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रथयात्रा मेला: भगवान जगन्नाथ के अभिषेक से होगी शुरुआत, भक्ति में सराबोर होगी शिव की नगरी; जानें खास

Fri, 26 Jun 2026 06:35 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 26 Jun 2026 06:35 PM IST
सार

Rathyara Mela: भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा का शुभारंभ 29 जून को अभिषेक के साथ होगा। इसके साथ ही 20 जुलाई तक चलने वाला ऐतिहासिक रथयात्रा मेला शुरू हो जाएगा। शिव की नगरी भगवान जगन्नाथ की भक्ति में सराबोर रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक अनुष्ठानों, दर्शन और मेले की व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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Rath Yatra Fair begin with ritual bathing of Lord Jagannath varanasi immersed in devotion
पत्रकारवार्ता को संबोधित करते जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: शिव की नगरी में 22 दिनों तक भगवान जगन्नाथ का उत्सव होगा। आस्था का यह उत्सव सोमवार को भगवान जगन्नाथ के अभिषेक से शुरू होगा, जो कि 20 जुलाई तक चलेगा। काशी में यह उत्सव 236 साल पुराना है।

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जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह ने शुक्रवार को महमूरगंज स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि इसके लिए तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। उन्होंने बताया कि काशी में प्रभु का यह दिव्य विग्रह सन् 1790 में पुरी के मुख्य पुजारी पंडित स्वामी तेजोनिधि ब्रह्मचारी द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था। इसके बाद शापुरी राजवंशों द्वारा सन् 1802 से निरंतर इस रथयात्रा मेले का आयोजन किया जा रहा है।

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ज्येष्ठ पूर्णिमा (29 जून) को सुबह 5:11 बजे से तीनों विग्रहों को स्नान-यात्रा एवं जलाभिषेक किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा का भव्य महास्नान कराया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु स्वयं भी जलाभिषेक कर पुण्य लाभ कमा सकेंगे। 

महास्नान के तुरंत बाद 30 जून से 14 जुलाई तक भगवान 'अनवसर काल' (अंशातवास) में चले जाएंगे। मान्यता है कि इस दौरान भारी स्नान के कारण भगवान बीमार हो जाते हैं और विश्राम करते हैं। इस 14 दिनों की अवधि में भगवान के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष पारंपरिक औषधीय काढ़ा तैयार किया जाएगा, जिसे प्रतिदिन भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। 

इसमें कई जड़ी बूटियां विद्यमान होती हैं। इस काढ़े को प्रसाद के रूप में लेने के मंदिर में काफी भक्तों की भीड़ जुटती है। मान्यता है कि इस काढ़े को पीने से कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है।

14 जुलाई को नवयौवन रूप में दर्शन देंगे भगवान
14 जुलाई को भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर भक्तों को 'नवयौवन स्वरूप' में दर्शन देंगे। इस दिन महाप्रभु को परवल के जूस का भोग लगाया जाता है। जिसे भक्तों में बांटा जाता है। इसके अगले दिन, 15 जुलाई को दोपहर तीन बजे डोली की भव्य सजावट होगी और शाम चार बजे डोली यात्रा असि चौराहा स्थित मंदिर से प्रस्थान करेगी। यह यात्रा दुर्गाकुंड, नवाबगंज, खोजवां और शंकुलधारा होते हुए रथयात्रा क्षेत्र (पं. बेनीराम बाग) पहुंचेगी।

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तीन दिनों तक सजेगा रथयात्रा का मेला
16 से 18 जुलाई तक तीन दिनों तक काशी का रथयात्रा मेला सजेगा। इसे काशी का लक्खा मेला भी कहा जाता है। प्रभु के रथ की एक झलक पाने के लिए लाखों की भीड़ जुटेगी। तीनों देव रथ पर विराजमान होकर जनता को दर्शन देंगे। इसमें सुबह पांच बजे मंगला आरती एवं दर्शन प्रारंभ होंगे। 

दोपहर 12 बजे भोग आरती के बाद दोपहर तीन बजे तक पट बंद होंगे। रात आठ बजे आरती और मध्यरात्रि 12 बजे महाआरती होगी। 18 जुलाई की रात 12 बजे महाआरती के साथ मुख्य मेले का समापन होगा। इसके बाद 19 जुलाई को 'बहुड़ा यात्रा' के जरिए भगवान पुनः असि स्थित अपने मुख्य मंदिर लौट आएंगे और 20 जुलाई से नियमित दर्शन-पूजन शुरू हो जाएगा।

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