Russia-Ukraine War: पहली बार इंजन बनाने में पीछे हुआ बनारस रेल इंजन कारखाना, 34 दिन में कैसे पूरा होगा लक्ष्य
चालू वित्तीय वर्ष (2022-23) खत्म होने में 34 दिन ही बचे हैं, लेकिन बरेका निर्धारित लक्ष्य की अपेक्षा 138 रेल इंजन अभी तक नहीं बना पाया है। कम अवधि में इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण है।
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रूस और यूक्रेन युद्ध का असर बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के उत्पादन पर पड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक चिप की आपूर्ति ठप हो गई है। इससे विद्युत और डीजल इंजन का निर्माण प्रभावित है। ऐसा पहली बार हुआ, जब बरेका इंजन उत्पादन के लक्ष्य से काफी दूर है। इसे लेकर अधिकारी भी चिंतित हैं।
उनका कहना है कि लक्ष्य हासिल नहीं हुआ तो साख प्रभावित होगी। अगले वित्तीय वर्ष का लक्ष्य हासिल करना कठिन हो जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष (2022-23) खत्म होने में 34 दिन ही बचे हैं, लेकिन बरेका निर्धारित लक्ष्य की अपेक्षा 138 रेल इंजन अभी तक नहीं बना पाया है। कम अवधि में इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण है।
अब तक बरेका का रिकॉर्ड शानदार
बताया जा रहा है कि विद्युत या फिर डीजल इंजन निर्माण का लक्ष्य रेलवे बोर्ड से मिलता है। इसे एक अप्रैल से 31 मार्च के बीच पूरा करना होता है। अब तक बरेका का रिकॉर्ड शानदार रहा है। यह पहला मौका है, जब लक्ष्य हासिल करने की चुनौती सामने खड़ी है।
युद्ध और लंबा खिंचा तो संकट गहराएगा
दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक चिप का उत्पादन भारत में नहीं होता है। इसे यूरोप के अलग-अलग देशों से मंगाया जाता है। जो कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक चिप की आपूर्ति करती हैं, उनके संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। सब कह रहे हैं कि चिप नहीं मिल पा रहा। इसकी मुख्य वजह रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को बता रहे हैं। दोनों देशों के बीच एक वर्ष से ज्यादा समय से युद्ध चल रहा है। युद्ध और लंबा खिंचा तो संकट गहराएगा। इलेक्ट्रॉनिक चिप की आपूर्ति और प्रभावित होगी।
जल्द ही चिप मंगवाए जाएंगे
- वर्ष इंजन बनाने लक्ष्य हासिल किया
- 2019-20 310 310
- 2020-21 285 285
- 2021-2022 367 367
- 2022-23 450 312 (24 फरवरी 2023 तक)