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गुलाब की बारिश, चैती की चहक में पगी शाम
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sun, 29 Mar 2015 02:16 AM IST
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रवींद्रपुरी के नीलांबर में शनिवार की रंगत गुलाबी रही। सुगंधित गुलाब की पंखुड़ियों और गुलाबजल की बारिश के बीच ठुमरी ‘सांवरों ने जमुना तट छीनो मोरे हार’ की आलाप शुरू हुई तो बनारसी रस टपकने लगा। उसके बाद पं. छन्नूलाल मिश्र की पुरकशिश आवाज का जादू रसिकों के सिर चढ़ता चला गया।
शाम ढलते ही सफेद कुर्ता-पायजामा में सजे संगीत रसिक पुरुष और गुलाबी साड़ी में महिलाएं बरबस ही रवींद्रपुरी के लेन नंबर पांच की ओर खींचे चले आए। इसमें बढ़ी संख्या में विदेशी श्रोता भी शामिल रहे। गली के अंतिम मकान नीलांबर के झालरों से जगमग बागीचे में पहले ठंडई छानी गई और फिर पान घुलाया गया। इत्र, चंदन लगा और सबको दुपलिया टोपी, गुलाबी दुपट्टे से संवारा गया।
मखमली घास पर बिछे सफेद गद्दों पर मसनद का सहारा लेकर जब लोग जम गऐ तो गुलाब की पंखुड़ियां बरसने लगीं। उसके बाद सुरों का सफर शुरू हुआ। पं. माता प्रसाद और पं. रविशंकर की जोड़ी ने कथक की भाव-भाषा में शिव की स्तुति की। परन, टुकड़ा, तोड़ा, गत, निकास और लग्घी-लड़ी से खूब तालियां बटोरीं। पं. सुखदेव मिश्र ने वायलिन पर राग जोग बजाना शुरू किया और जब दादरा बजाना शुरू किया तो तबला वादक अशोक पांडेय के साथ उनकी खूब नोकझोंक भी हुई।
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निशा के तीसरे कलाकार पं. छन्नूलाल मिश्र बदले अंदाज में नजर आए। आपने पहले राग हेम में विलंबित ‘तुम बिन रैन कल ना परे’ और द्रुत ‘सजनवा संग लागी..’ के बाद राग तिरवट की बंदिश और ठुमरी ‘यमुना तट श्याम ने छीनो हार’ के बाद दादरा और चैती की झड़ी लगा दी।
चैती ‘सेजिया से सैंया रुठ गइले हो रामा ’ सुनाया। तबले पर ललित कुमार और हारमोनियम पर विनय मिश्र ने साथ दिया। समारोह में मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, यूएस अग्रवाल, दीपक मधोक बाबा, बनारस बीड्स के एमडी अशोक गुप्ता ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने आभार प्रकाश किया।
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शाम ढलते ही सफेद कुर्ता-पायजामा में सजे संगीत रसिक पुरुष और गुलाबी साड़ी में महिलाएं बरबस ही रवींद्रपुरी के लेन नंबर पांच की ओर खींचे चले आए। इसमें बढ़ी संख्या में विदेशी श्रोता भी शामिल रहे। गली के अंतिम मकान नीलांबर के झालरों से जगमग बागीचे में पहले ठंडई छानी गई और फिर पान घुलाया गया। इत्र, चंदन लगा और सबको दुपलिया टोपी, गुलाबी दुपट्टे से संवारा गया।
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मखमली घास पर बिछे सफेद गद्दों पर मसनद का सहारा लेकर जब लोग जम गऐ तो गुलाब की पंखुड़ियां बरसने लगीं। उसके बाद सुरों का सफर शुरू हुआ। पं. माता प्रसाद और पं. रविशंकर की जोड़ी ने कथक की भाव-भाषा में शिव की स्तुति की। परन, टुकड़ा, तोड़ा, गत, निकास और लग्घी-लड़ी से खूब तालियां बटोरीं। पं. सुखदेव मिश्र ने वायलिन पर राग जोग बजाना शुरू किया और जब दादरा बजाना शुरू किया तो तबला वादक अशोक पांडेय के साथ उनकी खूब नोकझोंक भी हुई।
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निशा के तीसरे कलाकार पं. छन्नूलाल मिश्र बदले अंदाज में नजर आए। आपने पहले राग हेम में विलंबित ‘तुम बिन रैन कल ना परे’ और द्रुत ‘सजनवा संग लागी..’ के बाद राग तिरवट की बंदिश और ठुमरी ‘यमुना तट श्याम ने छीनो हार’ के बाद दादरा और चैती की झड़ी लगा दी।
चैती ‘सेजिया से सैंया रुठ गइले हो रामा ’ सुनाया। तबले पर ललित कुमार और हारमोनियम पर विनय मिश्र ने साथ दिया। समारोह में मंडलायुक्त आरएम श्रीवास्तव, प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय, यूएस अग्रवाल, दीपक मधोक बाबा, बनारस बीड्स के एमडी अशोक गुप्ता ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने आभार प्रकाश किया।