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भगवान का खड़ाऊं सिर पर रखकर लौटे भरत
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रामनगर। भगवान राम को मनाने में भरत का प्रयास विफल रहा। लाख उपाय करने के बावजूद भगवान राम अयोध्या नहीं लौटे। भरत के संतोष के लिए उन्होंने अपना खड़ाऊं देकर अयोध्या वापस भेज दिया। भरत राम के खड़ाऊं को अयोध्या के सिंहासन पर रखकर उसकी देखरेख की जिम्मेदारी छोटे भाई शत्रुघभन को सौंपकर नंदीग्राम चले गए। नंदीग्राम में पर्णकुटी बनाकर भरत रहने लगे। रामनगर की रामलीला के 14वें दिन बुधवार को भरत जी का चित्रकूट से विदाई, अयोध्या प्रस्थान, नंदीग्राम निवास की लीलाओं का मंचन किया गया।
भरत जी का चित्रकूट से विदा होकर अयोध्या गमन, नंदीग्राम निवास की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन देखने के लिए रामबाग पोखरा के पास लोग पहले ही बेकरारी से इंतजार कर रहे थे। रामबाग के आसपास मेले जैसा माहौल था। भरत अत्रिमुनि की आज्ञा से चित्रकूट के पावन स्थलों को देखते हैं। मुनि के कहने पर वह अपने साथ लाए सभी तीर्थों को जल पहाड़ के समीप स्थित एक कूप में रख देते हैं। मुनि इस कूप का नाम भरत कूप रखते हैं। राम इस कूप की महिमा सबको बताते हैं। भरत उनसे कहते हैं कि हमारी सभी इच्छा पूरी हुई अब आप आज्ञा दीजिए। वह राम को समझाते हैं और संतोष नहीं होने पर अपना खड़ाऊं देकर विदा करते हैं। भरत आनंदित होकर राम से गले मिलकर सभी को साथ लेकर अयोध्या के लिए चल पड़े। इसके बाद चित्रकूट में राम और सीता लक्ष्मण की आरती होती है। नंदीग्राम में भरत राम के वनवास से लौटने की प्रतीक्षा करते हैं और वहीं नन्दीग्राम में भरत की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया है।
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भरत जी का चित्रकूट से विदा होकर अयोध्या गमन, नंदीग्राम निवास की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन देखने के लिए रामबाग पोखरा के पास लोग पहले ही बेकरारी से इंतजार कर रहे थे। रामबाग के आसपास मेले जैसा माहौल था। भरत अत्रिमुनि की आज्ञा से चित्रकूट के पावन स्थलों को देखते हैं। मुनि के कहने पर वह अपने साथ लाए सभी तीर्थों को जल पहाड़ के समीप स्थित एक कूप में रख देते हैं। मुनि इस कूप का नाम भरत कूप रखते हैं। राम इस कूप की महिमा सबको बताते हैं। भरत उनसे कहते हैं कि हमारी सभी इच्छा पूरी हुई अब आप आज्ञा दीजिए। वह राम को समझाते हैं और संतोष नहीं होने पर अपना खड़ाऊं देकर विदा करते हैं। भरत आनंदित होकर राम से गले मिलकर सभी को साथ लेकर अयोध्या के लिए चल पड़े। इसके बाद चित्रकूट में राम और सीता लक्ष्मण की आरती होती है। नंदीग्राम में भरत राम के वनवास से लौटने की प्रतीक्षा करते हैं और वहीं नन्दीग्राम में भरत की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया है।
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