काशी में राग रंग महोत्सव: विश्व मोहन की वीणा प्रस्तुति ने जीता दिल, मालिनी के सुरों से सजी संगीत की महफिल
पद्म विभूषण गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल के मंच पर राग रंग महोत्सव की दूसरी संध्या यादगार बन गई। पद्मभूषण विश्वमोहन भट्ट की मोहन वीणा के तार झंकृत हुए तो पद्मश्री येल्ला वेंकटेश्वर राव के मृदंगम ने भी समा बांध दिया।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत राग रंग समारोह में पद्मभूषण विश्वमोहन भट्ट की मोहन वीणा के तार झंकृत हुए तो पद्मश्री येल्ला वेंकटेश्वर राव के मृदंगम ने भी समा बांध दिया। पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने दादरा, ठुमरी और कजरी की प्रस्तुतियों से सर्द शाम में गरमाहट घोली। बृहस्पतिवार को तीन दिवसीय राग रंग महोत्सव की दूसरी संध्या पद्म कलाकारों के नाम रही।
पद्म विभूषण गिरिजा देवी सांस्कृतिक संकुल के मंच पर राग रंग महोत्सव की दूसरी संध्या की शुरुआत डॉ. शिवानी शुक्ला के गायन से हुई। उन्होंने राग जोग में निबद्ध अपने गुरु प्रभावरंग द्वारा रचित बंदिशों से शुरुआत की।
विलंबित एकताल में निबद्ध बंदिश परम सुखदायी जोगिया...के बाद द्रुत तीन ताल में निबद्ध बंदिश अनुपम नाद जोग के जोगी...के बाद ग्वालियर घराने की रचना राग जोग में निबद्ध तराना दिर दिर तनन देरे ना तादानी...की प्रस्तुति से श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
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श्याम बजाए आज मुरलिया,,,लोग हुए मंत्रमुग्ध
अंतिम प्रस्तुति श्री काशी विश्वनाथ धाम को समर्पित तीनताल में निबद्ध चतुरंग देरे ना देरे ना तदानी आशुतोष शिव की शिवानी...रही। इसके बाद जयतीर्थ में उडी ने गायन की शुरुआत राम यमन कल्याण में विलंबित एक ताल में पिया बिन रतिया बैरन भई...से की। इसके बाद द्रुत तीन ताल में निबद्ध बंदिश श्याम बजाए आज मुरलिया ने तो सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन जय जगदीश्वरी माता सरस्वती... से किया। तबले पर यशवंत वैष्णव, हारमोनियम पर तन्मय देवचके तथा तानपुरे पर मोहित तिवारी व प्रतीक्षा उपाध्याय ने संगत की।
झंकृत हुए विश्वमोहन की मोहन वीणा के तार
मालिनी अवस्थी ने सर्द शाम में गरमाहट घोली
चौथी प्रस्तुति में पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने मंच संभाला। उन्होंने बनारस घराने की पारंपरिक रचनाओं के प्रवाह से शुरुआत की। इसके बाद राग देश में निबद्ध ठुमरी मोरा सैयां बुलावे आधी रात नदिया बैरन भई...के बाद राग मिश्र में दादरा पानी भरे झमाझम के साथ ही पारंपरिक टप्पा मियां नजरे नहीं आंदा वे... सुनाकर अपनी गुरु पद्मविभूषण गिरिजा देवी की स्मृतियों को तरोताजा कर दिया।
मालिनी ने दादरा गुजर गई रतिया सैयां ना आए... के बाद राग शहाना में निबद्ध विवाह पर आधारित रचना मीठी बनरी को लुभाना रे बनरा...सुनाया। अंतिम प्रस्तुति में सोहर चुनरिया पहिरा दे भौजी मोरी...की प्रस्तुति दी।
मृदंगम की सदाबहार प्रस्तुति
पांचवीं प्रस्तुति में पद्मश्री येल्ला वेंकटेश्वर राव ने मृदंगम की सदाबहार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। काशी विश्वनाथ धाम यात्रा के अंतर्गत केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, संस्कृति विभाग एवं धर्मार्थ विभाग की ओर से कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य, सचिव तरुण राज, लवकुश द्विवेदी राजुदास, डॉ. सुभाषचंद्र यादव, अतुल सिंह एवं संजय भारद्वाज मौजूद रहे।