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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sampurnanand Sanskrit University will be included in the world's top universities

Varanasi: विश्व के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल होगा संपूर्णानंद संस्कृत विवि, 233 साल का है इतिहास

Sun, 14 May 2023 09:33 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sun, 14 May 2023 09:33 AM IST
सार

नैक के निदेशक प्रो. एससी शर्मा ने कहा कि सरस्वती भवन पुस्तकालय विश्व में दुर्लभ है। यह अनमोल और अद्भुत है। नैक मूल्यांकन के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की हर संभव मदद की जाएगी। वह शनिवार को बौद्ध कक्ष सभागार में नैक मूल्यांकन पर एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

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Sampurnanand Sanskrit University will be included in the world's top universities
वाराणसी का संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (एसएसयू) - फोटो : SSU

विस्तार

नैक के निदेशक प्रो. एससी शर्मा ने कहा कि सरस्वती भवन पुस्तकालय विश्व में दुर्लभ है। यह अनमोल और अद्भुत है। नैक मूल्यांकन के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की हर संभव मदद की जाएगी। वह शनिवार को बौद्ध कक्ष सभागार में नैक मूल्यांकन पर एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

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नैक के सलाहकार डॉ. नीलेश पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय के 233 वर्षों के ऐतिहासिक गौरव को उसमें दर्शाएं। विश्वविद्यालय में शास्त्रों के महत्व और विभिन्न उत्कृष्ट आचार्यों की स्मृतियों पर वीथिका को जोड़ें। यह संस्था अन्य संस्थाओं से भिन्न है, यह प्राच्य विद्या की अति प्राचीन संस्था है।
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नैक के शैक्षणिक सलाहकार रविशंकर भट्ट ने नैक द्वारा जारी संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए मैनुअल को विस्तृत रूप में बताया। नैक बंगलूरू से आए पदाधिकारियों ने विभागाध्यक्षों, संकायाध्यक्षों, आईक्यूएसी के सदस्यों के पूछे प्रश्नों के उत्तर दिए। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि आज तक इस संस्था ने अनेक उपलब्धियों को प्राप्त कर गौरव को बढ़ाया है।

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यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्कृत के ज्ञान को प्रसारित कर रही है। आईक्यूएसी के समन्वयक प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने तैयारियों के बारे में जानकारी दी। सह समन्वयक डॉ. राजा पाठक ने संचालन और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी ने किया। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. शंभू नाथ शुक्ल मौजूद रहे।

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