बाबा रामदेव का विरोध: संतों ने कहा- साधु नहीं व्यापारी हैं रामदेव, शिक्षा बोर्ड की कमान सौंपे जाने से आपत्ति
अखिल भारतीय संत समिति की ओर से आयोजित बैठक में भाग लेने पहुंचे संतों ने भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन कर उसके संचालन का जिम्मा बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को सौंपने पर आपत्ति जताई।
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अखिल भारतीय संत समिति की ओर से काशी में आयोजित बैठक में भाग लेने पहुंचे देशभर के संतों ने योगगुरु रामदेव का विरोध किया। भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन करके उसके संचालन का जिम्मा बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को सौंपने पर आपत्ति जताई।
महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती ने कहा कि बाबा रामदेव लाला रामदेव हैं। उनकी मान्यता साधु या संत के रूप में नहीं बल्कि व्यापारी के रूप में है। उनके हाथों में भारतीय शिक्षा बोर्ड की कमान संतों को स्वीकार नहीं है।
वहीं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरी ने कहा कि बाबा रामदेव को भारतीय शिक्षा बोर्ड की कमान सौंपना गलत है। उन्होंने कहा कि रामदेव वेदांगों के विरोधी हैं। मांग किया कि संतों के मार्गदर्शन में ही भारतीय शिक्षा बोर्ड चले। बोर्ड में देश के बड़े शिक्षाविदों और वैद्विक विद्वानों को भी प्रतिनिधित्व मिले।
एक समान पाठ्यक्रम-एक समान शिक्षा प्रणाली की मांग
इसके साथ ही देश भर में एक समान पाठ्यक्रम-एक समान शिक्षा प्रणाली को लागू करना चाहिए। शिक्षा में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। बता दें कि केंद्र सरकार ने आजादी के 75 साल पूरे होने पर भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन करके उसके संचालन का जिम्मा बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को सौंपा है।