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कागजों में भर रहे गड्ढा, सड़कों पर भरा है पानी
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वाराणसी। शहर की ज्यादातर सड़कें बारिश में टूट गई है। इसका सबसे अहम कारण है कि सड़क निर्माण में कागजी खेल ज्यादा है। डामर से लेेकर गिट्टी आदि में खेल किया जा रहा है। सुसुवाही से करौंदी और पांडेपुर से आशापुर मार्ग पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो गए हैं। साल भर पहले दस-दस लाख रुपये की लागत से बनी सड़कें खस्ताहाल हो गई हैं। लोक निर्माण विभाग निर्माण के समय मानक का ध्यान नहीं रखते हैं और टूटने पर पैच वर्क के नाम पर उस पर लीपापोती करते हैं। शहर की ही कई सड़कें ऐसी हो गई हैं, जिनपर जरा सी चूक होते ही राहगीर गड्ढे में फंस जाते हैं। इन्हीं सड़कों से होकर अधिकारी रोज गुजरते हैं। इसके बावजूद इन सड़कों की खस्ताहाल स्थिति को देखने वाला कोई नहीं है। इससे शहरवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पांडेयपुर से आशापुर जाने वाली सड़क गड्ढे में तब्दील हो गई है। सुसुवाही से करौंदी मार्ग पर भी जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। सड़क के बीचोबीच बने गड्ढे लोगों के लिए मुसीबत हो गए हैं। बदहाल सड़कों को ठीक कराने की दिशा में प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।
बोर्ड लगाने में भी लापरवाही
किसी भी सड़क पर बोर्ड नहीं लगे हैं। कौन विभाग सड़क बना रहा है, कितने की सड़क है, कहां तक बननी है, ठेकेदार व अभियंता कौन हैं। उनके मोबाइल नंबर इन बोर्ड में होने चाहिए। शहर की किसी भी सड़क पर कोई बोर्ड नहीं लगा है। अगर कहीं लगे भी हैं तो अभियंता का मोबाइल नंबर व ठेकेदार का नाम तक नहीं लिखा है।
50 टन की सड़क भी एक साल नहीं चल पा रही है। अमूमन शहर की प्रमुख सड़कें 40 से 50 टन के बीच बनाई जाती हैं। बावजूद उसके सड़क एक साल भी नहीं चल पा रही हैं, जबकि नियमानुसार कम से कम दो साल तक सड़कों को बेहतर होना चाहिए।
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हमारी सड़कों को ज्यादातर दूसरी कार्यदायी एजेंसियां खराब कर रही हैं। कभी लीकेज के चलते तो कभी अन्य कारणों से सड़क के नीचे की मिट्टी बह जाती है। इसके चलते सड़क बैठ जाती है। सड़कों को गड्ढामुक्त कराया जा रहा है। बारिश बाद पक्का काम होगा। - एसके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी
सड़क बेहद खराब होने से आवागमन में काफी परेशानी हो रही है। गाड़ियां खराब हो जा रही हैं। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। शिकायत के बाद भी सड़कें नहीं बन रही हैं। -अरविंद कुमार, निवासी बड़ा लालपुर पांडेयपुर
शहर की सड़कों पर गड्ढे बने हैं और प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। शहर की सड़क का हाल तो गांवों से भी बदतर है। गुजरने में जरा सी चूक हुई तो दुर्घटना तय है। - अजितेश सिंह, निवासी पुलिस लाइन कालोनी
बरसात से पूर्व यदि इन सड़कों को ठीक कराया गया होता तो दुर्घटनाओं पर लगाम लगा सकते थे। हर साल बारिश आते ही सड़क खराब हो जाती है। -मनोज कुमार, निवासी पुराना पुल
सड़क को बेहतर ढंग से बनाया जाए। जैसे हाईवे की सड़क बनती हैं, तो सड़क लंबी चले। लेकिन यहां पर केवल काम चलाऊं सड़क बनती है। इसके चलते सड़कें जल्दी खराब होती हैं। -ओम जायसवाल चंद्रा चौराहा
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बोर्ड लगाने में भी लापरवाही
किसी भी सड़क पर बोर्ड नहीं लगे हैं। कौन विभाग सड़क बना रहा है, कितने की सड़क है, कहां तक बननी है, ठेकेदार व अभियंता कौन हैं। उनके मोबाइल नंबर इन बोर्ड में होने चाहिए। शहर की किसी भी सड़क पर कोई बोर्ड नहीं लगा है। अगर कहीं लगे भी हैं तो अभियंता का मोबाइल नंबर व ठेकेदार का नाम तक नहीं लिखा है।
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50 टन की सड़क भी एक साल नहीं चल पा रही है। अमूमन शहर की प्रमुख सड़कें 40 से 50 टन के बीच बनाई जाती हैं। बावजूद उसके सड़क एक साल भी नहीं चल पा रही हैं, जबकि नियमानुसार कम से कम दो साल तक सड़कों को बेहतर होना चाहिए।
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हमारी सड़कों को ज्यादातर दूसरी कार्यदायी एजेंसियां खराब कर रही हैं। कभी लीकेज के चलते तो कभी अन्य कारणों से सड़क के नीचे की मिट्टी बह जाती है। इसके चलते सड़क बैठ जाती है। सड़कों को गड्ढामुक्त कराया जा रहा है। बारिश बाद पक्का काम होगा। - एसके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी
सड़क बेहद खराब होने से आवागमन में काफी परेशानी हो रही है। गाड़ियां खराब हो जा रही हैं। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। शिकायत के बाद भी सड़कें नहीं बन रही हैं। -अरविंद कुमार, निवासी बड़ा लालपुर पांडेयपुर
शहर की सड़कों पर गड्ढे बने हैं और प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। शहर की सड़क का हाल तो गांवों से भी बदतर है। गुजरने में जरा सी चूक हुई तो दुर्घटना तय है। - अजितेश सिंह, निवासी पुलिस लाइन कालोनी
बरसात से पूर्व यदि इन सड़कों को ठीक कराया गया होता तो दुर्घटनाओं पर लगाम लगा सकते थे। हर साल बारिश आते ही सड़क खराब हो जाती है। -मनोज कुमार, निवासी पुराना पुल
सड़क को बेहतर ढंग से बनाया जाए। जैसे हाईवे की सड़क बनती हैं, तो सड़क लंबी चले। लेकिन यहां पर केवल काम चलाऊं सड़क बनती है। इसके चलते सड़कें जल्दी खराब होती हैं। -ओम जायसवाल चंद्रा चौराहा