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जनकपुर की गलियों में हुई भगवान राम पर पुष्पवर्षा
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रामनगर। भगवान राम और लक्ष्मण का रुप रंग देखकर जनकपुर वासी मोहित हो गए। जिसकी भी नजर श्रीराम पर पड़ी वह ठहर गया। नेत्र सुख की अभिलाषा थोड़ी और थोड़ी करके बढ़ती चली गई। हर किसी ने यही कहा कि जानकी के योग्य तो यही वर है। सीता जी की आठ सखियां उन्हें देखकर उनकी सुंदरता का बखान स्वयं करती हैं। जनकपुर की गलियों से दोनों भाई गुजरे तो स्त्रियां उनको देखकर मोहित हो गईं। जनकपुर वासी दोनों भाईयों पर फूलों की वर्षा करते हैं।
रामनगर की रामलीला में रविवार को फुलवारी और अष्टसखी संवाद का मंचन किया गया। जनकपुरी में भ्रमण के बाद दोनों भाई गुरु के पास जाते हैं। संध्या वंदन करने के बाद शयन करते हैं। प्रात: उठकर राम गुरु के पूजन के लिए फूल लाने निकलते हैं। उसी समय जानकी जी अपनी सखियों के ासथ गिरिजा भवानी के पूजन के लिए आती हैं। सखियां उनको घेरे रहती हैं। सखियां फिर दोनों भाईयों को देखकर बखान करती हैं। जानकी आश्चर्यचकित होकर देखती हैं। जानकी के आभूषणों की खनक सुनकर रामजी का मन मोहित हो जाता है। सखियां सीता से कहती हैं कि गौरी का ध्यान बाद में करना पहले इन राजकुमारों को देखो। सीता गौरीजी का पूजन करके अपनी मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद मांगती हैं। दोनो भाई पूजा का फूल लेेकर गुरु के पास वापस आते हैं। इसी के साथ आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया।
फुलवारी और अष्टसखी संवाद का हुआ मंचन
चिरईगांव। जाल्हूपुर रामलीला के तीसरे दिन राजा जनक के निमंत्रण पर महषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को साथ लेकर सीता का स्वयंवर देखने पहुंचे। फुलवारी और अष्टसखी संवाद का मंचन किया गया। आरती के साथ लीला को विश्राम दिया गया।
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रामनगर की रामलीला में रविवार को फुलवारी और अष्टसखी संवाद का मंचन किया गया। जनकपुरी में भ्रमण के बाद दोनों भाई गुरु के पास जाते हैं। संध्या वंदन करने के बाद शयन करते हैं। प्रात: उठकर राम गुरु के पूजन के लिए फूल लाने निकलते हैं। उसी समय जानकी जी अपनी सखियों के ासथ गिरिजा भवानी के पूजन के लिए आती हैं। सखियां उनको घेरे रहती हैं। सखियां फिर दोनों भाईयों को देखकर बखान करती हैं। जानकी आश्चर्यचकित होकर देखती हैं। जानकी के आभूषणों की खनक सुनकर रामजी का मन मोहित हो जाता है। सखियां सीता से कहती हैं कि गौरी का ध्यान बाद में करना पहले इन राजकुमारों को देखो। सीता गौरीजी का पूजन करके अपनी मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद मांगती हैं। दोनो भाई पूजा का फूल लेेकर गुरु के पास वापस आते हैं। इसी के साथ आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया।
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फुलवारी और अष्टसखी संवाद का हुआ मंचन
चिरईगांव। जाल्हूपुर रामलीला के तीसरे दिन राजा जनक के निमंत्रण पर महषि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को साथ लेकर सीता का स्वयंवर देखने पहुंचे। फुलवारी और अष्टसखी संवाद का मंचन किया गया। आरती के साथ लीला को विश्राम दिया गया।
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