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महालक्ष्मी की पूजा के साथ आज से शुरू होगा सगड़ा पर्व
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सिंधी समाज के घरों में मंगलवार को सगड़ा पर्व की शुरुआत होगी। इसमें 16 धागों में 16 गांठें बांधी जाएंगी। मंगलवार को सिंधी महिलाएं मां लक्ष्मी की उपासना कर मीठे पकवानों का भोग लगाती हैं। इसके बाद विधिपूर्वक कथा सुनकर मनचाही मन्नत मांग कर 16 धागों में 16 गांठें बांधती हैं। समाज के लोग इस दिन धन, ऐश्वर्य व सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
महमूरगंज निवासी संगीता बडानी ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से महालक्ष्मी पर्व की शुरुआत होती है। यह पर्व 16 दिनों तक चलता है। महालक्ष्मी व्रत के दिन राधाष्टमी भी मनाई जाती है। मान्यता है कि महालक्ष्मी का व्रत करने से दरिद्रता दूर होती है। भक्तों का घर धन दौलत और वैभव से परिपूर्ण हो जाता है।
परिवार और समाज से जुड़े होने का प्रतीक है पर्व
संकटमोचन निवासी ज्योति मंदना बताती हैं कि सगड़ा पर्व में 16 कच्चे धागों से 16 गांठें लगाकर उसे हल्दी में डुबोकर कलाई में बांधा जाता है। यह एक कच्चे धागे से हमारा परिवार और समाज जुड़ा होने का प्रतीक है। इसमें कुंवारे लड़के और लड़कियों के लिए जोड़े में 16 धागों में गांठें लगाई जाती हैं।
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सुख-समृद्धि और वैभव के लिए प्रार्थना
सिगरा निवासी रेनू अजवानी बताती हैं महालक्ष्मी के पर्व सगड़ा में सुख-समृद्धि और वैभव की कामना की जाती है। 16वें दिन मां लक्ष्मी की पूजा के बाद परिवार के साथ दीप जलाकर मीठी रोटी, सतपुड़ा में सगड़ा को लपेटकर महालक्ष्मी की कथा सुनाते हैं।
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महमूरगंज निवासी संगीता बडानी ने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से महालक्ष्मी पर्व की शुरुआत होती है। यह पर्व 16 दिनों तक चलता है। महालक्ष्मी व्रत के दिन राधाष्टमी भी मनाई जाती है। मान्यता है कि महालक्ष्मी का व्रत करने से दरिद्रता दूर होती है। भक्तों का घर धन दौलत और वैभव से परिपूर्ण हो जाता है।
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परिवार और समाज से जुड़े होने का प्रतीक है पर्व
संकटमोचन निवासी ज्योति मंदना बताती हैं कि सगड़ा पर्व में 16 कच्चे धागों से 16 गांठें लगाकर उसे हल्दी में डुबोकर कलाई में बांधा जाता है। यह एक कच्चे धागे से हमारा परिवार और समाज जुड़ा होने का प्रतीक है। इसमें कुंवारे लड़के और लड़कियों के लिए जोड़े में 16 धागों में गांठें लगाई जाती हैं।
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सुख-समृद्धि और वैभव के लिए प्रार्थना
सिगरा निवासी रेनू अजवानी बताती हैं महालक्ष्मी के पर्व सगड़ा में सुख-समृद्धि और वैभव की कामना की जाती है। 16वें दिन मां लक्ष्मी की पूजा के बाद परिवार के साथ दीप जलाकर मीठी रोटी, सतपुड़ा में सगड़ा को लपेटकर महालक्ष्मी की कथा सुनाते हैं।