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शहर से गांव तक अंतिम संस्कार के लिए कतार
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वाराणसी। कोरोना संक्रमितों के शवदाह के लिए अब शहर से लेकर गांव तक कतार लगी है। हरिश्चंद घाट पर सीएनजी शवदाह गृह खराब होने के कारण अंतिम संस्कार कराने वालों को लंबा इंतजार भी करना पड़ रहा है।
शनिवार को हरिश्चंद घाट पर कोरोना संक्रमितों का लकड़ी से अंतिम संस्कार कराया गया। सुबह से ही घाट पर अफरातफरी का आलम रहा। संक्रमण को देखते हुए शवयात्रियों की संख्या तो सीमित है लेकिन शवदाह कराने के लिए पांच से छह घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, कोरोना संक्रमित शव के साथ एक या दो आदमी होने के कारण कंधा देने वालों का नया धंधा शुरू हो चुका है। शव उठाने के लिए घाट पर रहने वाले चार से पांच हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। विवशता के कारण लोगों को देना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर दबाव बढ़ने के कारण मलहिया स्थित श्मशान घाट पर शवदाह के लिए भीड़ बढ़ गई थी। लोहता, बेटावर, रामेश्वर सहित ग्रामीण इलाकों के श्मशान स्थल पर भी शवयात्रियों का दबाव बना रहा। ग्रामीण इलाकों में अचानक तेजी से श्मशान घाट पर शवदाह की संख्या में इजाफा होने के कारण दहशत का माहौल है। ग्रामीण इलाकों में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
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शनिवार को हरिश्चंद घाट पर कोरोना संक्रमितों का लकड़ी से अंतिम संस्कार कराया गया। सुबह से ही घाट पर अफरातफरी का आलम रहा। संक्रमण को देखते हुए शवयात्रियों की संख्या तो सीमित है लेकिन शवदाह कराने के लिए पांच से छह घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, कोरोना संक्रमित शव के साथ एक या दो आदमी होने के कारण कंधा देने वालों का नया धंधा शुरू हो चुका है। शव उठाने के लिए घाट पर रहने वाले चार से पांच हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। विवशता के कारण लोगों को देना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर दबाव बढ़ने के कारण मलहिया स्थित श्मशान घाट पर शवदाह के लिए भीड़ बढ़ गई थी। लोहता, बेटावर, रामेश्वर सहित ग्रामीण इलाकों के श्मशान स्थल पर भी शवयात्रियों का दबाव बना रहा। ग्रामीण इलाकों में अचानक तेजी से श्मशान घाट पर शवदाह की संख्या में इजाफा होने के कारण दहशत का माहौल है। ग्रामीण इलाकों में इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।
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