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राष्ट्रीय मुक्केबाजी में ऋषभ ने जीता कांस्य पदक
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राष्ट्रीय मुक्केबाजी में काशी के ऋषभ पांडेय ने कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। बंगाल और तमिलनाडु को हराकर वे सेमीफाइनल में पहुंचे, लेकिन सेमीफाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। प्रतियोगिता में जिले से पांच खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया, इसमें केवल ऋषभ ने ही पदक जीता। बाकी खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल में भी नहीं पहुंच सके।
जिला मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष शशि सिंह ने बताया कि 26 से 31 जुलाई के बीच हरियाणा में तीसरी जूनियर नेशनल मुक्केबाजी प्रतियोगिता हुई थी। जिसमें यूपी की ओर से खेलते हुए ऋषभ ने कांस्य पदक जीता। छितौना गांव के रहने वाले ऋषभ ने बताया कि संदहा स्थित सूर्या विनायक एकेडमी में कोच दिलीप सिंह के निर्देशन में अभ्यास करके पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था।
डब्ल्यूडब्ल्यूई में जाना चाहते थे ऋषभ
ओलंपिक में स्वर्ण पदक का सपना संजोए ऋषभ 10 साल की उम्र में डब्ल्यूडब्ल्यूई (वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेंमेंट) में जाना चाहते थे। चाचा ने इसके लिए खली के एकेडमी में बात भी कर ली थी। जहां एक से दो लाख रुपये फीस की मांग हुई तो डब्ल्यूडब्ल्यूई का सपना छोड़कर सिगरा स्टेडियम में क्रिकेट में प्रवेश लेने पहुंचे यहां भी क्रिकेट में प्रवेश नहीं हुआ। फिर सिगरा स्टेडियम के पूर्व कोच दिलीप सिंह की सलाह पर वर्ष 2018 में ऋषभ ने मुक्केबाजी शुरू की।
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अब एशियन चैंपियनशिप की तैयारी
बेटे के पहली बार पदक जितने पर पिता श्रवण ने कहा कि गांव के पहले नेशनल मुक्केबाज होने से काफी उत्साह है। एशियन चैंपियनशिप की तैयारी है। इसके लिए अभी कोच के पास अभ्यास के लिए भेज रहा हूं।
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जिला मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष शशि सिंह ने बताया कि 26 से 31 जुलाई के बीच हरियाणा में तीसरी जूनियर नेशनल मुक्केबाजी प्रतियोगिता हुई थी। जिसमें यूपी की ओर से खेलते हुए ऋषभ ने कांस्य पदक जीता। छितौना गांव के रहने वाले ऋषभ ने बताया कि संदहा स्थित सूर्या विनायक एकेडमी में कोच दिलीप सिंह के निर्देशन में अभ्यास करके पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था।
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डब्ल्यूडब्ल्यूई में जाना चाहते थे ऋषभ
ओलंपिक में स्वर्ण पदक का सपना संजोए ऋषभ 10 साल की उम्र में डब्ल्यूडब्ल्यूई (वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेंमेंट) में जाना चाहते थे। चाचा ने इसके लिए खली के एकेडमी में बात भी कर ली थी। जहां एक से दो लाख रुपये फीस की मांग हुई तो डब्ल्यूडब्ल्यूई का सपना छोड़कर सिगरा स्टेडियम में क्रिकेट में प्रवेश लेने पहुंचे यहां भी क्रिकेट में प्रवेश नहीं हुआ। फिर सिगरा स्टेडियम के पूर्व कोच दिलीप सिंह की सलाह पर वर्ष 2018 में ऋषभ ने मुक्केबाजी शुरू की।
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अब एशियन चैंपियनशिप की तैयारी
बेटे के पहली बार पदक जितने पर पिता श्रवण ने कहा कि गांव के पहले नेशनल मुक्केबाज होने से काफी उत्साह है। एशियन चैंपियनशिप की तैयारी है। इसके लिए अभी कोच के पास अभ्यास के लिए भेज रहा हूं।