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मजिस्ट्रेटी जांच का सचः कब कार्रवाई हुई, क्या असर हुआ, कभी पता ही नहीं चलता

Thu, 05 Oct 2017 04:54 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 05 Oct 2017 04:54 PM IST
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reality of judicial enquiry in varanasi no action no any result
जांच - फोटो : demopic
किसी भी बड़ी घटना के बाद आला अधिकारी मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। ये मजिस्ट्रेटी जांच कब पूरी हुई, क्या कार्रवाई हुई और उसका क्या असर हुआ, यह पता ही नहीं चलता।
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वाराणसी में पिछले कुछ वर्षों में प्रमुख मामलों की मजिस्ट्रेटी जांच पर गौर फरमाएं तो यही हालात नजर आते हैं। मजिस्ट्रेटी जांच की रिपोर्ट अक्सर वरिष्ठ अफसरों के यहां डंप हो जाती है या फिर शासन स्तर पर उसका संज्ञान नहीं लिया जाता।
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नतीजा, जांच दर जांच के बाद भी किसी पर कोई आंच नहीं आती और पूरी कवायद महज खानापूर्ति तक सिमटकर रह जाती है। 

रामनगर बाल सुधार गृह : 11 बार जांच फिर भी व्यवस्था जस की तस
सुधार गृह से जब भी कोई किशोर फरार होता है या बवाल जैसी घटनाएं होती हैं तो उसकी मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाती है। पिछले पांच सालों में यहां 11 बार मजिस्ट्रेटी जांच हो चुकी है लेकिन यहां कभी किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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यहां की व्यवस्था पर भी कोई असर नहीं हुआ। जबकि, अभी पिछले महीने ही एडीएम प्रशासन ने दो किशोरों के फरार होने के मामले की जांच की थी। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया था। 

जिला जेल बवाल: जांच पूरी होने से पहले ही स्थानांतरण 
जिला जेल में पिछले साल दो अप्रैल को हुए बवाल की मजिस्ट्रेटी जांच तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने की थी। जांच पूरी होने के पूर्व ही जेल अफसरों पर कार्रवाई और बंदियों का दूसरी जेलों में स्थानांतरण कर दिया गया था।

मजिस्ट्रेटी जांच में क्या तथ्य निकलकर आए और उस आधार पर क्या कार्रवाई हुई, यह अब तक सामने नहीं आया। 

इनका हाल तो और भी खराब

reality of judicial enquiry in varanasi no action no any result
पितरकुंडा विस्फोट: जांच हुई मगर कार्रवाई कुछ नहीं 
पिछले साल 27 अक्तूबर को चेतगंज के पितरकुंडा, हबीबपुरा में अवैध पटाखा बनाते समय एक मकान में हुए विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी। इसकी मजिस्ट्रेटी जांच भी तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने की थी।

जांच के बाद भी किसी पुलिस या फिर प्रशासनिक अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जबकि, घटना घनी बस्ती में अवैध पटाखा कारोबार चलने के पीछे पुलिस और प्रशासन के जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल उठे थे। 

वरुणा कॉरिडोर: आग कैसे लगी पता ही नहीं चल पाया 
होली के दिन में वरु णा कॉरिडोर के स्टोर में लगी आग के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए थे। एडीएम प्रशासन मुनींद्रनाथ उपाध्याय ने यह जांच की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि कोई सरकारी क्षति नहीं हुई। साजिश की घटना का कोई जिक्र नहीं किया गया।

आग कैसे और क्यों लगी, यह भी नहीं पता चल पाया। कॉरिडोर का काम कराने वाली कंपनी एपको इंफ्राटेक को जिम्मेदार बताया गया। मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सारा मामला रफादफा हो गया। 
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