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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Rangbhari Ekadashi Gulal will be offered to Baba Holi celebrations will begin in Kashi silver palanquin

रंगभरी एकादशी: बाबा को चढ़ेगा गुलाल, काशी में शुरू होगी होली; 27 फरवरी को निकलेगी रजत पलकी यात्रा

Fri, 06 Feb 2026 01:35 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 06 Feb 2026 01:35 PM IST
सार

Varanasi News: रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास से बाबा की पंचबदन प्रतिमा की पालकी यात्रा निकलती है। इस दिन बाबा विश्वनाथ का विशेष शृंगार होता है। 

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Rangbhari Ekadashi Gulal will be offered to Baba Holi celebrations will begin in Kashi silver palanquin
रंगभरी एकादशी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह होगा। इससे पहले काशी की परंपरा में शुमार रंगभरी एकादशी यानी 27 फरवरी से काशी में होली शुरू हो जाएगी। परंपरानुसार श्रीकाशी विश्वनाथ धाम और टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत के आवास से बाबा की पालकी यात्रा निकाली जाएगी। काशीवासी सहित बाहर से श्रद्धालु बाबा के साथ अबीर-गुलाल खेलेंगे। इसके साथ अन्य शिवालयों में रंगभरी एकादशी का उल्लास दिखेगा।

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काशी की सबसे प्राचीन परंपरा में एक रंगभरी एकादशी भी है। इसी के साथ काशी में होली की शुरुआत होती है। क्योंकि, इस दिन भक्त श्रीकाशी विश्वनाथ के साथ होली खेलते हैं। फिर होली का उत्सव शुरू हो जाता है। 
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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी है। जबकि एकादशी तिथि 26 फरवरी को रात में 12:06 से अगले दिन 9:58 बजे तक रहेगी। बाबा के भक्त उन पर रंग, अबीर और गुलाल चढ़ाएंगे। मंदिर के एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि रंगभरी एकादशी पर मंदिर में आठ से 10 हजार तक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसको लेकर मुकम्मल व्यवस्था की जाएगी। 
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27 को मसाने की होली : अघोर पीठ हरिश्चंद्र घाट के पीठाधीश्वर अवधूत चंडेश्वर कपाली बाबा ने बताया कि रंगभरी एकादशी पर ही हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली खेली जाएगी। इसमें नागा साधु, किन्नर समुदाय शामिल होगा।

तिलभांडेश्वर और गौरी केदारेश्वर मंदिर से निकलेगी पालकी यात्रा
रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ मंदिर सहित तिलभांडेश्वर और गौरी केदारेश्वर मंदिर में भी विशेष शृंगार होता है और पालकी यात्रा निकाली जाती है। तिलभांडेश्वर मंदिर के पुजारी विनय शुक्ला ने बताया कि  रंगभरी एकादशी पर रजत पालकी पर माता गौरी और शिव की स्वर्ण मुकुट की गौना यात्रा दैत्रावीर मंदिर से भेलूपुर चौराहे से रेवाड़ी तालाब से होते हुए पुनः मंदिर आती है। लगभग 5 हजार की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है। 

बाबा का 21 किलो गुलाल से विशेष शृंगार होता है। गौरी केदारेश्वर मंदिर के महंत आनंद प्रकाश दुबे (पप्पू गुरु) ने बताया कि मंदिर में एकादशी से होली तक विशेष शृंगार किया जाता है। एकादशी वाले दिन मंदिर के गर्भगृह के चारों तरफ पालकी यात्रा की जाती है।

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