राहत इंदौरी: बनारस वालों आपके लिए और अशफाक के लिए आता हूं, इंडो-पाक मुशायरे में लगातार 21 सालों तक शिरकत
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नायाब लबो लहजे के मालिक राहत इंदौरी और काशी का मुशायरों का रिश्ता था। बेनियाबाग का मैदान मुल्क की शायरी के इस नायाब कोहिनूर की एक आवाज पर झूम उठता था। लगातार 21 सालों तक राहत इंदौरी के शेरों ने बनारस वालों के दिलों पर दस्तक दी है। वह आवाज अब उनके साथ चली गई लेकिन 21 सालों की मुशायरों की यह कड़ी मुसलसल रहेगी।
बेनियाबाग के मुशायरे में राहत इंदौरी को सुनने के लिए हजारों लोग रात भर इंतजार किया करते थे और जैसे ही राहत साहब का नाम लिया जाता, पूरा बेनियाबाग राहत भाई के नाम से गूंज उठता था। वाकया बयान करते हुए अशफाक मेनन की आंखों की कोरें भी नम हो उठीं। कुछ देर बाद आंसुओं को जब्त करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे बड़े भाई का इंतेकाल हुआ है।
आज अकेलापन महसूस हो रहा है। बेनियाबाग मैदान में इंडो-पाक मुशायरा कराने वाले अशफाक मेनन ने बताया कि राहत इंदौरी हर बार मंच से बस यही एक बात कहते थे कि बनारस वालों आप के लिए और अशफाक के लिए आता हूं बनारस। अशफाक ने बताया कि उर्दू अदब का यह शायर जब बनारस आता तो यहां की पूड़ी-कचौड़ी और जलेबी का लुत्फ जरूर उठाता।
वो कहीं घूमने तो नहीं जाते थे, हां खाने के सामान की फरमाइश करते थे, उसे हम होटल पहुंचा दिया करते थे। अशफाक मेनन ने कहा कि मैंने 24 साल मुशायरा कराया और राहत भाई 21 साल लगातार बनारस मेरे मुशायरे में आए। बहुत अफसोस है कि दुनिया का सबसे बेहतरीन उर्दू अदब का सितारा चला गया।