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Varanasi: अयोध्या आंदोलन में मरने वालों के मोक्ष के लिए होगा बाबा विश्वनाथ का रुद्राभिषेक, सनातन पर होगी चर्चा

Sat, 21 Oct 2023 04:13 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 21 Oct 2023 04:13 PM IST
सार

देश के 400 जिलों से 127 संप्रदायों के साधु-सतों की चार दिनों तक काशी में जुटान होगी। संस्कृति संसद के माध्यम से पूरे विश्व को सनातन रक्षा का संदेश दिया जाएगा। श्रीराम मंदिर आंदोलन में मरने वालों की मोक्ष की कामना से श्री काशी विश्वनाथ का रुद्राभिषेक होगा। 

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Rudrabhishek of Baba Vishwanath will be held for salvation of those who died in Ayodhya movement
काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीराम मंदिर आंदोलन में मरने वालों की मोक्ष की कामना से श्री काशी विश्वनाथ का रुद्राभिषेक होगा। अयोध्या में बलिदान हुए ज्ञात-अज्ञात लोगों की आत्मा को मोक्ष मिले और इसके साथ राष्ट्र की एकता के संकल्प के साथ देश भर में 250 महामंडलेश्वर काशीपुराधिपति का रुद्राभिषेक करेंगे। इस दौरान सनातन सापेक्ष सरकार की अगले आम चुनावों में वापसी की भी कामना की जाएगी।

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शुक्रवार को अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती और गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री गोविंद शर्मा ने ये जानकारी पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए संस्कृति संसद का आयोजन किया जा रहा है। सनातन उन्मूलन की चुनौती देने वालों को यह संसद समुचित उत्तर देगी।

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संस्कृति संसद एक बेहतर मंच होगा

देश के 400 जिलों से 127 संप्रदायों के साधु-सतों की चार दिनों तक काशी में जुटान होगी। संस्कृति संसद के माध्यम से पूरे विश्व को सनातन रक्षा का संदेश दिया जाएगा। गोविंद शर्मा ने बताया कि पद्म पुरस्कारों से सम्मानित 14 विद्वान और काशी के विशिष्टजनों को आयोजन समिति का संरक्षक बनाया गया है।

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Rudrabhishek of Baba Vishwanath will be held for salvation of those who died in Ayodhya movement
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला

काशी के सभी समाज और सामाजिक संगठनों को कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है। काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय पांडेय ने कहा कि भारत के विश्व गुरु होने का कारण यहां की संस्कृति ही रही है। विश्वपटल पर सनातन के संदेश को पहुंचाने के लिए संस्कृति संसद एक बेहतर मंच होगा। आयोजन समिति के सचिव सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि आजकल के युवाओं को विभिन्न प्रकार से भ्रमित किया जा रहा है। युवाओं को संस्कृति संसद के माध्यम से धर्म की सही जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसलिए अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

महारुद्राभिषेक के साथ होगी संस्कृति संसद की शुरुआत

महारुद्राभिषेक के साथ चार दिवसीय संस्कृति संसद की शुरुआत होगी। दो से पांच नवंबर तक अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्रीकाशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में गंगा महासभा की ओर से संस्कृति संसद का आयोजन किया जा रहा है। पहले दिन दो नवंबर को महारुद्राभिषेक, तीन नवंबर को धर्म विमर्श, चार नवंबर को मातृ विमर्श और पांच नवंबर को युवा विमर्श का आयोजन होगा।

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