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Varanasi News: आईएमएस बीएचयू में लंबे समय तक काम कर रहे रेजिडेंट डॉक्टर
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निदेशक से मिली ऐपवा-आइसा फैक्ट फाइंडिंग टीम, मेडिकल छात्रों से बातचीत में सामने आया दर्द
सर्जरी विभाग की रेजिडेंट डॉ.सत्या के ओवरडोज लेकर जान देने के मामले में न्याय की मांग
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। आईएमएस बीएचयू के सर्जरी विभाग की जूनियर डॉक्टर (जूनियर रेजिडेंट) का तीन महीने से आईसीयू में इलाज चल रहा है। 13 मार्च की दोपहर में उसने इंसुलिन की ओवरडोज लेकर जान देने का प्रयास किया था। पिछले महीने पीएम को पत्र भेजकर यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) के सदस्य ऋषभ जायसवाल ने जूनियर डॉक्टर को न्याय दिलाने की मांग की थी। अब ऐपवा-आइसा फैक्ट फाइंडिंग टीम ने इस मामले की अपने स्तर से जांच करवाकर हकीकत का पता लगाना शुरू किया है। टीम के सदस्यों ने आईसीयू जाकर डॉ. सत्या को देखा और आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार से मिलकर घटना की जानकारी ली।
सर्जरी विभाग की जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सत्या (25) बिहार की मूल रूप से निवासी हैँ। ट्रॉमा सेंटर के पीछे स्थित कालोनी में किराए के कमरे में उसने 13 मार्च 2026 को जान देने का प्रयास किया था। इसके बाद से ही उसका इलाज सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में आईसीयू में चल रहा है। अमर उजाला ने 14 मार्च को घटना की खबर प्रकाशित की तो अगले दिन आईएमएस प्रशासन ने घटना का संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच कराने का निर्णय लिया। ऐपवा-आईसा की जांच टीम में ऐपवा प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा के साथ रोजा मैथ्यू और विभा वाही जबकि आइसा से राजेश, मिहिर और आशीष शामिल रहे। बताया कि बीएचयू में भर्ती डॉ. सत्या के पिता एसके चंदन और मां ममता से भी बातचीत कर परिस्थितियों की जानकारी ली गई। । इसके अलावा मेडिकल छात्रों से बातचीत की गई। टीम के सदस्यों ने बताया कि बातचीत में मेडिकल छात्रों ने लंबे समय तक ड्यूटी का दबाव रहने की जानकारी दी। बातचीत में निदेशक ने मेडिकल स्टूडेंट्स की लंबी ड्यूटी की बात स्वीकार भी की। लेकिन डॉ. सत्या को जॉइनिंग से घटना के दिन तक कितने घंटे ड्यूटी करनी पड़ी, इसका डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया। बताया कि डॉ. सत्या की सेहत में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए किसी उच्चस्तरीय संस्थान में इलाज कराना चाहिए। इसकी मांग भी निदेशक से की गई।
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सर्जरी विभाग की रेजिडेंट डॉ.सत्या के ओवरडोज लेकर जान देने के मामले में न्याय की मांग
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। आईएमएस बीएचयू के सर्जरी विभाग की जूनियर डॉक्टर (जूनियर रेजिडेंट) का तीन महीने से आईसीयू में इलाज चल रहा है। 13 मार्च की दोपहर में उसने इंसुलिन की ओवरडोज लेकर जान देने का प्रयास किया था। पिछले महीने पीएम को पत्र भेजकर यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) के सदस्य ऋषभ जायसवाल ने जूनियर डॉक्टर को न्याय दिलाने की मांग की थी। अब ऐपवा-आइसा फैक्ट फाइंडिंग टीम ने इस मामले की अपने स्तर से जांच करवाकर हकीकत का पता लगाना शुरू किया है। टीम के सदस्यों ने आईसीयू जाकर डॉ. सत्या को देखा और आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार से मिलकर घटना की जानकारी ली।
सर्जरी विभाग की जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सत्या (25) बिहार की मूल रूप से निवासी हैँ। ट्रॉमा सेंटर के पीछे स्थित कालोनी में किराए के कमरे में उसने 13 मार्च 2026 को जान देने का प्रयास किया था। इसके बाद से ही उसका इलाज सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में आईसीयू में चल रहा है। अमर उजाला ने 14 मार्च को घटना की खबर प्रकाशित की तो अगले दिन आईएमएस प्रशासन ने घटना का संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच कराने का निर्णय लिया। ऐपवा-आईसा की जांच टीम में ऐपवा प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा के साथ रोजा मैथ्यू और विभा वाही जबकि आइसा से राजेश, मिहिर और आशीष शामिल रहे। बताया कि बीएचयू में भर्ती डॉ. सत्या के पिता एसके चंदन और मां ममता से भी बातचीत कर परिस्थितियों की जानकारी ली गई। । इसके अलावा मेडिकल छात्रों से बातचीत की गई। टीम के सदस्यों ने बताया कि बातचीत में मेडिकल छात्रों ने लंबे समय तक ड्यूटी का दबाव रहने की जानकारी दी। बातचीत में निदेशक ने मेडिकल स्टूडेंट्स की लंबी ड्यूटी की बात स्वीकार भी की। लेकिन डॉ. सत्या को जॉइनिंग से घटना के दिन तक कितने घंटे ड्यूटी करनी पड़ी, इसका डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया। बताया कि डॉ. सत्या की सेहत में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। इसलिए किसी उच्चस्तरीय संस्थान में इलाज कराना चाहिए। इसकी मांग भी निदेशक से की गई।
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