Research in BHU: बदल रहा किशोरों का बॉडी क्लॉक, सुबह जगने-रात सोने का समय बढ़ा; जानें अन्य परिणाम
वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा वर्मा ने सुझाव देते हुए बताया कि रात में सोने से पहले तेज रोशनी जैसे मोबाइल स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें। रोज एक ही समय में सोएं। सुबह की धूप में कुछ समय बिताएं। आपका शरीर जिस वक्त ज्यादा बेहतर महसूस करे उसी समय में काम करना चाहिए। वहीं, स्कूलों का समय थोड़ा आगे बढ़ाया जाए।
विस्तार
Varanasi News: बीएचयू में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि बढ़ती उम्र के साथ साथ शरीर का बॉडी क्लॉक भी शिफ्ट हो रहा है। बच्चे से किशोरावस्था (14) में प्रवेश करने के बाद उनके रात के सोने और सुबह जगने का समय आगे खिसक रहा है।
चिंता की बात ये है कि स्कूल का समय सुबह ही रहता है जिससे उनकी नींद पूरी ही नहीं हो रही है। इससे उनमें मानसिक तनाव और थकान बढ़ रहा है। वहीं, 17 साल की उम्र वाले किशोरों को दोपहर या रात में काम करना अच्छा लगता है क्योंकि इसी समय में उनका शरीर पूरी तरह से सक्रिय रहता है।
बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे के मार्गदर्शन में शोध कर रहीं वैज्ञानिक डॉ. प्रज्ञा वर्मा ने 502 किशोरों पर शोध करके ये निष्कर्ष निकाला है। इसमें बताया गया है कि शोध में शामिल 157 किशोरों को रात 10:15 से 12:29 बजे के बीच नींद आ जाती है। 22 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय जर्नल डिस्कवर साइकोलॉजी में ये रिसर्च प्रकाशित किया गया है। टीम में डॉ. रामजी दुबे, प्रो. संगीता रानी और प्रो. शाली मलिक भी शामिल हैं।
दी खास जानकारी
रिसर्च टीम की ओर से 14 से 17 साल के 502 किशोरों से 19 सवाल पूछे गए। 14 साल वाले को छोटे किशोर और 17 साल वाले को बड़े किशोर में बांटा गया था। इनमें मॉर्निंगनेस–इवनिंगनेस यानी कि सुबह या रात किस समय अपना काम करना पसंद करते हैं। इनमें ये भी देखा गया कि किशोर कब तक सो रहे हैं और कब उनका पढ़ने और व्यायाम करने में मन लगता है।
शोध में छोटे किशोर मॉर्निंग टाइप निकले। लेकिन, उम्र जैसे जैसे बढ़ी किशोर देर से सोने लगे। कुछ तो आधी रात के बाद ही सोने वाले मिले। स्कूल का समय निश्चित है, इसलिए सुबह रोज एक ही समय में सोकर उठना होता है। ऐसे में नींद के कुल घंटे कम हो जाते हैं। ज्यादातर किशोर न तो बिल्कुल सुबह उठते हैं और न ही पूरी रात भर जागने वाले। वे मध्यम मार्ग का पालन करने वाले निकले।