बांग्लादेश मामले पर एकजुट हुआ संत समाज : बोलें- हिन्दुओं पर अत्याचार नहीं सहेंगे, भारत सरकार से की ये मांग
Varanasi News: बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर काशी का संत समाज एकजुट हो गया है। संतों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। संतों ने कहा है कि इसके लिए भारत देश का पूरा सनातन समाज उनके साथ खड़ा है।
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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और हिंसा के विरोध में गुरुवार को काशी के संतों ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने भारत सरकार से हिंदुओं को बचाने की अपील की।
काशी के सामने घाट स्थित श्री वैष्णव मैथ के पीठासीन अधिकारी जगदगुरु स्वामी संपतकुमाराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए हिंदुओं का एकजुट होना जरूरी है। इससे पहले हिंदू जन की संरक्षा होनी अति आवश्यकता है। बांग्लादेश में हसीना सरकार के तख्तापलट हो जाने के बाद वहां की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। इस पर भारत सरकार को गंभीर कदम भी उठाने चाहिए।
इसी क्रम में लक्ष्मीनारायण देवस्थान ट्रस्ट रामानुजकोट के अध्यक्ष स्वामी रामप्रपन्नाचार्य ने कहा कि बांग्लादेश के मामले में धर्म और राजनीति नहीं मानवता की जरूरत है। भारतवासियों का दिल काफी विशाल है। ऐसे में भारत सरकार को चाहिए कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सख्त कदम उठावे। भारत का हर सनातनी उनके साथ खड़ा है।
राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
अखिल भारतीय सन्त समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ देश का पूरा सनातन समाज आक्रोशित है।
राष्ट्रपति के नाम से संबोधित ज्ञापन को पुलिस उपायुक्त गौरव वंशवाल को सौंपते हुए जीतेन्द्रानन्द ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार, हिंसा, आगजनी और लूटपाट से काशी का संपूर्ण हिंदू समाज आक्रोशित है। अपने इसी आक्रोश को व्यक्त करने के लिए आज हिंदू समाज सड़कों पर आकर बांग्लादेश के हिंदुओं, सिखों और बौद्ध, जैन धर्म के लोगों की सुरक्षा की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने पूरे विश्व में धर्म और शांति का संदेश दिया है, हिंदू समाज ने कभी भी अराजकता नहीं फैलाई है लेकिन आज बांग्लादेश में हिंदुओं की सामूहिक हत्या की जा रही है। उनके घर जलाए जा रहे हैं। हिंदुओं की बहू बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है। कहा कि हम हिंदू समाज के लोग भारत सरकार से यह निवेदन और मांग करते हैं कि भारत सरकार स्वयं हस्तक्षेप करे अथवा संयुक्त राष्ट्रसंघ के माध्यम से स्थिति पर नियंत्रण बनाने के लिए हर मुमकिन प्रयास करे।