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1905 के बाद से बढ़ी हिंदू-मुस्लिमों की दूरी, रहना होगा सतर्कः संघ प्रमुख
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 21 Feb 2018 10:53 AM IST
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संघ प्रमुख
- फोटो : अमर उजाला
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संघ प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि दुनिया में भारत की बढ़ रही प्रतिष्ठा एवं विकास से कुछ शक्तियां संतुष्ट नहीं हैं। ऐसी शक्तियों से जुड़े लोग एतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर सामाजिक विद्वेष फैला रहे हैं। 1857 से पहले भारत में हिंदू-मुस्लिम सौहार्द था।
अंग्रेजों ने 1905 में मुस्लिम लीग बनवाकर धार्मिक कट्टरता फैलाने की शुरुआत की, कुछ लोग इसे अभी जारी रखे हुए हैं। हमें याद रखना होगा कि हम सदियों से एक थे और आज भी एक हैं। हमें समाज में परस्पर एकता बढ़ाने के साथ-साथ विद्वेष फैलाने वालों से सावधान करने का कार्य निरंतर करना है।
संघ प्रमुख मंगलवार को बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में समन्वय बैठक के बाद समाजसेवियों से मुलाकात के दौरान उनसे बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, भारत में खराब कार्यों की तुलना में अच्छे कार्य बीस गुना हो रहे हैं।
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बावजूद इसके अच्छे कार्यों का प्रचार नहीं हो रहा है। इसका कारण भी बताया। बोले, समाजसेवी बिना बताए निरंतर कार्य करते हैं। हमारा अनुभव है कि उनका ध्येय ही परोपकर है। वे सेवा को न तो भुनाते हैं और न ही उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा होती है। इसलिए उनके सेवा कार्यों को प्रचार नहीं मिल पाता है। फिर भी ऐसा करने वालों की संख्या बढ़नी चाहिए।
सेवा कार्य संवेदना एवं स्वप्रेरणा से होता है। हमें अपने कार्य एवं परिवार चलाने की जरूरत के बाद धन का उपयोग समाज सेवा में करना चाहिए। जिनकी सेवा करें, उनमें भाव पैदा करें कि वह भी सेवा का कार्य करें।
समाज हमारा भगवान एवं पिता है। कहा, अच्छा समाज बनाने के लिए समाज सेवी और संघ कार्यकर्ता नित्य संपर्क रहे और एक-दूसरे के पूरक बनें। हम समाज में अच्छा कार्य करने वालों की खोज में हैं।
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अंग्रेजों ने 1905 में मुस्लिम लीग बनवाकर धार्मिक कट्टरता फैलाने की शुरुआत की, कुछ लोग इसे अभी जारी रखे हुए हैं। हमें याद रखना होगा कि हम सदियों से एक थे और आज भी एक हैं। हमें समाज में परस्पर एकता बढ़ाने के साथ-साथ विद्वेष फैलाने वालों से सावधान करने का कार्य निरंतर करना है।
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संघ प्रमुख मंगलवार को बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में समन्वय बैठक के बाद समाजसेवियों से मुलाकात के दौरान उनसे बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, भारत में खराब कार्यों की तुलना में अच्छे कार्य बीस गुना हो रहे हैं।
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बावजूद इसके अच्छे कार्यों का प्रचार नहीं हो रहा है। इसका कारण भी बताया। बोले, समाजसेवी बिना बताए निरंतर कार्य करते हैं। हमारा अनुभव है कि उनका ध्येय ही परोपकर है। वे सेवा को न तो भुनाते हैं और न ही उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा होती है। इसलिए उनके सेवा कार्यों को प्रचार नहीं मिल पाता है। फिर भी ऐसा करने वालों की संख्या बढ़नी चाहिए।
सेवा कार्य संवेदना एवं स्वप्रेरणा से होता है। हमें अपने कार्य एवं परिवार चलाने की जरूरत के बाद धन का उपयोग समाज सेवा में करना चाहिए। जिनकी सेवा करें, उनमें भाव पैदा करें कि वह भी सेवा का कार्य करें।
समाज हमारा भगवान एवं पिता है। कहा, अच्छा समाज बनाने के लिए समाज सेवी और संघ कार्यकर्ता नित्य संपर्क रहे और एक-दूसरे के पूरक बनें। हम समाज में अच्छा कार्य करने वालों की खोज में हैं।
हिंदू संस्कृति के लिए बेहतर काम करें
संघ प्रमुख ने अनुशासन का पाठ पढ़ाया
- फोटो : अमर उजाला
बैठक में शामिल अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी ने कहा कि संघ प्रमुख ने सेवा प्रकल्पों के बारे में बताया। भारतीय हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए काम करने सेवा प्रकल्पों को बेहतर काम करने के लिए कहा। संघ प्रमुख से मुलाकात करने वालों में भवानी नंदन यति, भिखारी बाबा, शारदा पांडेय और अशोक यादव आदि शामिल रहे।
इन सेवा क्षेत्रों के लोग रहे शामिल
बैठक में काशी प्रांत में ग्रामीण शिक्षा, गंगा स्वच्छता, जैविक कृषि, नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर, वनवासी सेवा, जल संरक्षण, गोशाला, विकास एवं गोसेवा, गरीबों को सस्ता भोजन, नि:शुल्क न्याय सेवा, नि:शुल्क कंप्यूटर शिक्षा, डेयरी विकास, गरीब बच्चियों की शादी, विकलांग सहायता, आपदा पीड़ित सहायता, जड़ी-बूटी कृषि, रक्तदान, गोमती स्वच्छता, गरीबों को नि:शुल्क तीर्थ यात्रा, नशा मुक्ति, महिला रक्षा और अनाथ बच्चों की सेवा आदि के क्षेत्र में कार्य करने वाले समाज सेवी संगठनों के प्रबुद्धजन एवं संत उपस्थित थे।