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रोडवेज 31 बसों के यात्रियों की 77 बार खतरे में डाली जान

Sat, 23 Nov 2019 01:42 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 Nov 2019 01:42 AM IST
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raodways varanasi
‘उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में सफर करना खतरे से खाली नहीं है’ आमतौर पर यह यात्री ही कहते थे, लेकिन अब रोडवेज के अधिकारी भी इस बात को स्वीकारने लगे हैं। व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) की समीक्षा में 31 बसों का किलोमीटर प्रति घंटा का कांटा 77 बार ओवर स्पीड तक पहुंचा। यानी, बस 80 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा गति से दौड़ी।
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वीटीएस से पकड़ में आई इतनी बड़ी लापरवाही के बाद क्षेत्रीय प्रबंधक ने बनारस मंडल के पांच जनपदों के बेलगाम चालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित डिपो के एआरएम को पत्र लिखा है। इसमें काशी, कैंट, ग्रामीण डिपो के अलावा गाजीपुर, जौनपुर, सोनभद्र व विंध्यनगर डिपो की बसें शामिल हैं। एक बस में 54 सीट के हिसाब से 31 बसों में सवार लगभग डेढ़ हजार यात्रियों की जान सांसत में डालने वाले बेलगाम चालक तो महज एक उदाहरण भर मात्र है। वास्तव में हर रोज रोडवेज की बसों में हजारों यात्रियों की जान भगवान भरोसे रहती है।
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कैंट डिपो की सात बसें 22 बार ओवर स्पीड हुईं तो ग्रामीण डिपो की छह बसों ने 12 बार निर्धारित गति सीमा को पार किया। कैंट डिपो की दो बसों ने सात बार स्पीड के कांटे को 80 किमी प्रति घंटा के पार पहुंचाया। जौनपुर डिपो की पांच बसों ने दस बार, गाजीपुर डिपो की बसों ने 19 बार, सोनभद्र की चार बसों ने चार बार, विंध्यनगर की तीन बसों ने तीन बार तय गति सीमा को पार किया। यह हाल तब है जब उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर का सख्त निर्देश है कि बसों को दुर्घटनाओं से बचाने के लिए गति सीमा के नियम का पालन सख्ती से किया जाए। गति सीमा के भीतर बस चलाने पर ईंधन की खपत भी अपेक्षाकृत कम होती है।
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