इंडियन नॉलेज सिस्टम का केंद्र बनेगा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिल्प कलाओं पर होगा शोध
इस शोध परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित अनुसंधान को आगे बढ़ाना है। कुलपति ने बताया कि सहायक प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर डॉ. रविशंकर पांडेय एवं डॉ. ज्ञानेंद्र सांपकोटा को बनाया गया है।
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वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को इंडियन नॉलेज सिस्टम केंद्र के रूप में चयनित किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय के प्रस्ताव पर विचार कर आइकेएस केंद्र बनाने पर सहमति दे दी है। विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शिल्प कलाओं पर शोध करेगा।
इस केंद्र में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर कुलपति को नियुक्त किया गया है। केंद्र में देश के विश्वविद्यालयों के 20 प्रशिक्षार्थी इंटर्नशिप करेंगे। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि फरवरी के प्रथम सप्ताह में उच्च शिक्षा के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (आइकेएस) को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था।
120 आवेदनों में (आइकेएस) एआईसीटीई, नई दिल्ली अभिनव प्रकोष्ठ द्वारा साक्षात्कार के बाद देश भर के 13 संस्थानों का चयन किया गया है। चयनित संस्थानों में (आइकेएस) भारतीय ज्ञान परंपरा का केंद्र चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय को संस्कृत शास्त्रों एवं पांडुलिपियों में निहित ज्ञान राशि के लिए चयनित किया गया है।
प्रो. त्रिपाठी ने देश-दुनिया के वैज्ञानिक जो आविष्कार कर रहे हैं, उसका उल्लेख हमारे वेद-पुराणों में हजारों वर्ष पहले किया जा चुका है। ऋषि-मुनियों के ज्ञान परंपरा को वैज्ञानिक रूप देने के लिए उच्चस्तरीय अनुसंधान की जरूरत है। आइकेएस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भी यही है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के सरस्वती भवन पुस्तकालय में पांडुलिपियों के रूप में बौद्धिक खजाना संरक्षित है। बाह्मी, देवनागरी, मैथिली सहित विभिन्न भाषाओं में पुराण, ज्योतिष, तंत्र शास्त्र, मीमांसा, योग, आयुर्वेद सहित अन्य विषयों पर हस्तलिखित दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं। इन पर शोध की जरूरत हैं।
इंडियन नॉलेज सिस्टम का सेंटर खुलने से भारतीय ज्ञान परंपराओं को और बल मिलेगा। इस शोध परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित अनुसंधान को आगे बढ़ाना है। कुलपति ने बताया कि सहायक प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर डॉ. रविशंकर पांडेय एवं डॉ. ज्ञानेंद्र सांपकोटा को बनाया गया है। इसमें दो प्रोफेसर, एक कंप्यूटर ऑपरेटर तथा परियोजना सहायक भी नियुक्त किए जाएंगे।