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पुलिस को देखते ही गंगा में नहा रहे लोग भागे
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वाराणसी। रामनगर के सिपहिया घाट पर गंगा में डूबने से पांच बच्चों की मौत के दूसरे दिन शानिवार को गंगा घाटों पर पुलिस की सतर्कता नहीं दिखी। सुबह और शाम के समय किशोरों और युवाओं की टोली लाइफ जैकेट जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण और बड़ों की देखरेख के बगैर ही गंगा की लहरों में जलक्रीड़ा करती दिखी। इस बीच कुछेक घाटों पर पुलिस पहुंची तो गंगा में नहा रहे लोग भाग खड़े हुए। वहीं, जहां पुलिस नहीं पहुंच पाई वहां नहाने वालों की मनमानी जारी रही।
रामनगर के सिपहिया घाट पर शुक्रवार को गंगा में पांच दोस्तों की डूबने के कारण हुई मौत के बाद शनिवार को सन्नाटा पसरा रहा। गंगा तो क्या रेत पर भी लोग सुबह और शाम के समय नहीं दिखे। इस बीच रामनगर थाने की पुलिस भी सिपहिया घाट और आसपास के इलाके में गश्त करते हुए नजर नहीं आई। शिवाला घाट पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए युवा और किशोर गंगा में नहाते रहे। अचानक पुलिस आई तो भगदड़ मच गई। पुलिस को देखते ही पानी में भगदड़ मचने से किसी के साथ हादसा भी हो सकता था लेकिन संयोग से सब ठीक रहा। इसी तरह सामने घाट, गाय घाट सहित कुछेक अन्य गंगा घाटों पर भी किशोर और युवा सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए गंगा में जलक्रीड़ा करते रहे। गंगा घाटों के किनारे रहने वाले कुछेक लोगों ने सूचना दी लेकिन पुलिस नहीं आई तो सभी का घंटों नहाना जारी रहा। लोगों का कहना था कि शुक्रवार के हादसे से सीख लेते हुए ही सही लेकिन छोटे बच्चों का सुरक्षा के साधन और बड़ों की देखरेख के बगैर इस तरह से नदी में नहाना ठीक नहीं है। नदी कहीं बहुत गहरी है तो कहीं इसकी धारा में बहुत वेग है। इसलिए सभी को सतर्कता के साथ ही गंगा में उतरना चाहिए।
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रामनगर के सिपहिया घाट पर शुक्रवार को गंगा में पांच दोस्तों की डूबने के कारण हुई मौत के बाद शनिवार को सन्नाटा पसरा रहा। गंगा तो क्या रेत पर भी लोग सुबह और शाम के समय नहीं दिखे। इस बीच रामनगर थाने की पुलिस भी सिपहिया घाट और आसपास के इलाके में गश्त करते हुए नजर नहीं आई। शिवाला घाट पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए युवा और किशोर गंगा में नहाते रहे। अचानक पुलिस आई तो भगदड़ मच गई। पुलिस को देखते ही पानी में भगदड़ मचने से किसी के साथ हादसा भी हो सकता था लेकिन संयोग से सब ठीक रहा। इसी तरह सामने घाट, गाय घाट सहित कुछेक अन्य गंगा घाटों पर भी किशोर और युवा सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुए गंगा में जलक्रीड़ा करते रहे। गंगा घाटों के किनारे रहने वाले कुछेक लोगों ने सूचना दी लेकिन पुलिस नहीं आई तो सभी का घंटों नहाना जारी रहा। लोगों का कहना था कि शुक्रवार के हादसे से सीख लेते हुए ही सही लेकिन छोटे बच्चों का सुरक्षा के साधन और बड़ों की देखरेख के बगैर इस तरह से नदी में नहाना ठीक नहीं है। नदी कहीं बहुत गहरी है तो कहीं इसकी धारा में बहुत वेग है। इसलिए सभी को सतर्कता के साथ ही गंगा में उतरना चाहिए।
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