वाराणसीः इंटर मॉडल स्टेशन की बाधा दूर करने के लिए अब तक नहीं तैयार हुई रिपोर्ट
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सड़क परिवहन मंत्रालय की महत्वाकांक्षी परियोजना इंटर मॉडल स्टेशन को धरातल पर लाने के लिए वाराणसी में प्रशासन संजीदा नहीं दिख रहा है। 20 दिन पहले गठित हुई छह सदस्यीय कमेटी ने अब तक स्थलीय निरीक्षण भी नहीं किया है। जबकि कमेटी बनने के एक सप्ताह में उन्हें परियोजना के लिए जमीन चिह्नित करने के साथ ही प्राथमिक रिपोर्ट देनी थी।
दरअसल, देश के पहले इंटर मॉडल स्टेशन के लिए वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन को चिह्नित किया गया है। 34 एकड़ में फैली रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की भी शिकायत है। ऐसे में 27 दिसंबर 2020 को विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, रेलवे सहित अन्य विभागों की छह सदस्यीय टीम को मौका मुआयना कर इस परियोजना की बाधाओं को दूर करने के लिए रिपोर्ट मांगी गई थी। इसी रिपोर्ट को शासन के माध्यम से केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को भेजा जाएगा। बता दें कि काशी रेलवे स्टेशन पर जल मार्ग और सड़क मार्ग के साथ ही भविष्य में प्रस्तावित मेट्रो व रोपवे को भी यहां इंटर लिंक करने की योजना है। गंगा में क्रूज संचालन के साथ ही नावों को सीएनजी में तब्दील किया जा रहा है।
शुरू नहीं हो पाया वरुणा किनारे ईआरटीएस
ई रिक्शा रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए तैयार किए जा रहे वरुणा किनारे की सड़क को एक साल बाद भी शुरू नहीं किया जा सका, जबकि इस पर विकास प्राधिकरण ने करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर दिया है। दो स्थानों पर बने ब्रिज के कनेक्ट नहीं होने से सड़क पर परिवहन शुरू करा पाना मुश्किल लग रहा है। बता दें कि कचहरी से खिड़किया घाट को जोड़ने के लिए वरुणा किनारे बनाई गई सड़क को विकल्प के रूप में तैयार किया जा रहा है। मगर, एक साल का समय बीतने के बाद भी सड़क ई रिक्शा के लिए नहीं शुरू हो पाई।
आईएमएस के लिए गठित कमेटी ने रिपोर्ट नहीं दी है। मंगलवार को कमेटी के सदस्यों से बात की जाएगी और तीन दिन में रिपोर्ट के लिए निर्देश दिया जाएगा। - कौशल राज शर्मा, जिलाधिकारी वाराणसी।
एक स्टेशन से यात्रा के होंगे चार विकल्प
आईएमएस बनने के बाद यहां पहुंचने वाले लोगों को शहर में आवागमन के चार विकल्प होंगे। रोड ट्रांसपोर्ट में टैक्सी, सिटी बस, ऑटो आदि की सुविधाएं होगी। रेल से अन्य शहरों और मेट्रो से शहर के अंदर विभिन्न स्थानों तक आवागमन की सुविधा होगी। इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट भी विकसित किया जाएगा। इसके लिए गंगा के कई घाट विकसित किए जाएंगे। चारों तरह के ट्रांसपोर्ट का यहां ट्रांजिट होगा।