ATS की तफ्तीश में खुलासा: बनारस में सीएए-एनआरसी बवाल के आरोपियों पर PFI की थी खास नजर
वाराणसी में तीन साल पूर्व सीएए-एनआरसी बवाल में चिह्नित 60 से अधिक सदस्यों की कुंडली एक बार फिर से खंगाली जा रही है। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया था कि बवाल को हवा देने में पीएफआई की अहम भूमिका थी।
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पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सक्रिय सदस्य आदमपुर के मोहम्मद शाहिद और जैतपुरा के रिजवान की गिरफ्तारी के बाद एटीएस उनके संपर्क में रहने वालों की कुंडली खंगाल रही है। बनारस सहित पूर्वांचल को अलर्ट मोड पर रखते हुए एटीएस की टीमें जांच कर रही हैं।
एटीएस की तफ्तीश में सामने आया कि पीएफआई की टीम उन युवकों को टारगेट कर रही है, जो तीन साल पूर्व सीएए-एनआरसी विरोध में जेल जा चुके हैं। ऐसे युवकों को प्रलोभन देकर संगठन से जोड़ रही है। मोहम्मद शाहिद और रिजवान को लेकर भी यही हुआ।
दोनों सीएए-एनआरसी के दौरान बेनिया बवाल में गिरफ्तार हुए थे और जेल भी गए थे। बनारस में 60 से अधिक युवकों को एटीएस ने चिह्नित किया है, उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है। इदर, अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन अलका की अदालत में सोमवार को दोनों आरोपियों के पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने के मामले में सुनवाई हुई है। कोर्ट के आदेश का इंतजार है।
मोहम्मद शाहिद और रिजवान के करीब रहने वाले भी दहशत में
आदमपुर के आलमबाग और जैतपुरा के कच्चीबाग में दूसरे दिन रविवार को खामोशी रही। यहां ज्यादातर भी बंद रहीं। लोग सहमे हुए हैं। कुछ युवक अपने घर से दूर भी हो गए हैं। खासकर मोहम्मद शाहिद और रिजवान के करीब रहने वाले दहशत में हैं। उधर, फर्जी फंसाए जाने का परिजनों ने आरोप लगाया।
शनिवार की भोर में कज्जाकपुरा रेलवे क्रॉसिंग के पास से एटीएस ने मोहम्मद शाहिद और रिजवान अहमद को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से पीएफआई के दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाइस बरामद हुआ था।
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