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वाराणसी में पुतुल उत्सव: कठपुतलियां सुनाएंगी काशी में बलिदानियों की कहानी, आज से 23 तक आयोजन

Mon, 21 Mar 2022 10:20 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 21 Mar 2022 10:20 AM IST
सार

पुतुल उत्सव का उद्देश्य देश की आजादी के लिए प्राणों को न्योछावर कर देने वाले बलिदानियों को स्मरण करना है। तीन दिनों में सात संस्थाएं आधे-आधे घंटे की प्रस्तुतियां देंगी।

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Putul festival in Varanasi, Puppets will tell the story of sacrifices in Kashi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

वाराणसी में कठपुतलियां तीन दिन तक काशीवासियों को देश के बलिदानियों की कहानियां सुनाएंगी। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली व सुबह ए बनारस की ओर से तीन दिवसीय पुतुल उत्सव का आयोजन 21 से 23 मार्च तक किया जाएगा।

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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत इसका प्रदर्शन पहले दो दिन अस्सी घाट पर तो अंतिम दिन दीनदयाल हस्तकला संकुल बड़ालालपुर में होगा।  संयोजक जगदीश केसरी ने बताया कि उत्सव का उद्देश्य देश की आजादी के लिए प्राणों को न्योछावर कर देने वाले बलिदानियों को स्मरण करना है। तीन दिनों में सात संस्थाएं आधे-आधे घंटे की प्रस्तुतियां देंगी।

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राजस्थान जाकर हो गई कठपुतली

वास्तव में यह पुतुल है और जब राजस्थान में जाती है और काठ के चेहरे और हाथ पाती है तो कठपुतली हो जाती है। वैसे अलग-अलग जगहों पर इसके अलग-अलग नाम हैैं। पूर्वांचल में बालिकाओं को बालपन के खेल में शुमार है। यह पुतरी कही जाती है।

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21 से 23 मार्च तक आयोजन

21 मार्च - शाम सात बजे
- स्वागत आकार- पपेट थिएटर नई दिल्ली, निर्देशक पूरन भट्ट
- आखिरी सलाम- गगनिका सांस्कृतिक समिति शाहजहांपुर, निर्देशक कप्तान सिंह कर्णधार

22 मार्च - शाम सात बजे
-अवध की चिंगारियां-दीपा पपेट थिएटर लखनऊ, निर्देशक दीपा मित्रा
-बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ- अनुभव पपेट थिएटर लखनऊ, निर्देशक नरेंद्र साहू

23 मार्च - सुबह 11 बजे
- आजाद- सूत्रधार एकेडमी लखनऊ, निर्देशक मिलन यादव
- मोहन से महात्मा- क्रिएटिव पपेट थिएटर वाराणसी, निर्देशक मिथिलेश दुबे
- प्रकृति की महिमा- अभिनव समिति वाराणसी, निर्देशक राजेंद्र श्रीवास्तव

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