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Ropeway Varanasi: एक साल बाद भी अफसरों की खींचतान में लटका रोपवे का बिजली कनेक्शन, वजह जान लें

Wed, 20 Nov 2024 02:50 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Wed, 20 Nov 2024 02:50 PM IST
सार

रोपवे के लिए बिजली कनेक्शन आवेदन के एक साल बाद भी नहीं मिल सका है। इसके लिए कार्यदायी संस्था ने 9 सितंबर 2023 को कनेक्शन के लिए आवेदन दिया था। उधर, बिजली निगम ने कहा कि जगह नहीं मिल रही इसलिए कनेक्शन नहीं दिया गया। 

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Ropeway Varanasi power connection stuck due to tussle between officers after one year
दशाश्वमेध प्लाजा पर रखा रोपवे का गंडोला। - फोटो : संवाद

विस्तार

रोपवे का काम कराने वाली कार्यदायी संस्था ने बिजली कनेक्शन के लिए सितंबर 2023 में आवेदन किया था, लेकिन एक साल बाद भी बिजली निगम कनेक्शन नहीं दे सका। कार्यदायी संस्था का कहना है कि कनेक्शन न मिलने की स्थिति में रोपवे का सुरक्षित संचालन मुश्किल होगा। वहीं, बिजली निगम का कहना है कि उन्हें अब तक जमीन नहीं मिल पाई, इसलिए कनेक्शन नहीं दे सके। रोपवे के लिए एक उपकेंद्र बनाना पड़ेगा। वीडीए ने अब तक जमीन नहीं ली है। उपकेंद्र बनना जल्द बनना नहीं शुरू हुआ तो रोपवे बनने के बाद भी नहीं चल पाएगा। क्योंकि इसे चलाने के लिए निर्बाध बिजली की जरूरत पड़ेगी।

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रोपवे के स्टेशन तैयार हो रहे हैं। सभी पिलर खड़े हो गए हैं। अगले सप्ताह से इन पर पुलिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। दिसंबर में ट्रायल रन होगा। लेकिन, अभी तक बिजली कनेक्शन की दिक्कत बरकरार है। कार्यदायी संस्था नेशनल हाईवे लाजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड(एनएचएलएमएल) ने सितंबर 2023 में ही बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन कर दिया था। इसके तहत 33/11 केवी का एक सब स्टेशन बनाने की जरूरत है।

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बिजली निगम ने काशी विद्यापीठ स्थित भारत माता मंदिर परिसर में उपकेंद्र बनाने का फैसला किया तो छात्रों ने विरोध कर दिया। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। बिजली निगम से जुड़े एक अफसर ने कहा कि जगह तय हुई तो उपकेंद्र बनने में करीब छह महीने लग जाएंगे, क्योंकि उपकेंद्र में 5-5 एमवीए के दो पावर ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इसके जरिये रोपवे को बिजली दी जाएगी।

निर्बाध बिजली नहीं मिली तो सुरक्षा को खतरा
रोपवे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि निर्बाध बिजली की जरूरत है। सामान्य कनेक्शन में ट्रिपिंग होगी। इससे रोपवे का संचालन प्रभावित होगा। गंडोला केबिल पर चलेगा। निर्बाध बिजली मिलेगी तो मूवमेंट लगातार होता रहेगा और गंडोला चलता रहेगा। यदि ट्रिपिंग हुई तो किसी एक प्वाइंट पर दबाव पड़ेगा और इससे कंडक्टर प्रभावित होगा। केबिल पर कहीं एक जगह दबाव आएगा। बार-बार दबाव आया तो यह सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं होगा। इसीलिए जरूरी है कि निर्बाध बिजली मिले, जिसमें कहीं कोई ट्रिपिंग न हो।

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अधिकारी ने कही ये बात

एक साल पहले ही बिजली निगम को उपकेंद्र बनाने के लिए रथयात्रा, भारत माता मंदिर समेत चार जगहों के विकल्प दिए गए थे। तकनीकी रूप से बिजली निगम ने भारत माता मंदिर वाले स्थान को चुना। अब बनाना बिजली निगम को ही है। तकनीकी रूप से जगह वही बता सकते हैं। हम उसमें तो कुछ नहीं कर सकते हैं। कहीं कोई विरोध है तो बातचीत के जरिये रास्ता निकाला जाएगा। जल्द ही जगह फाइनल कर दी जाएगी। -कौशल राज शर्मा, कमिश्नर

जमीन और जगह को लेकर फैसला वीडीए को करना है। बिजली निगम को जगह मिल जाएगी तो आगे का काम शुरू हो जाएगा। -एके वर्मा, अधीक्षण अभियंता

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