संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय: छात्र सीख रहे मंडप की स्थापना और वेदी निर्माण की पद्धति, जानें- खास
Varanasi News: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में स्मार्तमंडपस्थापनम् विषयक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम चल रहा है। इस पाठ्यक्रम में 80 छात्र एवं छात्राएं पंजीकृत हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संस्कृत परंपरा एवं वैदिक-स्मार्त विधानों के संरक्षण तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण के उद्देश्य से स्मार्तमंडपस्थापनम् विषयक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम का संचालन भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र में हो रहा है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में चल रहे पाठ्यक्रम में 80 छात्र एवं छात्राएं पंजीकृत हैं। रविवार को पाठ्यक्रम के तहत वेद विभाग की श्रौत-स्मार्त मंडप यज्ञशाला में प्रायोगिक पाठ का विधिवत प्रशिक्षण किया गया।
पाठ्यक्रम संचालक केंद्र के प्रधान गवेषक डॉ. ज्ञानेंद्र सापकोटा ने बताया कि इस प्रायोगिक पाठ्यक्रम में आमंत्रित आचार्य डॉ. विजय कुमार शर्मा तथा सहयोगी आचार्य डॉ. आशीष मणि त्रिपाठी द्वारा विद्यार्थियों को शास्त्रसम्मत एवं व्यवहारोपयोगी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। आचार्यों के मार्गदर्शन में मंडपस्थापन, वेदी-विन्यास, दिशानिर्धारण, आयाम-निर्धारण, पूजन-सामग्री की व्यवस्था तथा कर्मकांडीय अनुशासन से संबद्ध विषयों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया जा रहा है।
संस्कृत परंपरा एवं वैदिक–स्मार्त विधानों के संरक्षण तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण के उद्देश्य से स्मार्तमंडपस्थापनम विषयक प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम के अंतर्गत प्रायोगिक पाठ का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह पाठ्यक्रम स्मार्त परंपरा में प्रचलित मंडपस्थापन, वेदी-विन्यास, यज्ञशाला-रचना, पूजन-विधान, कर्मकांडीय उपकरणों की व्यवस्था तथा शास्त्रीय मर्यादाओं के अनुसार व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
रोजगारपरक मार्ग प्रशस्त करेगा पाठ्यक्रम
प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम की विशेषता यह है कि इसमें केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक ही सीमित न रहकर, पूर्णतः प्रायोगिक प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया है। पाठ्यक्रम की संरचना अत्यंत सघन एवं अनुशासित है इसके अन्तर्गत आहत्य 45 घंटे की कक्षाएं सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक रूप से संचालित की जानी हैं। यह पाठ्यक्रम परंपरागत ज्ञान के संरक्षण एवं रोजगारपरक मार्ग प्रशस्त करेगा। वेद विभाग के आचार्य प्रो. महेंद्रनाथ पांडेय ने कहा कि वर्तमान समय में स्मार्त परंपरा से जुड़े प्रामाणिक एवं प्रशिक्षित कर्मकांडियों की आवश्यकता बढ़ गई है। यह पाठ्यक्रम न केवल परंपरागत ज्ञान के संरक्षण में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि युवाओं के लिए आजीविका एवं सेवा के नए अवसर भी सृजित करेगा।