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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय: 43वें दीक्षांत समारोह में 11477 को उपाधि, 36 विद्यार्थियों को 58 पदक
Tue, 07 Oct 2025 05:13 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 07 Oct 2025 05:13 PM IST
सार
Varanasi News: स्नातक में छात्रों की संख्या 4183, छात्राओं की संख्या 1790, स्नातकोत्तर में छात्रों की संख्या 3299 और छात्राओं की संख्या 1188 है। इसके साथ ही सात छात्राओं को दस पदक और 29 छात्रों को 48 पदक वितरित किए जाएंगे।
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प्रेसवार्ता करते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 43वें दीक्षांत समारोह में 11477 विद्यार्थियों को उपाधि दी जाएगी। इसके साथ ही 36 विद्यार्थियों को 58 पदक प्रदान किए जाएंगे। आठ अक्तूबर को मुख्य भवन में होने वाले दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी। मुख्य अतिथि संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत होंगे।
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ये जानकारी कुलसचिव राकेश कुमार ने सोमवार को योगसाधना केंद्र में पत्रकारों को दी। कुलसचिव ने बताया कि दीक्षांत समारोह मुख्य भवन में अपराह्न तीन बजे से शुरू होगा। दीक्षांत में प्रथमा से लेकर विद्यावाचस्पति तक की 11477 उपाधियां दी जाएंगी। इसमें 8301 छात्र और 3176 छात्राएं शामिल हैं।
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स्नातक में छात्रों की संख्या 4183, छात्राओं की संख्या 1790, स्नातकोत्तर में छात्रों की संख्या 3299 और छात्राओं की संख्या 1188 है। इसके साथ ही सात छात्राओं को दस पदक और 29 छात्रों को 48 पदक वितरित किए जाएंगे। इसमें छात्रों की संख्या 80.56 और छात्राओं की संख्या 19.44 फीसदी है।
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इन मेधावियों को मिलेंगे ये पदक
अंकित प्रकाश सिंह (आठ पदक): डॉ. गंगानाथ झा, रिपन, चंद्रशेखर शास्त्री वैकुंठनाथ शास्त्री, म.म. नारायण शास्त्री खिस्ते, संसंवि स्वर्ण पदक, महामंडलेश्वर पवहारी श्री स्वामी बालकृष्ण यति जी महाराज, पं. महादेव उपाध्याय, विमल कुमार पोद्दार स्वर्ण पदक (आठ पदक)।
दीपक कुमार तिवारी (चार पदक): संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, डॉ. निगम शर्मा, महामंडलेश्वर पवहारी श्री स्वामी बालकृष्णयति महाराज व सेठ जानकी प्रसाद पोद्दार स्वर्ण पदक।
अजय कुमार (तीन पदक) : गंगामणि, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और श्रीरामजी लाल शास्त्री स्वर्ण पदक।
मठम मणिकंठ स्वामी (तीन पदक) स्वामी माधवाचार्य, अन्नदा प्रसाद मुखर्जी, संसंवि स्वर्ण पदक। विनीत कुमार तिवारी (तीन पदक) संसंवि, पं. ब्रह्मदत्त द्विवेदी और महामंडलेश्वर पवहारी श्री स्वामी बालकृष्ण यति महाराज स्वर्ण पदक।
खुशबू उपाध्याय (तीन पदक) : ऋषिकेश स्वर्ण पदक, संसंवि और डॉ. इंदुनाथ शर्मा स्वर्ण पदक सन्नी कुमार, बलजीत कुमार पांडेय, श्रवण कुमार, अनन्या (दो पदक) बसंतराज सुवेदी, सत्यम पांडेय, अवनीश पांडेय, वरुण शर्मा, अनुराग शुक्ल, श्रेया चौबे, विशाल बंजाड़े, विजेंद्र सिंह, देवात्मा दुबे, ध्रुव सापकोटा, अरविंद कुमार तिवारी, पीयूष कुमार गौतम, आशुतोषपति त्रिपाठी, नवनीत त्रिपाठी, आशांक मिश्र, गणेश गिरी, कोसल्ल, अभिषेक कुमार मिश्रा, प्रतीक राय, मोहनी श्रीवास्तव, साक्षी शुक्ला, दर्शना शुक्ला, वशिष्ठ त्रिपाठी, कुशाग्र दुवे, सीमा साहनी और भाष्कर मिश्र (एक-एक पदक)