रामलीला: अगले साल फिर मिलने के साथ नेमियों ने ली विदाई, लीला समाप्त; किले के हाथी गेट पर रस्म निभाई गई
Varanasi News: विश्व प्रसिद्ध रामलीला का परंपरानुसार विधि-विधान से समापन हो गया। कुंवर अनंत नारायण सिंह के आमंत्रण पर दशरथ पुत्र किले में पहुंचते हैं। हाथी गेट पर पूरी रस्में निभाई जाती हैं।
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रामनगर के रामबाग में सनक सनंदन की लीला के साथ एक माह तक चली रामनगर की रामलीला का सोमवार की देर रात समापन हो गया। लोगों ने नम आंखों से यहां से विदा ली लेकिन इस वादे के साथ कि अगर प्रभु चाहेंगे तो अगले साल फिर मिलना होगा। रामनगर किले में आयोजित एक भव्य समारोह में मुख्य स्वरूपों की विदाई दी गई।
शरद पूर्णिमा पर होने वाला आयोजन रामलीला का हिस्सा नहीं होता लेकिन भगवान राम की विदाई महादेव के प्रतिनिधि काशीराज द्वारा करना दुर्लभ क्षण होता है लिहाजा लोग इसे भी रामलीला ही मान कर चलते हैं। मंगलवार की शाम शरद पूर्णिमा नहीं मिलती इसलिए सोमवार की रात्रि ही आयोजन किया गया।
दुर्ग में रविवार की रात्रि में रामलीला के मुख्य पात्रों की कोट विदाई की परंपरा निभाई गई। अयोध्या में निवास कर रहे श्रीराम सीता और तीनों भाइयों को कुंवर अनंत नारायण सिंह के प्रतिनधि दुर्ग में आमंत्रित करने पहुंचते हैं। सभी पात्र हाथी पर सवार होकर किले में पहुंचते हैं। उनका राजसी आतिथ्य सत्कार किया गया।
गूंजा जय श्रीराम
किले के हाथी गेट पर विदाई की रस्म निभाई गई। स्वरूपों के यहां पहुंचने पर आसन पर बैठाकर कुंवर और राज परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके चरण पखारे। कुंवर ने अपने हाथों से परोसकर जलपान कराया। इस दौरान रामायणियों ने रामचरितमानस के उत्तरकांड के शेष बचे दोहों का गायन करना शुरू किया।
भोजन ग्रहण करने के पश्चात उन्होंने उनको माला पहनाकर कुंवर द्वारा उनकी आरती उतारी गई। दक्षिणा प्रदान कर सभी मुख्य स्वरूपों को राजपरिवार द्वारा विदा कर दिया गया। इसके बाद स्वरूप हाथियों पर सवार हो कर अयोध्या पहुंचे। रामायणियों ने उत्तरकांड के शेष बचे दोहों का गायन समाप्त किया।
इसके बाद आखिरी आरती के साथ रामलीला का औपचारिक समापन हो गया। आरती में राजपरिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। इसके पूर्व सोमवार को रामलीला के इकतीसवें दिन उपवन विहार और सनक सनंदन की लीला हुई। इसी के साथ रामलीला के प्रसंगों का मंचन समाप्त हो जाता है।