रिझाया, महावीर का आंगन बना मधुबन

Thu, 17 Apr 2025 09:17 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 17 Apr 2025 09:17 AM IST
सार

समारोह की पहली धुन लेकर संगीत समारोह के मंच पर आए पद्मविभूषण 87 वर्षीय पं. हरिप्रसाद चौरसिया की बांसुरी के साथ संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने पखावज बजाकर भक्ति रस जगा दिया। 

विज्ञापन
Sankat Mochan sangeet samaroh flute of Hari charmed Vishwambhar Pakhavaj
नृत्यांगना जननी मुरली। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sankat Mochan Sangeet Samaroh 2025: संकट मोचन का आंगन तब मधुबन बन गया, जब हरि की बांसुरी कान्हा बनकर विश्वंभर की पखावज रूपी राधा को रिझाने लगी। श्रोता-श्रद्धालु ग्वाल बाल जैसे इस पल के आनंद में डूब गए। इसी भाव के साथ बुधवार को 7:50 बजे 102वें साल के छह दिवसीय संकट मोचन संगीत समारोह का आह्वान हो गया। महावीर के दरबार में सबसे पहले बांसुरी पर राग विहाग गूंजा तो परिसर भर में फैले भक्तों का जमघट आंगन में लग गया। 

विज्ञापन


पखावज की डिमडिमाहट और बांसुरी की धुन में एक खास संवाद चल रहा था, जिसे सुधि श्रोताओं ने बड़े चाव से महसूस किया। पूरे मंदिर परिसर में गूंज रही पं. हरिप्रसाद चौरसिया के बांसुरी की धुन और आलाप लोगों को मंदिर की ओर तेजी से खींच लाई। 
विज्ञापन


प्रस्तुति के दौरान पं. हरि प्रसाद ने तीन बार बांसुरी भी बदली। उनके होठों के कंपन भी सुर बन जा रहे थे। अंत में ओम जय जगदीश हरे... की धुन बजाई तो विदेशी श्रोता भी ताली बजाकर झूमने लगे। समापन के बाद श्रोताओं ने ऊंचे स्वर में हर-हर महादेव का जयघोष कर आभार जताया। दोनों वादकों के साथ बांसुरी पर विवेक सोनार और वैष्णवी जोशी ने मनोहारी संगत की। 

विज्ञापन
विज्ञापन

पढ़ाई काम आए न आए संगीत काम की चीज
पं. हरिप्रसाद चौरसिया ने कहा कि मैं अगले 200 वर्षों तक यहां पर प्रस्तुति दूंगा। यहां कब से आ रहा हूं ये तो याद ही नहीं है। जीवन में कुछ करें न करें, लेकिन संगीत से नाता जरूर रखें। जीवन में पढ़ाई भले ही काम न आए, लेकिन संगीत और संगत काफी काम आएगा।

संगीत ने ही आज 87 वर्ष की उम्र में मुझे युवा बनाकर रखा है। आज एआई के जमाने में जो संगीतकार पैसे वाले हैं, वो मशीनें भी खरीद लेते हैं और बड़े उपकरण मंगा लेते हैं। गरीब संगीतकारों को आगे नहीं बढ़ाते। हालांकि, एआई से संगीत को फायदा होता दिख रहा है। 

नहीं जानता क्या है आज की संगीत विधा
पं. हरिप्रसाद ने कहा कि आज की संगीत विधा को मैं नहीं जानता, जो बचपन से सुना है वही मालूम है। हमारी परंपरा तब तक चलेगी जब तक सूर्य निकलेगा। मेरी पूरी भक्ति यहां पर है। बनारस की तरह से कलाकार पूरे ब्रह्मांड में नहीं है। यहां के मंच में जादू सा है।

शकील बदायूंनी और पंकज उधास की गजल से खुली नींद
आधी रात में जब श्रोताओं की नींद से आंख भारी होने लगी तो छह कलाकारों के साथ चौथी प्रस्तुति लेकर पहुंचे पं. अजय पोहनकर की अलाप और धारा प्रवाह सरगम सुन श्रोता जाग उठे। अजय पोहनकर ने ख्याली आलाप के बाद ध्रुपद अंग में प्रभावी आलाप पर सुर लगाया। 

राग आभोगी में ख्याल गायन किया तो दर्शकों की तालियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। तभी उन्होंने शकील बंदायूनी की लिखी गजल ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया... और पंकज उधास की गजल कैसे बीते दिन-रात प्रभु जी... की प्रस्तुति देकर लोगों को अपना मुरीद कर लिया। तबले पर हारमोनियम पर दिल्ली की पारोमिता मुखर्जी, सारंगी पर गौरी बनर्जी और कोलकाता के समर साहा ने बेजोड़ संगत की। 

महंत बोले-हरिप्रसाद के सामने हवा खराब हो गई
प्रस्तुति के बाद महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने कहा कि पंडित जी के साथ पखावज बजाने में मेरी हवा खराब हो गई। इस पर पं. हरिप्रसाद ने कहा कि आज मैं महंत जी की वजह से नर्वस था। मुझे साथ में बांसुरी बजाने का हौसला देने के लिए धन्यवाद। 

कभी बनीं मीरा तो कभी मइया यशोदा
संगीत समारोह की दूसरी प्रस्तुति भरतनाट्यम भी भगवान बाल-गोपाल को ही समर्पित रही। बंगलूरू की नृत्यांगना जननी मुरली ने भरतनाट्यम से गंगा स्तुति की। हरि तुम हरो जन की पीर... गीत पर भरतनाट्यम पर जननी कभी यशोदा तो कभी मीरा नजर आईं। 

कन्हैया के नटखटपन पर कभी गुस्सा तो कभी वात्सल्य की झलक दिखलाई। संत पुरंदरदास की एक रचना पर नृत्य करने के बाद महाकाल को समर्पित बंदिश से शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति को खत्म किया। 

300 सेकंड तक न तबले से हाथ हटे, न संतूर से
तीसरी प्रस्तुति बनारस घराने के तबला और डोगरा परिवार के संतूर की जुगलबंदी के नाम रही। अमिताभ बच्चन और जाकिर हुसैन के साथ जय हनुमान जैसे लोकप्रिय भजन में संतूर की आवाज से लोहा मनवा चुके पं. राहुल शर्मा ने संतूर पर राग झिंझोटी की धुन पेश की। लगातार 300 सेकेंड तक न तो तबले से हाथ हटे और न ही संतूर से। उनके साथ तबले पर संगत कर रहे बनारस घराने के पं. रामकुमार मिश्र ने बखूबी साथ दिया। 

विख्यात संतूर वादक पं. शिव कुमार शर्मा के बेटे पं. राहुल शर्मा ने राग झिंझोटी में आलाप, जोड़ और झाला का वादन कर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। आरोह-अवरोह के बीच ऐसा लगा कि हाथ से तार छूट जाने के बावजूद भी संतूर की मधुर ध्वनि आ रही हो। रूपक ताल में एक और तीन ताल की दो रचनाओं को बजाया। अंत में पहाड़ी धुन के साथ अपनी प्रस्तुति को पूरा किया। 

कला दीर्घा में सबसे महंगी सवा तीन और ढाई लाख की पेंटिंग
संगीत समारोह का खास आकर्षण बगीचे की कला दीर्घा रही। यहां पर 400 से ज्यादा अद्भुत तस्वीरें देखने को मिलीं। सबसे महंगी पेंटिंग सवा तीन लाख रुपये की है। इसे स्तुति सिंह ने उकेरा है।  

दूसरी सबसे महंगी पेंटिंग 2.50 लाख रुपये की है। इस पेंटिंग में अलग-अलग रंगों से हनुमान जी के कॉस्मिक पॉवर यानी ब्रह्मांडीय शक्ति उकेरी गई थी। आर्टिस्ट अजय उपासनी ने हनुमान जी की ऊर्जा को रंगों में उकेरा था। 

तीसरी सबसे महंगी पेंटिंग 85 हजार की है। इसमें बजरंग बली ने अपना सीना चीरकर सियाराम को दिखाया। विजय मूर्तिकार ने दो सेंटीमीटर की सबसे छोटी मूर्ति लगाई। उद्घाटन महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा, पं. राजेश्वर आचार्य, पं. संजू सहाय और प्रो.  श्रीप्रकाश शुक्ला ने किया। 

11 साल की जीवा ने राम लिखकर बनाई हनुमान की तस्वीर
कला दीर्घा में कई मुस्लिम कलाकारों ने भी हिंदू देवी-देवताओं को उकेरा। 11 साल की नन्हीं कलाकार जीवा ने रामजी का नाम लिखकर हनुमान जी का चित्र बनाया है। जीवा बताती हैं कि दीदी स्नेहा को देखकर मैं आकर्षित हुईं। उधर, बीएचयू के दृश्य कला संकाय की छात्रा खुशी यादव ने चॉक पर सुई से नक्काशी कर हनुमान चालीसा लिखकर इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने प्रमाणपत्र और मेडल देकर सम्मानित किया। 

संगीत समारोह में आज

  • लावण्या शंकर : भरतनाट्यम
  • प्रो. राजेश शाह : सितार वादन और डॉ. रजनीश तिवारी : तबला वादन
  • पं. अजय चक्रवर्ती : गायन, कल्याण चक्रवर्ती : तबला वादन और धर्मनाथ मिश्रा : संवादिनी
  • विवेक पांड्या : तबला वादन
  • पं. पूर्वायन चटर्जी : सितार वादन और पं. संजू सहाय : तबला वादन
  • सोहिनी राय चौधरी : गायन, देवज्योति बोस : तबला वादन, परोमिता मुखर्जी : संवादिनी, गौरी बनर्जी: सारंगी वादन
  • मंजूनाथ और नागराज माधवप्पा : वायलिन वादन, पं. येल्ला वेंकटेश्वर : मृदंगम वादन
  • पं. नीरज पारिख : गायन, बिलाल खां सोनावी : तबला वादन, मोहित साहनी : संवादिनी, विनायक सहाय : सारंगी वादन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed