Raksha Bandhan date: 30 या 31 अगस्त..कब है रक्षाबंधन, न आएं भ्रम में, जानें शुभ मुहूर्त?
Raksha Bandhan 2023 Date and Time : ज्योतिषाचार्य प्रो. रामचंद्र पांडेय ने धर्म सिंधु एवं निर्णय सिंधु ग्रंथों का उल्लेख करते हुए बताया कि यदि पूर्णिमा का मान दो दिन का प्राप्त हो रहा है तो प्रथम दिन सूर्योदय के एक घटी के बाद पूर्णिमा का आरंभ होकर दूसरे दिन पूर्णिमा छह घटी से कम प्राप्त हो रही हो तो पूर्व दिन में भद्रा से रहित काल में रक्षाबंधन करना चाहिए।
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श्रावणी उपाकर्म और रक्षाबंधन का पर्व 30 अगस्त को ही मनाया जाएगा। काशी के ज्योतिषाचार्यों ने रक्षाबंधन के पर्व को लेकर फैले भ्रम का निराकरण कर दिया है। शनिवार को बीएचयू के ज्योतिष विभाग में काशी विद्वत परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में तिथि पर सर्वमान्य निर्णय हुआ।
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ज्योतिषाचार्य प्रो. रामचंद्र पांडेय ने धर्म सिंधु एवं निर्णय सिंधु ग्रंथों का उल्लेख करते हुए बताया कि यदि पूर्णिमा का मान दो दिन का प्राप्त हो रहा है तो प्रथम दिन सूर्योदय के एक घटी के बाद पूर्णिमा का आरंभ होकर दूसरे दिन पूर्णिमा छह घटी से कम प्राप्त हो रही हो तो पूर्व दिन में भद्रा से रहित काल में रक्षाबंधन करना चाहिए। 31 अगस्त को पूर्णिमा छह घटी से कम प्राप्त हो रही है। 30 अगस्त को नौ बजे रात तक भद्रा है, इसलिए 30 अगस्त को रात्रि में भद्रा के बाद रक्षाबंधन करना शास्त्र सम्मत होगा। रात्रिकाल में भी रक्षाबंधन का विधान है।
काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यास परिषद के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने भी विभिन्न पंचांगों में प्रदत पूर्णिमा के मान तथा धर्मशास्त्र के वचनों की समीक्षा करते हुए 30 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने का समर्थन किया। बैठक में ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. गिरजा शंकर, पूर्व ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, प्रो. रामजीवन मिश्र, प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी, डॉ. सुभाष पांडेय आदि मौजूद रहे।
उपाकर्म में नहीं लगता है भद्रा दोष
श्रावण पूर्णिमा का एक महत्वपूर्ण कर्म उपाकर्म भी होता है। इसका अनुष्ठान शुक्ल यजुर्वेद के तैतरीय को छोड़कर अन्य सभी शाखा वालों का धर्म शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार 30 तारीख को तथा तैतरीय शाखा वालों की उदय व्यापिनी पूर्णिमा में 31 को उपाकर्म करना शास्त्र सम्मत रहेगा। खंड रूप में पूर्णिमा का दो दिन मान प्राप्त होने की स्थिति में द्वितीय दिन यदि दो/तीन घटी से अधिक और छह घटी से कम पूर्णिमा प्राप्त हो रही हो तो शुक्ल यजुर्वेद की तैतरीय शाखा के लोगों को श्रावणी उपाकर्म दूसरे दिन तथा शुक्ल यजुर्वेदीय अन्य सभी शाखा के लोगों को श्रावणी उपाकर्म पूर्व दिन अर्थात 30 अगस्त को ही करना चाहिए।