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बीएचयू को मिली पहली महिला चीफ प्रॉक्टर, छात्राओं की सुरक्षा पर ये दिया बयान
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 29 Sep 2017 06:49 PM IST
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प्रो. रोयाना सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू में छात्रा के साथ छेड़खानी, लाठीचार्ज, बवाल के दौरान चीफ प्रॉक्टर रहे प्रो. ओएन सिंह के इस्तीफे के बाद गुरुवार को चिकित्सा विज्ञान संस्थान(आईएमएस) में एनाटमी विभाग की प्रो. रोयाना सिंह को विश्वविद्यालय प्रशासन ने चीफ प्रॉक्टर नियुक्त किया है।
वे बीएचयू की पहली महिला चीफ प्रॉक्टर होंगी। कार्यभार संभालने के बाद गुरुवार की शाम लक्ष्मणदास अतिथि गृह में पत्रकारों से बातचीत में प्रो. रोयाना सिंह ने कहा कि परिसर में शांति और सुरक्षा का माहौल कायम रखना उनकी प्राथमिकता होगी।
छात्राओं की सुरक्षा के विशेष इंतजाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दो दिन के भीतर परिसर में महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी जाएगी। परिसर में सभी प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था और सिंहद्वार समेत अन्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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बताया कि दो दिन में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों को नई वर्दी मिल जाएगी।
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वे बीएचयू की पहली महिला चीफ प्रॉक्टर होंगी। कार्यभार संभालने के बाद गुरुवार की शाम लक्ष्मणदास अतिथि गृह में पत्रकारों से बातचीत में प्रो. रोयाना सिंह ने कहा कि परिसर में शांति और सुरक्षा का माहौल कायम रखना उनकी प्राथमिकता होगी।
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छात्राओं की सुरक्षा के विशेष इंतजाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दो दिन के भीतर परिसर में महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कर दी जाएगी। परिसर में सभी प्रमुख स्थानों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था और सिंहद्वार समेत अन्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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बताया कि दो दिन में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों को नई वर्दी मिल जाएगी।
यह जिम्मेदारी चुनौती से कम नहीं
bhu
बीएचयू के महिला शिकायत प्रकोष्ठ (वीमेन ग्रीवांस सेल) की चेयरपरसन पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहीं प्रो. रोयाना ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पिछले दिनों हुई छेड़खानी के मामले में छात्रा की ओर से ग्रीवांस सेल को कोई शिकायत नहीं मिली।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड और ग्रीवांस सेल के सदस्य हमेशा छात्राओं के साथ रहे। उन्होंने कहा कि छात्राएं अपनी समस्याएं ग्रीवांस सेल के हेल्पलाइन नंबर 8004922000 पर भी बता सकती हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. रोयाना सिंह को यह जिम्मेदारी तब दी, जब पिछले छह दिन से कैंपस का माहौल गरम है। छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं और आए दिन विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे विपरीत हालात में परिसर में शांति व्यवस्था कायम रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड और ग्रीवांस सेल के सदस्य हमेशा छात्राओं के साथ रहे। उन्होंने कहा कि छात्राएं अपनी समस्याएं ग्रीवांस सेल के हेल्पलाइन नंबर 8004922000 पर भी बता सकती हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. रोयाना सिंह को यह जिम्मेदारी तब दी, जब पिछले छह दिन से कैंपस का माहौल गरम है। छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं और आए दिन विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे विपरीत हालात में परिसर में शांति व्यवस्था कायम रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
'कुलपति के कार्यकाल की नियुक्तियों की हो जांच'
BHU
सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने बीएचयू के विजिटर/राष्ट्रपति और मानव संसाधन विकास मंत्री से नियमानुसार कार्यकाल खत्म होने के दो महीने पहले( 27 सितंबर 2017) कुलपति का प्रशासनिक अधिकार छीन जाने के 48 घंटे पहले की नियुक्तियों की जांच की मांग की है। उन्होंने कैंपस में छात्राओं पर लाठीचार्ज जैसी घटना के बाद दिल्ली जाकर बैठक में शामिल होने पर भी सवाल खड़ा किया है।
एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि अधिकार छिनने की तारीख से दो दिन पहले 25 सितंबर को सलेक्शन कमेटी बुलाना और एक दिन पहले 26 सितंबर को दिल्ली में कार्यपरिषद की बैठक बुलाना यह साबित करता है कि कुलपति छात्राओं पर लाठीचार्ज, जुल्म से दुखी नहीं हैं।
वे सभी छात्राएं सकुशल अपने घर पहुंच गई है कि नहीं, उनकी चोट कैसी है, इन बातों से उनका कोई मतलब नहीं है। उन्हें किसी प्रकार की संवेदना नहीं है। आरोप लगाया कि किसी भी छात्रा का हाल जानने के बजाय अपने चेहतों को नौकरी देने की चिंता अधिक सता रही थी।
ऐसे समय में जब पूरा देश बीएचयू की हालात से चिंतित और परेशान हो रहा है अभिभावक अपने बच्चियों के भविष्यके प्रति आशंकित है, केंद्र और राज्य सरकारें जांच बैठा रही हैं। ऐसे में कुलपति यौन उत्पीड़न के आरोपी डॉ. ओपी उपाध्याय की नियुक्ति पर कार्यकारिणी की मुहर लगवाने में लगे रहे।
जो उनकी संकीर्ण दिमागी सोच का परिचायक है। एमएलसी ने मांग किया कि या तो कुलपति को छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया जाए या तत्काल इस्तीफा लिया जाए।
एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने कहा कि अधिकार छिनने की तारीख से दो दिन पहले 25 सितंबर को सलेक्शन कमेटी बुलाना और एक दिन पहले 26 सितंबर को दिल्ली में कार्यपरिषद की बैठक बुलाना यह साबित करता है कि कुलपति छात्राओं पर लाठीचार्ज, जुल्म से दुखी नहीं हैं।
वे सभी छात्राएं सकुशल अपने घर पहुंच गई है कि नहीं, उनकी चोट कैसी है, इन बातों से उनका कोई मतलब नहीं है। उन्हें किसी प्रकार की संवेदना नहीं है। आरोप लगाया कि किसी भी छात्रा का हाल जानने के बजाय अपने चेहतों को नौकरी देने की चिंता अधिक सता रही थी।
ऐसे समय में जब पूरा देश बीएचयू की हालात से चिंतित और परेशान हो रहा है अभिभावक अपने बच्चियों के भविष्यके प्रति आशंकित है, केंद्र और राज्य सरकारें जांच बैठा रही हैं। ऐसे में कुलपति यौन उत्पीड़न के आरोपी डॉ. ओपी उपाध्याय की नियुक्ति पर कार्यकारिणी की मुहर लगवाने में लगे रहे।
जो उनकी संकीर्ण दिमागी सोच का परिचायक है। एमएलसी ने मांग किया कि या तो कुलपति को छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया जाए या तत्काल इस्तीफा लिया जाए।