कुरान पढ़ वेदों पर लिखे लेख, नाम में 'खां' के आगे लगाते हैं 'शास्त्री', राष्ट्रपति से मिला पद्मश्री
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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र के रहने वाले डॉ. हनीफ खान शास्त्री को शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने पद्मश्री से सम्मानित किया। डॉ. हनीफ खान शास्त्री ने यह सम्मान दुद्धीवासियों को समर्पित किया है।
डॉ. हनीफ खान शास्त्री ने बताया कि वह कुरान, वेद, भगवद्गीता, उपनिषद, गीता, पुराण में समानता पर लिखते रहते हैं। देश-विदेश में प्रवचन भी करते हैं। डॉ. हनीफ खान शास्त्री ने बताया कि बचपन में ही पिता का देहांत हो गया था। मित्रों ने चंदा जुटा कर पढ़ाया। वे काफी गरीबी में पढ़े हैं। डॉ. हनीफ खान शास्त्री ने बताया कि हमेशा मेरे मन में रहा कि दुद्धी के लोगों के लिए कुछ आदर्श कायम करना है। पद्मश्री इसी क्रम में दुद्धीवासियों के लिए सम्मान है।
डॉ. हनीफ खान शास्त्री ने बताया कि एक बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद वियतनाम की राजधानी हनोई गए थे। वहां के सरकारी गेस्ट हाउस में बैठे थे। उसी समय गीता और पुराण में मानवीय सद्भावना पर दूरदर्शन मेरा लेक्चर टेलिकास्ट कर रहा था।
जब राष्ट्रपति भारत आए तो उन्होंने मुझे राष्ट्रपति भवन बुलवाया और कहा कि मैं वियतनाम में आपका लेक्चर सुन कर प्रभावित हुआ। डॉ. हनीफ ने बताया कि राष्ट्रपति ने उनकी लिखी किताबों को मंगवाया। सम्मान समारोह में पत्नी कैशर बानो, पुत्री शाहिस्ता हनीफ खान, हुमैरा हनीफ खान भी थीं।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में की थी पढ़ाई
डॉ. हनीफ खां शास्त्री को साहित्य और शिक्षा के बीच असाधारण फर्क को समझाने के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद विश्वविद्यालय से संस्कृत से एमए किया और पुराण के बारे में गहन अध्ययन किया। आचार्य, शास्त्री और डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। बाद में संस्कृत के विद्वान बने। नई दिल्ली के राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान डीम्ड यूनिवर्सिटी में बतौर संस्कृत प्रोफेसर सेवाएं दीं।