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कांग्रेस के राज में लंबित 99 परियोजनाएं मोदी सरकार ने पूरी कराईं : कृषि मंत्री
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 02 Sep 2018 10:19 AM IST
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केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह
- फोटो : amar ujala
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केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कई ऐसे राजनेता हैं, जो गरीबी क्या होती है नहीं जानते। वे मंच पर दूसरों का लिखा पढ़ते हैं। कांग्रेस के राज में 99 परियोजनाएं लंबित थी जो मोदी सरकार ने पूरी कराईं।
ये इटली नहीं, हिंदुस्तान है, जहां हर खेत को पानी, हर खेत को बिजली हर हाथ को काम देने के अभियान को मोदी सरकार पूरा करने में लगी है। कुछ लोग सरकार से काम कराने के लिए पुरजे भेजते थे। किसानों की अज्ञानता का लाभ दूसरों ने उठाया।
शनिवार को बनारस के बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में बदलता बनारस कृषक कल्याण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें पीएम के संसदीय क्षेत्र के काशी विद्यापीठ, आराजीलाइन और सेवापुरी ब्लॉक से पांच हजार किसानों को बुलाया गया।
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केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राजनाथ की सरकार में धान की खरीदारी हुई थी। उसी प्रकार दलहन और तिलहन की खरीदारी होगी। इसके लिए बुधवार को कैबिनेट में प्रस्ताव लेकर आने वाले हैं। पहले सत्र में 15 किसानों ने सफलता की कहानी सुनाई। इसके अलावा किसानों से मंत्री ने संवाद किया। दूसरे सत्र में कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि से जुड़ी समस्याओं और उसके समाधान के बारे में बताया।
केंद्रीय मंत्री ने काशी के सतत विकास पुस्तक का भी विमोचन किया। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा, राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी, एमएलसी अशोक धवन, केएन सिंह, सुरेंद्र नारायण सिंह, अवधेश सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नागेंद्र रघुवंशी आदि मौजूद रहे।
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ये इटली नहीं, हिंदुस्तान है, जहां हर खेत को पानी, हर खेत को बिजली हर हाथ को काम देने के अभियान को मोदी सरकार पूरा करने में लगी है। कुछ लोग सरकार से काम कराने के लिए पुरजे भेजते थे। किसानों की अज्ञानता का लाभ दूसरों ने उठाया।
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शनिवार को बनारस के बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में बदलता बनारस कृषक कल्याण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें पीएम के संसदीय क्षेत्र के काशी विद्यापीठ, आराजीलाइन और सेवापुरी ब्लॉक से पांच हजार किसानों को बुलाया गया।
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केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि राजनाथ की सरकार में धान की खरीदारी हुई थी। उसी प्रकार दलहन और तिलहन की खरीदारी होगी। इसके लिए बुधवार को कैबिनेट में प्रस्ताव लेकर आने वाले हैं। पहले सत्र में 15 किसानों ने सफलता की कहानी सुनाई। इसके अलावा किसानों से मंत्री ने संवाद किया। दूसरे सत्र में कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि से जुड़ी समस्याओं और उसके समाधान के बारे में बताया।
केंद्रीय मंत्री ने काशी के सतत विकास पुस्तक का भी विमोचन किया। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा, राज्यमंत्री नीलकंठ तिवारी, एमएलसी अशोक धवन, केएन सिंह, सुरेंद्र नारायण सिंह, अवधेश सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नागेंद्र रघुवंशी आदि मौजूद रहे।
हरित क्रांति के साइड इफेक्ट ने किसानों को कर्जखोर बनाया
बनारस में राधा मोहन सिंह
- फोटो : amar ujala
कृषि मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद कैबिनेट में केवल सरदार पटेल थे, जो किसानों की आवाज उठाते थे। 1964 तक कृषि क्षेत्र में कुछ नहीं हुआ। देश दाने दाने को मोहताज था। 65 में मैक्सिको में संकर बीज का प्रादुर्भाव हुआ। इसी दौरान हरित क्रांति हुई। हरित क्रांति का लाभ हुआ तो उसके साइड इफेक्ट ने किसानों को कर्जखोर बना दिया। कई किसान काल के गाल में समा गए।
2000 से 2004 के बीच अटल सरकार में कृषि क्षेत्र में सुधार हुआ। पहले यूरिया के लिए लाठियां खानी पड़ती थी। यूरिया ब्लैक में बिकता था। नीम कोटेड यूरिया 2005 में लाई गई। इससे यूरिया की खपत 10 प्रतिशत कम हुई। स्वामीनाथन ने मिट्टी के स्वास्थ्य पर चिंता जताई। देश भर में लैब खोले गए किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड दिये गए। आर्गेनिक खेती की जा रही है।
कृषि मंत्री ने पशुपालन के बारे में बताया कि गंगातीरी गायों का संवर्धन बनारस में हुआ है। 10 हजार सीमेन स्ट्रिप तैयार हैं। साहीवाल के 2500 सीमेन स्ट्रिप तैयार हैं। नस्ल सुधार के लिए दो अक्टूबर से इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। यह बनारस में भी होगा।
2000 से 2004 के बीच अटल सरकार में कृषि क्षेत्र में सुधार हुआ। पहले यूरिया के लिए लाठियां खानी पड़ती थी। यूरिया ब्लैक में बिकता था। नीम कोटेड यूरिया 2005 में लाई गई। इससे यूरिया की खपत 10 प्रतिशत कम हुई। स्वामीनाथन ने मिट्टी के स्वास्थ्य पर चिंता जताई। देश भर में लैब खोले गए किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड दिये गए। आर्गेनिक खेती की जा रही है।
कृषि मंत्री ने पशुपालन के बारे में बताया कि गंगातीरी गायों का संवर्धन बनारस में हुआ है। 10 हजार सीमेन स्ट्रिप तैयार हैं। साहीवाल के 2500 सीमेन स्ट्रिप तैयार हैं। नस्ल सुधार के लिए दो अक्टूबर से इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। यह बनारस में भी होगा।